Wednesday, April 15, 2026
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सतीश कौशिक के निधन पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय ने दी श्रद्धाजंलि

कला प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। सिने और रंगमंच के चर्चित अभिनेता सतीश कौशिश के निधन पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि व्यक्त की गई है। उनके निधन पर गहरा दु:ख जताया गया है। स्व.सतीश कौशिक राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय सोसाइटी के सदस्य भी रहे। उन्होंने 1978 राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से ही स्नातक की उपाधि के साथ ही अभिनय में विशेषज्ञता हासिल की थी। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (national school of drama) ने अपने प्रेस नोट में यह जानकारी दी है। रानावि के अध्यक्ष परेश रावल और निदेशक प्रो.गौड़ ने शोक संदेश जारी किये हैं।

फ़िल्म एवं रंगमंच के लिए अपूर्णीय क्षति: राष्ट्रीय नाट्य विद्याय सोसाइटी के अध्यक्ष परेश रावल ने अपने शोक संदेश में कहा, सतीश कौशिक का असमय निधन होना फ़िल्म एवं रंगमंच के लिए अपूर्णीय क्षति है। श्री कौशिक भारतीय सिनेमा जगत के अद्भुत कलाकार थे। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से स्नातक होने के बाद फिल्म से जुड़ गए। उन्होंने कई फ़िल्मों में काम किया। ‘मिस्टर इण्डिया’ में चरित्र अभिनेता के रूप में उन्हें अत्यंत ख्याति मिली। फिल्म ‘राम लखन’ (1990) और ‘साजन चले ससुराल’ (1997) के लिए हास्य भूमिका श्रेणी में अभिनेता के रूप में दो बार फिल्मफेयर पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। अभिनय के अलावा उन्होंने ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ (1993) से कई फीचर फिल्मों का निर्देशन भी किया। ‘तेरे नाम’ 2003 में सलमान खान अभिनीत फिल्म एक बड़ी हिट थी और फिल्म के निर्देशक के रूप में उन्हें आलोचनात्मक प्रशंसा मिली। वे लगातार रंगमंच भी करते रहे। उनका जाना फ़िल्म एवं रंगमंच के लिए बड़ा नुक्सान है।
सिनेमा और रंगमंच के संस्कृति दूत:
एनएसडी के निदेशक प्रो.(डॉ) रमेश चंद्र गौड़ ने भी रानावि के पूर्व छात्र सतीश कौशिक के निधन पर गहरा दु:ख जताया है। उन्होंने लिखा है, ‘हमारे पूर्व छात्र और प्रख्यात फिल्म अभिनेता, निर्देशक और निर्माता सतीश कौशिक के आकस्मिक निधन के बारे में सुनकर मैं स्तब्ध और दु:खी हूं। वह एक अविश्वसनीय व्यक्ति और फिल्म और रंगमंच के संस्कृति दूत थे। यह एक अपूरणीय क्षति है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय परिवार की ओर से मैं उनके परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों के प्रति अपनी संवेदना ज़ाहिर करता हूँ। दिव्य आत्मा को शांति मिले’।
नाट्य विद्यालय से 1978 में बने स्नातक: रानावि के अनुसार, ‘सतीश कौशिक ने 1975 में, दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से रंगकर्म की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में दाखिला लिया। वे 1978 में अभिनय में विशेषज्ञता के साथ राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से स्नातक हुए। 1978 से 1979 तक रानावि रंगमंडल के साथ ‘एपरेंटिस फेलो’ के रूप में जुड़े रहे। एनएसडी में अपने समय के दौरान उन्होंने ‘मेन विदाउट शैडोज़’, ‘नौटंकी लैला मजनूं’, ‘बिच्छू’, ‘दांतो’ज डेथ’, ‘भगवद्ज्जुकम्’ और ‘मुख्यमंत्री’ आदि नाटकों में अभिनय किया।

‘मासूम’ में शेखर कपूर के सहायक बने: बाद में वे मुंबई चले गए और शेखर कपूर के साथ 1983 की फिल्म ‘मासूम’ में उनके मुख्य सहायक निर्देशक के रूप में शामिल हो गए। वे फिल्मों में एक अभिनेता, निर्देशक, लेखक और निर्माता के रूप में काम करते रहे। परंतु रंगमंच के लिए उनका प्यार कभी खत्म नहीं हुआ। उन्होंने थिएटर में भी अभिनय करना जारी रखा। नाटक ‘सेल्समैन रामलाल’ में शीर्षक भूमिका में उनके प्रदर्शन की सभी ने सराहना की। उन्होंने निरंतर इसमें अभिनय करना जारी रखा। वे 2001 से 2005 तक नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा सोसाइटी के सदस्य भी रहे। आगे पढ़िये-

सतीश कौशिक के निधन पर सिने और रंगमंच जगत में शोक की लहर


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