राज बेन्द्रे, इंदौर स्टूडियो। हाल ही में इंदौर में राग अमीर का आयोजन हुआ। म.प्र शासन संस्कृति विभाग,उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी व म.प्र संस्कृति परिषद भोपाल का यह वार्षिक प्रतिष्ठापूर्ण आयोजन है। तीन दिवसीय इस आयोजन में जहाँ एक तरफ़ सुरों की इंद्रधनुषी छटा बिखरी, वहीं दूसरी तरफ़ रागदारी पर सार्थक व्याख्यानमाला के साथ 85 कलाकारों की चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन भी हुआ। पूरे आयोजन में युवाओं की ख़ासी भागीदारी रही।
राग अमीर कलाकारों का प्रेरक आयोजन: इंदौर के रविन्द्र नाट्य गृह इसके शुभारंभ समारोह को मध्यप्रदेश की संस्कृति और पर्यटन मंत्री सुश्री ऊषा ठाकुर ने संबोंधित किया। उन्होंने कहा, ‘राग अमीर’ का आयोजन कलाकारों के साथ ही श्रोताओं को प्रेरणा देता है और यह ख्याल गायकी की निरंतरता का सशक्त माध्यम है। राग अमीर विगत 35 वर्षों से आयोजित होता रहा है। कलाकार प्रभु प्रदत्त शक्तियों को प्राप्त होता है। कला साधक इक्कीसवीं शताब्दी में भारत का परचम दुनिया में फहराये, मेरी यही कामना है। आयोजन में उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक जयंत माधव भिसे और अकादमी के उप निदेशक राहुल रस्तोगी और अमीर खाँ परिवार के शाहबाज खान मौजूद थे। सभी सत्रों का संचालन कला समीक्षक और उदघोषक विनय उपाध्याय ने किया।
पहला दिन/उस्ताद निशात खाँ की प्रारंभिक प्रस्तुति: पहले दिन कार्यक्रम का शुभारंभ ख्यात सितार वादक उस्ताद निशात खाँ ने अपने सितार वादन से किया। इमदाद खानी घराने की सातवीं पीढ़ी के प्रतिनिधि उस्ताद निशात खाँ मात्र तेरह वर्ष की उम्र से मंचीय प्रस्तुति देते आ रहे हैं। निशात खाँ ने सबसे पहले राग यमन मे प्रस्तुति आरंभ की। आपके वादन में न केवल मिठास है बल्कि रागों का प्रस्तुतिकरण भी बेहद आकर्षक है। आपके साथ तबले पर अंशुल प्रताप सिंह ने सधी हुई संगत की।
मोहम्मद अमान खाँ का शास्त्रीय गायन: अगली प्रस्तुति टोंक राजस्थान के संगीतज्ञ परिवार के युवा प्रतिनिधि मोहम्मद अमान खाँ के शास्त्रीय गायन की थी। आपने राग से गायन आरंभ किया। राग बागेश्री में आपने धीर गंभीर आलापी की और राग के एक-एक सुर को साथ में लेते हुए राग की प्रकृति के अनुरूप प्रस्तुतिकरण दिया। विलंबित एकताल मे निबद्ध बंदिश ए बमना देहो में आपने सहज प्रस्तुतिकरण दिया और ख़ासतौर पर सहजता और सरलता के साथ तानों की प्रस्तुति से गायन और निखर उठा। इसी राग में द्रुत एकताल मे निबद्ध रचना अपनी गरज मे आपने तानों के विभिन्न प्रकार प्रस्तुत किए। आपके साथ तबले पर सलीम अल्लाहवाले और हारमोनियम पर भरत जोशी ने संगत की।
