Saturday, May 9, 2026
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सतीश कौशिक के निधन पर सिने और रंगमंच जगत में शोक की लहर

आनंद मिश्रा, इंदौर स्टुडियो। एक खिलखिलाता चेहरा, जिसे देखकर ‘पप्पू पेजर’ जैसे किरदार याद आ जाते थे। ऐसे बेहतरीन अभिनेता, निर्देशक, स्क्रिप्ट राइटर और एक ज़िंदादिल इंसान सतीश कौशिक के निधन नहीं रहे। यह ख़बर जैसे ही लोगों तक पहुँची, सभी स्तब्ध रह गये। उनके आकस्मिक निधन पर, फ़िल्म जगत से लेकर रंगमंच जगत में शोक की लहर है। एक दिन पहले ही जुहू में शबाना आज़मी के घर वे होली की पार्टी मनाने पहुँचे थे। उनके निधन पर अनुपम खेर और जावेद अख़्तर समेत कई कई प्रमुख सिने और नाट्य हस्तियों ने गहरा दु:ख जताया है।अनुपम खेर ने दी पहली ख़बर: टिव्टर पर उनके निधन की सबसे पहले जानकारी अभिनेता अनुपम खेर ने साझा की। उन्होंने लिखा- ‘मैं जानता हूं, मृत्यु ही इस दुनिया का अंतिम सच है, मगर यह बात मैं कभी अपने जिगरी दोस्त सतीश कौशिक के बारे में लिखूँगा, यह मैंने सपने में भी नहीं सोचा था। 45 साल की दोस्ती पर ऐसे अचानक पूर्णविराम!’बाद में यह जानकारी मिली की सतीश जी का निधन दिल का दौरा पड़ने से हो गया। उन्हें हार्ट अटैक उस वक्त आया, जब वे गुरूग्राम में अपने एक परिचित से मिलने के लिये जा रहे थे। कार से जाते वक्त उन्हें रास्ते में दिल का दौरा पड़ा। बाद में उन्हें गुरुग्राम के ही फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया। जावेद अख़्तर ने जताया शोक: सतीश कौशिक ने जावेद अख़्तर और शबाना के साथ एक दिन पहले उनके जुहू स्थित निवास पर होली पार्टी अटैंड की थी। इस दौरान भी वे बेहद स्वस्थ और खुश नज़र आ रहे थे। यहां पर उन्होंने हाल ही में विवाहित हुए अली फज़ल और रिचा चड्ढा के साथ एक सेल्फी तस्वीर भी खिंचवाई थी। जावेद अख़्तर ने ट्विटर पर उनके निधन पर लिखा है- ‘गर्मजोशी, प्यार और हँसी-ख़ुशी से भरपूर सतीश लगभग 40 साल से मेरे लिए एक भाई की तरह थे। वह मुझसे बारह साल छोटा 12 साल छोटे थे। ये सतीश जी, आपके जाने की बारी नहीं थी’।फिल्म और रंगमंच के दूत: सतीश कौशिक नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के पूर्व छात्र थे। उनके निधन पर एनएसडी के निदेशक प्रो.(डॉ) रमेश चंद्र गौड़ ने गहरा दु:ख जताया है। उन्होंने लिखा है, ‘हमारे पूर्व छात्र और प्रख्यात फिल्म अभिनेता, निर्देशक और निर्माता सतीश कौशिक के आकस्मिक निधन के बारे में सुनकर मैं स्तब्ध और दु:खी हूं। वह एक अविश्वसनीय व्यक्ति और फिल्म और रंगमंच के संस्कृति दूत थे। यह एक अपूरणीय क्षति है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय परिवार की ओर से मैं उनके परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों के प्रति अपनी संवेदना ज़ाहिर करता हूँ। दिव्य आत्मा को शांति मिले’।सभी से अपनेपन का नाता रहा: सतीश कौशिश एक ऐसे कलाकार भी रहे जिनसे हर छोटे,बड़े कलाकार का जुड़ाव रहा, सहज एक अपनेपन का नाता था। मैं भी सतीश जी से वर्षों से संपर्क में रहा। वे जब भी मुझसे मिले बड़ी गर्माहट और प्यार के साथ मिले। वे मुझे मिश्रा जी कहकर बुलाते थे। सच में, उनका जाना फ़िल्म और रंगमंच की दुनिया की एक बड़ी क्षति है। ऐसे कलाकार कम ही होते हैं, जो एक अच्छी शख़िस्यत के भी मालिक हों।

