प्रवीण कुमार खारीवाल, इंदौर स्टूडियो। ‘सफलता का कोई शॉर्ट कट नहीं होता। सफलता पाने के लिये हमें निरंतर कोशिशें करते रहना पड़ता है’। प्रख्यात अभिनेता राजेंद्र गुप्ता ने यह बात इंदौर में स्टेट प्रेस क्लब द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘रूबरू’ में कही। वे पत्रकारों साथ ही स्थानीय कलाकारों के पूछे गये सवालों के जवाब दे रहे थे।
फटाफट सफलता की तालीम अहितकर: अपनी विविध भूमिकाओं से दर्शकों के दिलों में एक अलग पहचान बनाने वाले अनुभवी अभिनेता ने कहा- ‘दुर्भाग्य से हमारे यहाँ बच्चों को ‘शॉर्ट कट’ से जल्द सफलता हासिल करने की तालीम दे दी जाती है। मगर यह उनके हित में नहीं होता। अभिनय के क्षेत्र में भी ‘शार्ट कट’ से कोई आगे नहीं बढ़ सकता। राजेंद्र गुप्ता ने इन दिनों नाटक ‘जीना इसी का नाम है’ में अपने दिलचस्प अभिनय से भी सुर्खियों में हैं। उन्होंने इस संबंध में पूछे गये सवाल पर कहा, ‘नाटक तो छोड़िये, अगर जीवन में भी कठिनाई नहीं आती तो फिर जीवन जीने का मक़सद ही क्या है? कठिनाइयों का सामना कर जब हम जीवन में सफलता हासिल करते हैं, तब उसका मज़ा कुछ और होता है’।
पहले से बेहतर करने की कोशिश जारी: राजेंद्र गुप्ता ने विनम्रता से कहा- ‘मैं बीते 50 साल से रंगमंच, सिनेमा या टीवी धारावाहिकों आदि के लिये काम करता आया हूँ। बहुत से काम किये हैं। मगर आज भी कोशिश करता हूँ कि मैं पहले से और बेहतर कर सकूँ, यह सिलसिला अब तक जारी है’। आपको बता दें, राजेंद्र गुप्ता 40 से अधिक धारावाहिकों में विविध भूमिकाएं निभा चुके हैं। शुरूआती दिनों में धारावाहिक ‘चंद्रकांता’ में पंडित जगन्नाथ के किरदार से वे ख़ासे चर्चा में आये थे।
90 के दशक के लोकप्रिय टीवी अभिनेता: इसी तरह धारावाहिक साया, इंतज़ार, नुक्कड़ जैसे धारावाहिकों ने उन्हें 90 के दशक में हर घर का जाना-पहचाना कलाकार बना दिया था। हाल ही में वे ‘जगन्नाथ और पूर्वी की दोस्ती’ शो से चर्चा में आये थे। राजेंद्र जी ने कई फ़िल्मों में काम किया है। सुधीर मिश्रा की फ़िल्म ‘ये वो मंज़िल नहीं’ के बाद बॉलीवुड में उनके क़दम जमने लगे। लगान, सलीम लंगड़े पर मत रो, गुरू, सहर, मेकिंग ऑफ़ संविधान, पान सिंह तोमर और तनु वेड्स मनु जैसी कई फ़िल्मों में उन्होंने अपने अभिनय की छाप छोड़ी। उनका नाम लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में भी दर्ज है।
20 से अधिक नाटकों का निर्देशन: राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के स्नातक राजेंद्र जी ने 20 से अधिक नाटकों का निर्देशन भी किया है। पत्नी वीना की वजह से उनका नाता इंदौर से जुड़ा हुआ है। कम ही लोग जानते हैं कि उन्होंने इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज में 1982-83 में एक थियेटर वर्कशॉप का भी संचालन किया था। तब उन्होंने तत्कालीन प्राचार्य और ख्यात लेखक स्व. विनोद डेविड रचित नाटक ‘बाँझ रात’ का निर्देशन किया था। उस नाटक के बहुत से कलाकार आज रंगमंच,टीवी,फिल्म में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं।
काल्पनिक आदर्शवाद की बात बेमानी: ओटीटी पर अश्लील कंटेट के सवाल पर श्री गुप्ता ने कहा – ‘हम अपने देश की मर्यादाओं के मान से प्रतिक्रिया दे सकते हैं, लेकिन इस प्लेटफार्म पर दुनिया का और अश्लील कंटेंट उपलब्ध है, उससे कैसे बचेंगे? असल में ओटीटी प्लेटफार्म पर सुधार की बात काल्पनिक आदर्शवाद नजर आती है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आज भी सबसे ज्यादा शराब उन्हीं राज्यों में बेची जाती है, जहाँ शराब बंदी होती है। दर्शकों को चाहिए कि वे अपनी आत्मा की आवाज पर सीरियल और फिल्में देखें। जो नहीं जमता, उससे हट जायें।
विरोध राजनीति का हिस्सा भी: फिल्मों के बहिष्कार से जुड़े सवाल पर राजेंद्र गुप्ता ने कहा, ‘यह राजनीति का हिस्सा भी है। विरोध की वजह यह होना चाहिए जिसे जो फिल्म पसंद ना हो, वह उसे ना देखें। विरोध का असर हुआ होता तो ‘पठान’ फिल्म सबसे ज्यादा कमाई वाली नहीं बनती’। फिल्मों में परिवारवाद के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि परिवारवाद से कोई भी नहीं बच पाया। समाज के हर वर्ग में इसका असर देखने को मिलता है। मगर सफलता उन्हीं को मिलती है, जिनमें प्रतिभा होती है’। कार्यक्रम से पहले श्री गुप्ता का स्वागत स्टेट प्रेस क्लब की तरफ़ से स्वागत सोनाली यादव, उर्मी शर्मा, वरुण जोशी, सिमरन शर्मा ने किया। आकाश चौकसे ने स्मृति चिह्न भेंट किया।
हॉल और ओपन थियेटर का अवलोकन: इस संवाददाता को अभिनव कला समाज और स्टेट प्रेस क्लब के अध्यक्ष होने के नाते, राजेंद्र गुप्ता जी को अभिनव के उस हॉल का अवलोकन कराने का अवसर मिला, जहाँ पर इन दिनों तेज़ी से पुर्ननिर्माण का काम चल रहा है। राजेंद्र जी ने 262 सीटों के ओपन थियेटर को भी देखा जो अब लगभग बनकर तैयार है। यह सब देखकर राजेंद्र जी चौंके, और कहा – ‘रंगमंच के लिये कोई संस्था इस तरह से काम कर रही है। यह देखकर मुझे बेहद ख़ुशी हो रही है,साथ में हैरानी भी’। बाद में इस सीनियर एक्टर ने अभिनव कला समाज के उन रंगकर्मियों मे मुलाक़ात की, जो उनसे मिलने के लिये कार्यक्रम में पहुँचे थे। श्री गुप्ता ने इन कलाकारों के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं और वे उनकी याद का हिस्सा भी बन गये।
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