Monday, September 7, 2026
Homeकला खबरेंसमर्पित भाव से सीखें शास्त्रीय गायन : पं.सुनील मसूरकर

समर्पित भाव से सीखें शास्त्रीय गायन : पं.सुनील मसूरकर

शकील अख़्तर, इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। ग्वालियर घराने के ख्यात गायक पं. सुनील मसूरकर ने शास्त्रीय की दुनिया में आने वाले विद्यार्थियों से कहा है कि वे पूरे समर्पण भाव से इस परंपरा को सीखें और इसमें आगे बढ़ें। संगीत एक साधना है, इसमें धीरज से हर बात को सीखकर आगे बढ़ना होता है। पं. मसूरकर ने कहा,  शास्त्रीय गायन के क्षेत्र में 5 दशक की यात्रा के दौरान ख़ुद उन्होंने भी यही सीखा है। उन्होंने कहा कि इंदौर में शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में बहुत से शिष्य बड़े मनोयोग से गायन सीख रहे हैं। इसमें उनकी सुपुत्री शिल्पा मसूरकर भी शामिल हैं। सुनील जी ने बताया, बचपन में मां को गाते देखकर वे बड़े हुए और पिता से उन्हें मार्गदर्शन और संगीत की शिक्षा मिली। इस वीडियो में सुनिये उनकी यही बातें। डॉ. शिल्पा मसूरकर ने ही अपने गुरूतुल्य पिता से यह बातचीत की है। पं.सुनील मसूरकर इंदौर के संगीत महाविद्यालय में गायन की शिक्षा से जुड़े रहे हैं। आपके मध्यभारत में बहुत से ऐसे शिष्य हैं जो आज ग्वालियर घराने की गायन परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। वे समय-समय पर अपने संगीत कार्यक्रमों के ज़रिये उन्हें मार्गदर्शन देते रहते हैं। साथ ही स्थानीय अभिनव कला समाज में विद्यार्थियों को गायन की तालीम भी दे रहे हैं।

संगीत के कलाकार से बरसों पुराना नाता : सुनील मसूरकर मेरे तीस साल पुराने मित्र हैं । हम ग्वालियर के युवा दिनों में संपर्क में आये थे। उस वक्त लश्कर में मौजूद उनके घर पर अक्सर संगीत की महफिलें होती थी। इनमें उनके परिवार के दूसरे गायकों के साथ ही उन्हें भी सुनने का अवसर मिलता था। हाल ही में इंदौर के रामबाग स्थित उनके निवास पर मेरी उऩसे फिर मुलाकात हुई। इस मुलाकात के वक्त उनकी बेटी डॉ. शिल्पा और पत्नी श्रीमती अंजलि जी से भी हमेशा की तरह मिलना हुआ। पारिवारिक बातें हुईं। शिल्पा का हाल-चाल जाना।अपने गुरू और पिता के पद्चिन्हों पर शिल्पा :  शिल्पा मसूरकर भी पिता के पदचिन्हों पर आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने हाल ही में शास्त्रीय संगीत के अपने शोध में पीएचडी हासिल की है। डॉ. शिल्पा के भी गायन के कार्यक्रम निरंतर जारी हैं। वे अपने पिता के साथ और स्वतंत्र रूप से भी अपने शास्त्रीय गायन के कार्यक्रम दे रही हैं। शिल्पा अपने पिता को ही अपना पहला गुरू भी मानती हैं, इसलिये इंदौर स्टुडियो के लिये उन्होंने ही पिता सुनील मसूरकर के संगीत सफर पर बातचीत की है। इस दिलचस्प बातचीत को देखकर आपको अहसास होगा, पं. सुनील मसूरकर कितने सहज तरीके से संगीत की सेवा में जुटे हैं। सहज सरल पारिवारिक जीवन में हैं। स्वनामधन्य संगीत गुरूओं की तस्वीरें:  इस मुलाकात की कुछ तस्वीरें भी हम यहाँ पर साझा कर रहे हैं। इनमें सुनील जी को मिली प्रशस्ति के साथ ही उनके कमरे में दीवार पर लगी स्वनाम धन्य संगीत गुरूओं की तस्वीरें हैं। इन तस्वीरों को देखते हुए मुझे याद आता है, एक ज़माने में सुनील जी के घर बड़े गायक और वादक कलाकारों के ऑडियो कैसेट थे। उन्हें सुनते हुए अक्सर सीखने के लिहाज से चर्चा होती थी। मैं शास्त्रीय गायन या वादन के बारे में बहुत गहराई से तो नहीं समझता, मगर तब सुनील और उनके परिवार में होने वाली उन चर्चाओं से बहुत कुछ जानने और समझने को मिलता था। बाद में उससे मुझे कुछ रिपोर्ट्स लिखने में मदद भी मिली।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

जावेद अहमद शाह ख़ान "अल-हिंदी" on रंगमंच की नई उड़ान…सौम्या व्यास