सारेगामा विनर सिंगर इशिता से जानिये, गायन में कैसे हों सफल?

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कला प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। ‘गायन में सच्ची कामयाबी पाने के लिये रियाज़ और पक्के सुरों का कोई विकल्प नहीं है। एक गायक के लिये यही सबसे अच्छा और सच्चा रास्ता है। परंतु आजकल गायक ऑटो करेक्ट जैसे टूल्स और रिकॉर्डिंग से जुड़ी कई दूसरी सुविधाओं से अपनी गायिकी की चमक को बढ़ा रहे हैं, मगर यह तरीका उनकी सफलता की राह में एक बड़ी रूकावट है, ऐसी सुविधाएं एक तरह से उन्हें अपाहिज बना रही हैं’। यह बात सारेगामा 2019 की विनर और इंडिया’स गॉट टैलेंट की फर्स्ट रनर अप सुश्री इशिता विश्वकर्मा ने कही। इशिता, इंदौर के अभिनव कला समाज में आयोजित स्टेट प्रेस क्लब, मध्यप्रदेश के ‘रूबरू’ कार्यक्रम में गायन के क्षेत्र में अपनी सफलता और संघर्ष की कहानी के बारे में चर्चा कर रही थीं। याद आई मुश्किल घड़ी की: संगीत रसिकों की चहेती इस प्रतिभाशाली गायिका ने कहा, ‘छोटे शहरों से निकलकर प्रतिभा के दम पर भी बॉलीवुड में टिका जा सकता है, मैं इस बात का उदाहरण हूं’। उन्होंने उन मुश्किल क्षणों को याद किया जब जीवन भर उन्हें बड़ी गायिका बनाने के लिए प्रयासरत रहे उनके पिता की तेरहवीं सम्पन्न हुई थी और उन्हें इंडियाज़ गॉट टैलेंट के आखरी ऑडिशन के लिए कॉल आ गया था। तब उन्होंने और उनकी माता तेजल जी ने यह विचार किया कि यदि आज इशिता के पिता श्री अंजनी कुमार जीवित होते तो वे क्या निर्णय लेते और फिर उन्होंने बिना समाज की परवाह किए ऑडिशन हेतु मुंबई प्रस्थान किया। इशिता ने कहा कि उनकी सफलता में 90% योगदान उनके माता-पिता के त्याग और तपस्या का है। रियलिटी शो से बॉलीवुड में एंट्री नहीं: इशिता ने बताया कि केवल रियलिटी शो में सफलता से ही बॉलीवुड में स्थान नहीं मिलता। शो में सफलता से सिर्फ एंट्री और कुछ संबंध मिलते हैं, बाकी मेहनत स्वयं ही करनी होती है। उन्होंने दो शोज़ में सफलता के बाद भी बरसों तक स्क्रैच गाने रिकॉर्ड किए। ऐसे ही एक गीत में उनकी गायिकी सुप्रसिद्ध गायक अरिजीत सिंह को पसंद आने से, उनकी तारीफ के आधार पर निर्माता ने उनकी आवाज़ की रिकॉर्डिंग ही रिलीज़ कर दी और इस तरह उन्हें पहला गाना मिला, वह भी अरिजीत सिंह के साथ ड्यूएट। इशिता ने कहा कि गायन के क्षेत्र में किसी की गायकी का हुनर देखा जाना चाहिए, पहनावा या बाकी बातें नहीं। वह इस बात का उदाहरण बनना चाहतीहै कि फिल्मी दुनिया में सफलता के लिए कोई समझौते करने पड़ते हैं या संस्कार त्यागने होते हैं। यदि प्रतिभा, रियाज़ और धैर्य है तो आपको अपनी शर्तों पर सफलता मिल जायेगी। विशाल मिश्रा के निर्देशन में गाने की तमन्ना: एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वह विशाल मिश्रा के संगीत निर्देशन में गाना गाना चाहती हैं। पुराने गानों को ही आज भी गाए जाने को लेकर उन्होंने कहा कि पुराने गानों में आत्मा निवास करती है इसलिए वह सदा जीवित रहेंगे, जबकि नए गानों में ह्यूमन पारफेकशन से ज्यादा मशीनी काम है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वह कई गायको और संगीतकारों से बहुत कुछ सीखती हैं, लेकिन लता मंगेशकरजी उनकी ऑल टाइम फेवरेट हैं। इशिता ने कुछ गीतों की सुमधुर प्रस्तुति ने रूबरू के दर्शकों को आह्लादित कर दिया। कार्यक्रम में सम्मान और सत्कार: कार्यक्रम से पूर्व स्टेट प्रेस क्लब के अध्यक्ष प्रवीण कुमार खारीवाल एवं संतोष अग्निहोत्री ने इशिता विश्वकर्मा का सम्मान किया। जबकि श्रीमती रचना जौहरी एवं श्रीमती मीना राणा शाह ने उन्हें स्मृति चिन्ह एवं स्टेट प्रेस क्लब के प्रकाशन भेंट किए। कार्यक्रम का संचालन पत्रकार और संस्कृतिकर्मी आलोक बाजपेयी ने किया। https://indorestudio.com/

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