दूसरा दिन/सुप्रियो दत्ता के साथ कमल कामले की प्रस्तुति: राग अमीर के दूसरे दिन सबसे पहले मंच संभाला कोलकाता के सुप्रियो दत्ता ने। आपने इंदौर घराने के पंडित रामकृष्ण बसु के अलावा पं. विजय किचलू और शुभ्रा गुहा जैसे नामचीन कलाकारों से तालीम पाई है और आपने सबसे पहले गायन की शुरुआत उस्ताद अमीर खाँ साहब के प्रिय रागों मे से एक राग मारवा से की। सुप्रियो दत्ता ने राग की प्रकृति और गंभीरता के अनुरूप बेहतरीन प्रस्तुतिकरण दिया। ताल झुमरा में आपने विलंबित रचना प्रस्तुत की। वही तीन ताल में निबद्ध ‘गुरु बिन ज्ञान कहाँ से पाऊँ’ काफी पसद की गई। आपके साथ तबले पर श्री हितेन्द्र दीक्षित ने और हारमोनियम पर रचना पौराणिक ने सधी हुई संगत की। इसके बाद इंदौर के वायोलिन वादक कमल कामले ने राग पूरिया धनाश्री में अपनी प्रस्तुति आरंभ की। सुरावट और माधुर्य से भरे आपके वायलिन वादन में सुरों की गहराई और तैयारी दोनों ही नजर आई। विलंबित एकताल में निबद्ध गत के पश्चात तीन ताल में आपने गत प्रस्तुत की। गमक मींड आपके वादन को और भी निखार रहा था। आपके साथ तबले पर रामेन्द्र सिंह सोलकी ने संगत की। उनते हाज विदुषी आरती अंकलीकर टिकेकर ने राग जोगकौंस से प्रस्तुति आरंभ की। आरती जी के गायन में सुरों का लगाव इतना शानदार है कि प्रत्येक सुर निखर उठता है।
तीसरा दिन / सुरेश गंधर्व का गायन और कमला शंकर का गिटार वादन: तीसरे दिन स्थानीय रवीन्द्र नाट्य गृह में सभा की अंतिम प्रस्तुति हुई। इसमें वाराणसी से पधारी विदुषी कमला शंकर ने स्लाइड गिटार की प्रस्तुति दी। विदुषी कमला शंकर जी को देश की पहली महिला हिन्दुस्तानी शास्त्रीय स्लाइड गिटार वादिका का गौरव प्राप्त है। प.छन्नूलाल मिश्र व पं विमलेन्दु मुखर्जी की शिष्या कमला जी ने शंकर स्लाईड गिटार का आविष्कार भी किया है। आपने राग जोग से प्रस्तुति आरंभ की। तंत्रकारी अंग की सभी खूबियों को समेटे आपके वादन में मधुरता है। आपके साथ तबले पर निसार अहमद ने संगत की।
इंदौर घराने के ही सुरेश गंधर्व का गायन: उनके पहले दिल्ली से पधारे कलाकार सुरेश गंधर्व ने प्रस्तुति दी। इंदौर घराने के ही सुरेश जी ने उस्ताद अमीर खाँ साहब के शिष्य प्रो.आर.एस बिष्ट से अपनी संगीत की शिक्षा ली है और इस कारण उनके गायन में इंदौर घराने की छाप साफ झलकती है। आपने राग पूरिया धनश्री से अपनी प्रस्तुति आरंभ की। तबले पर हितेंद्र दीक्षित एवं हारमोनियम पर रवि किल्लेदार ने संगत की। सभी सत्रों में कलाकारों का स्वागत उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक जयंत माधव भिसे ने किया। संचालन विनय उपाध्याय ने किया।
विविध माध्यमों में चित्रकला की वीथिका में प्रदर्शनी: इस अवसर पर स्थानीय देवलालीकर कला वीथिका एमजी रोड पर एक प्रदर्शनी भी लगाई गई। राष्ट्रीय स्तर की इस प्रदर्शनी मे ललित कला से जुड़े सभी माध्यमों के कलाकारों ने भाग लिया है। मध्यप्रदेश,उत्तरप्रदेश,महाराष्ट्र,छत्तीसगढ,तेलगांना,आँध्रप्रदेश,बिहार, दिल्ली के कलाकारों की कला का प्रदर्शन किया गया। कुल 85 कलाकारों की कलाकृतियों को प्रदर्शनित किया गया।

