Wednesday, May 20, 2026
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सफ़दर शामी ने बनाये कैफ़ी आज़मी के पोट्रेट्स, जावेद-शबाना ने जारी किया कैलेंडर

                                            
शकील अख़्तर, इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। ‘मेरे लिये यह बेहद खुशी की बात है कि कैफ़ी आज़मी जैसे मशहूर शायर और गीतकार के जन्म शताब्दी वर्ष पर जारी कैलेन्डर के सभी पोट्रेट्स बनाने का शर्फ मुझे हासिल हुआ है। हालांकि चित्रकला के सफ़र में मैंने कई प्रमुख शख्सियतों के पोट्रेट्स बनाए हैं लेकिन कभी-कभी ऐसा मौका आता है जब आप किसी ऐसी शख्सियत के लिये भी काम कर पाते हैं जिनका हुनर और काम हर कलाकार के मन में बसता हो।‘ इंदौर स्टुडियो से चर्चा करते हुए यह ख्यात चित्रकार सफदर शामी ने कही। देखिये इंदौर स्टुडियो के लिये भेजा गया सफ़दर शामी का ख़ास वीडियो।

एक अरसे से मुंबई में रह रह मालवा के इस कलाकार ने बताया, ‘जावेद अख़्तर और शबाना आज़मी ने कैफी साहब के कैलेंडर को उनके घर जानकी कुटीर पर 10 जनवरी को लांच किया है।‘ सफदर बताते हैं,’ शबाना आज़मी की ख्वाहिश पर ही उन्होंने दिल्ली से अंग्रेजी में प्रकाशित होने वाली कैफ़ी आज़मी और जांनिसार अख़्तर की किताबों के लिए भी पोर्ट्रेट्स बनाए हैं। दिल्ली में जल्द होने वाली प्रदर्शनी में शिरकत करेंगे :  सफदर का काम दिल्ली में 8 से 21 अप्रैल तक  “इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फ़ॉर आर्ट्स” (IGNCA) में आयोजित प्रदर्शनी में भी प्रदर्शित होगा। उन्होंने कहा, “द लर्निंग कर्व” The Learning Curve शीर्षक के तहत होने वाली इस प्रदर्शनी के लिए देश के चुनिंदा चित्रकारों ने भारतीय भाषाओं के किसी एक अक्षर को लेकर कृतियां बनाई हैं।अफ़ज़ल जैसे चित्रकार का मिला मार्गदर्शन : मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव भौंरासा में जन्मे सफ़दर, ग्रेजुएशन के लिए जब देवास आए तो उन्हें अफ़ज़ल साहब जैसे असाधारण चित्रकार का मार्गदर्शन मिला। सफ़दर अपने आप को सौभाग्यशाली मानते हैं कि गुरु के तौर पर उन्हें अफ़ज़ल साहब जैसे कलाकार मिले। बाद में भविष्य की संभावनाएं तलाशने के लिए सफ़दर इंदौर आए। लंबे अरसे तक इंदौर में रहे। उस समय के साप्ताहिक अख़बार ‘प्रभात किरण’ और बाद में ‘चौथा संसार’ के लिए काम किया। सफ़दर ने महसूस किया कि चित्रकारी के लिए मुंबई जैसे महानगर में ही अधिक गुंजाइश है। इसलिए 1994 में मुंबई पहुंच गए। सफदर बताते हैं, ‘मुंबई मेरे लिये तब अपरिचित थी। बस दिल में चित्रकला को लेकर कुछ करने का सपना था। अच्छी बात यह रही कि यहां पर मुझे पत्रकार, कवि और फ़िल्म निर्माता प्रीतिश नंदी और मिड-डे के तत्कालीन संपादक अयाज़ मेमन का भरपूर सहयोग मिला। उस वक्त मैं टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस, मिड-डे, नवभारत टाइम्स, जनसत्ता जैसे समाचार पत्रों के साथ फ़्रीलांस आर्टिस्ट की हैसियत से काम करने लगा। 1995 में इंडियन एक्सप्रेस ने जॉब के लिए ऑफर दिया लेकिन उन्होंने नौकरी की बजाय स्वतंत्र रहकर चित्रकारी को ही प्राथमिकता दी।‘

पहली प्रर्दशनी में बिकी सारी पेटिंग्स :  सफ़दर बताते हैं, ‘1996 में जाने-माने आर्ट डीलर आशीष बलराम नागपाल ने मुंबई में सफ़दर की पहली एकल प्रदर्शनी की और पहले ही दिन सारे पेंटिंग्स बिक गये।‘ इसके बाद उनके काम को और भी रफ्तार मिली। मौलिक रूप से अमूर्त चित्रकार सफ़दर शामी ने जहांगीर आर्ट गैलरी समेत देश के विभिन्न शहरों और विदेशों में कईं  एकल और सामूहिक प्रर्दशनियां कीं। 2018 में रूस यात्रा की और ‘येकतरिनबर्ग’ में एक अंतरराष्ट्रीय प्रर्दशनी में शिरकत की। सॉदबी नामक कला की अंतर्राष्ट्रीय नीलाम कंपनी के 2003 के मुंबई ऑक्शन में सफ़दर की पेंटिंग भी शामिल थी।

सफ़दर शामी के बनाए हुए शास्त्रीय संगीत कलाकारों और हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकारों के ऑईल पोर्ट्रेट ‘ऑल इंडिया रेडियो’ दिल्ली के स्थायी संग्रह में हैं। वसुंधरा‌ राजे, मुख़्तार अब्बास नक़वी, श्रद्धा कपूर, वरुण धवन, टीना अंबानी, निर्देशक नितिन मनमोहन, प्रीतिश नंदी, जावेद अख़्तर, शबाना आज़मी, राहुल बजाज आदि के कलेक्शन में सफ़दर शामी की पेंटिंग्स हैं।

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