शकील अख़्तर,इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। ‘मां कहा करती थीं,आना-जाना जीवन का अटल सत्य है। इस आने-जाने के बीच हम क्या करते हैं, यही मायने रखता है। इसी बात को ध्यान रखते हुए कला उत्सव का यह पहला दीप प्रज्जवलित कर रही हूं’। मार्गी नृत्यशाला,दिल्ली की जानी-पहचानी कथक गुरू सोनिया गुप्ता रॉव ने इन शब्दों के साथ अपनी स्व. मां सविता गुप्ता की स्मृति में ‘समप्रभा कला उत्सव’ का गुरूवार की शाम शुभारंभ किया। इस पहले ऑनलाइन उत्सव में नृत्य और गायन के साथ दो शॉर्ट फ़िल्में भी दिखाईं गईं।
सोनिया गुप्ता रॉव ने कार्यक्रम में कहा कि कोरोना संकट की वजह से फिलहाल यह उत्सव वर्चुअल है लेकिन भविष्य में यह मंच पर होगा और इसमें सभी कला विधायें शामिल रहेंगी। उत्सव का संचालन श्रीमती भारती डांग ने किया। उन्होंने सबसे पहले ख्यात गायिका विधि शर्मा को उनके हिंदुस्तानी गायन के लिये आमंत्रित किया। विधी शर्मा ने सबसे पहले अपने अलबम आग़ाज़ से एक गज़ल ‘बहुत अज़ीज़ था..’ प्रस्तुत की। इसके बाद अपनी सुमधुर आवाज़ में उन्होंने क्रमश: मीरा और कबीर के ख्यात भजन प्रस्तुत किये।
बता दें विधि शर्मा ‘पान सिंह तोमर, लिसिन अमाया, रब्बा मैं क्या करूं’ जैसी फ़िल्मों के साथ कई शॉर्ट फ़िल्मों और देश-विदेश में अपने कार्यक्रम प्रस्तुत कर चुकी हैं। उत्सव की एक और ख़ास बात इसमें रिषी भूटानी अभिनीत दो शॉर्ट फ़िल्में रहीं। पहली शॉर्ट फ़िल्म ‘नो स्मोक’ और दूसरी ‘एलओसी’। ‘नो स्मोक’ ने संदेश दिया,स्मोकिंग मतलब सुसाइड और ‘एलओसी’ ने बताया खेल मतलब दोस्ती…,नफ़रत और दुश्मनी की हदों के पार। रिषी भूटानी दोनों ही फ़िल्मों में सधा अभिनय करते नज़र आये। वे बॉलीवुड में ‘जो राम रतन,जय जवान जय किसान,गांधीगीरी और वोदका डायरीज़ जैसी दर्जन भर फ़िल्मों से अपनी पहचान बना चुके हैं।
कार्यक्रम में स्वाभाविक रूप से कथक की आकर्षक प्रस्तुतियां भी रहीं। ख़ुद कथक गुरू सोनिया गुप्ता राव ने वंदना के साथ ही राग यमन में किशोरी अमोनकर के गाये गीत ‘म्हारो प्रणाम बांके बिहारी’ पर अपना भावपूर्ण प्रस्तुति दी। वहीं उनकी शिष्या समाद्रिता चंदा ने भी अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को सम्मोहित किया।
समाद्रिता अपनी गुरू की तरह एक प्रतिभाशाली नृत्य कलाकार हैं और वे सोनिया गुप्ता के निर्देशन में खैरागढ़ संगीत महाविद्यालय से स्नातकोत्तर की शिक्षा ले रही हैं। बहुत से कार्यक्रम प्रस्तुत कर चुकी हैं। नृत्य कला को लेकर ऑनलाइन शोज़ करती रहती हैं। जबकि उड़ीसा राज्य सरकार की तरफ़ से नृत्य शिरोमणि अवार्ड और संस्कृति मंत्रालय से फेलोशिप हासिल करने वालीं सोनिया गुप्ता कुछ महत्वपूर्ण फ़िल्म और टीवी शोज़ का हिस्सा रही हैं। 
उत्सव के आधार बिंदुओं पर सोनिया गुप्ता रॉव ने कहा, ‘समप्रभा उत्सव की कल्पना तीन आधार स्तंभों पर आधारित है। पहला स्तंभ का आधार, कार्यक्रम में सभी कला विधाओं को शामिल किया जाना है। हमारी कल्पना है कि हम केवल नृत्य पर केंद्रित कार्यक्रम ही नहीं बल्कि सभी कला विधाओं को शामिल कर यह आयोजन करे। दूसरे स्तंभ का आधार, प्रतिष्ठित और नवोदित कलाकारों के प्रदर्शन का है। यानी जहां प्रतिष्ठित कलाकार नये कलाकारों के साथ काम कर उनकी सोच को समझें, वहीं नवोदित कलाकार प्रतिष्ठित कलाकारों के अनुभव से भी बहुत कुछ सीख सकें। तीसरे स्तंभ है,’नो टू फ्री परफॉरमेंस’। मतलब कलाकारों की प्रस्तुतियां नि:शुल्क ना हो। उन्हें उनके काम का कम ही सही लेकिन उचित मानदेय ज़रूर मिले। उनकी परिश्रम और समपर्ण का मूल्य हो। विशेषकर शास्त्रीय कलाओं के संदर्भ में इस विषय में गंभीरता से सोचा जाना चाहिये। मैं यह कोशिश करूंगी’। सोनिया गुप्ता ने कहा, ‘निसंदेह मेरे काम में मेरे पति श्री सीसी रॉव बहुत सहयोग मिलता है, उनके सहयोग के बिना यह काम संभव नहीं। परंतु एक समय जब मैं नृत्य कला के क्षेत्र से अपरिचित थी। तब मेरी मां स्व.सविता गुप्ता ने ही मुझे इस राह पर चलने और कुछ करने के लिये प्रेरित किया। यह उत्सव उनकी ही प्रेरणा का दीप है, जो मैं जलाये रखना चाहती हूं।’