एक सादा दिल इंसान थे सतीश जी: कानपुर ‘अनुकृति थियेटर ग्रुप’ के प्रमुख डॉ.ओमेन्द्र कुमार ने कहा, वे बेहद सादा दिल इंसान थे। मैं उनसे फ़िल्म ‘मासूम’ की शूटिंग के समय से ही जुड़ गया था। फ़िल्म ‘मासूम’ में काम करने वाले तीन बाल कलाकारों में से एक कानपुर की बेटी थी। इस फ़िल्म की शूटिंग के दौरान में मेरा सतीश जी से मिलना हुआ था। तब वे शेखर कपूर के असिस्टेंट के रूप में फिल्मी दुनिया में क़दम रख चुके थे। बाद में उनसे दिल्ली और लखनऊ में मिलना होता रहा। पहली बार मिलने के बाद से ही, वे मुझे कभी भूले नहीं। हमेशा मुझे पंजाबी अंदाज़ में ‘ओमनेंदर’ कहकर सस्नेह याद करते रहे। मैंने बेहद चर्चित नाटक ‘सेल्समैन रामलाल’ का शो भी देखा था। एक बार अँधेरी वेस्ट में उनसे आधी रात के वक्त मुलाक़ात हुई थी। तब वे यशराज स्टूडियो के सामने अपने ऑफिस में ख़ासे व्यस्त थे। उनकी एक फ़िल्म अगले दिन रिलीज़ होना था। परंतु उस व्यस्तता में उन्होंने कहा, ‘कोई बात नहीं, हम साथ दस-पंद्रह मिनट बैठकर बात करेंगे। चाय पीयेंगे। ऐसा कैसे आपको जाने देंगे’। आज सुबह यशपाल जी के पोस्ट देखने के बाद से मैं गहरे सदमे में हूँ। सोच रहा हूँ इतने प्यारे, ज़िंदादिल इंसान जिसे स्टार होने का अहंकार कभी छू भी नहीं सका। ऐसे कलाकार कहाँ मिलेंगे। उनके निधन पर अनुकृति की तरफ से मैं विनम्र श्रद्धाजंलि व्यक्त करता हूँ।रंगमंच से शुरू किया था सफ़र: सतीश कौशिक का जन्म 13 अप्रैल 1956 को महेंद्रगढ़, हरियाणा में हुआ था। उन्होंने 1972 में किरोड़ी मल कॉलेज, दिल्ली से ग्रेजुएशन किया था। अपने कैरियर की शुरूआत सतीश ने रंगमंच से ही की थी। बाद में आप फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में अध्ययन के लिये पहुँचे। उन्होंने, रूप की रानी चोरों का राजा, हम आपके दिल में रहते हैं और तेरे नाम, प्रेम जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। उन्हें जाने भी दो यारो, हम किसी से कम नहीं, मिस्टर इंडिया, दीवाना मस्ताना, साजन चले ससुराल जैसी फिल्मों के लिये याद किया जाएगा। मिस्टर इंडिया और बधाई हो बधाई फ़िल्मों का उन्होंने ही निर्माण किया था। उन्होंने 35 से अधिक फ़िल्मों में काम किया। पप्पू पेजर और चौरसिया जैसे उनके कई किरदार दर्शक कभी भूल नहीं सकेंगे। इस बेहतरीन कलाकार को विनम्र श्रद्धांजलि। (लेखक आनंद मिश्रा, सिने अभिनेता और एक्टर ट्रेनर हैं। स्व.सतीश कौशिक से आप एक फ़िल्म कलाकार और साथी होने के नाते वर्षों तक संपर्क में रहे)। आगे पढ़िये –

सतीश कौशिक के निधन पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय ने दी श्रद्धाजंलि

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