डॉ.जावेद अहमद शाह, इंदौर स्टुडियो।
इंदौर के अभिनव कला समाज में 14 नवंबर,रविवार की रात सेक्सोफ़ोन वादन का यादगार कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम में पांच कलाकारों क्रमश: मनोज बैन,योगेश कुलपारे,सदानंद इंग्ले,मनजीत सिंह और पवन शाह ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। यह कार्यक्रम अनहद नाद,संगीत संस्था सारेगम, लिम्बोदिया इवेंट्स और सेक्सोफोन म्युज़िक लवर सुसाइटी ने संयुक्त रूप से आयोजित किया था। एक विशेष बात यह है कि कार्यक्रम सांघी मुक्ताकाश के उस हॉल में हुआ, जो कपड़ों की सेल के लिये अपनी पहचान बना चुका था। अब अभिनव कला समाज की नई कार्यकारिणी ने इंदौर में ऑडिटोरियम की कमी के मद्देनज़र शहर के मध्य इसे एक व्यवस्थित कार्यक्रम हॉल में बदलने की ज़िम्मेदारी पूरी की है।
साज़ पर कमाल हुनर का मुज़ाहरा:
कार्यक्रम में इन पांचों ही कलाकारों ने सदाबहार फ़िल्मी गीतों को अपने साज़ पर आवाज़ दी। इस शिद्दत और हुनर से बजाया कि पुराने गीतों की आवाज़ भी दिलो दिमाग़ में प्रतिध्वनित हो उठी। कार्यक्रम में मनोज बैन ने अपने वादन में इस साज़ पर बेहतरीन कंट्रोल का मुज़ाहरा किया। उनका दो गानों में साथ इस साज़ के माहिर योगेश कुलपारे ने दिया। योगेश को यह हुनर अपने स्व.पिता राजू कुलपारे से मिला है। सभी जानते हैं कि इस साज़ का पर्याय बन गए संगीत जगत में राजू दादा के सम्मानित नाम से पुकारे जाते हैं। उन्होंने इंदौर में बहुत से कलाकारों को यह साज़ सिखाया और इस कला को आगे बढ़ाने का काम किया। एक दौर था जब वे इंदौर समेत मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में इस साज़ का ख्यात नाम रहे। उन्होंने कई ऑर्केस्ट्रा और रिकॉर्डिंग में सेक्सोफोन बजाया था। उनके निधन के बाद इंदौर में उनके लिये श्रद्धाजंलि आयोजन भी पूर्व में हुआ था। आज योगेश पिता की याद और विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
साज़ पर सदाबहार गीतों के राग:
कार्यक्रम में जालंधर के मनजीत सिंह ने भी सदाबहार गीतों की याद दिलाई,बेहतरीन धुनों का बाकमाल प्रदर्शन किया।उनके दिल के आपरेशन के बावजूद वो बेहद सुरीले और मुत्मइन अंदाज़ में बजाते हैं। इसी तरह पवन शाह (जबलपुर जो मनोज बैन के शिष्य हैं) को भी श्रोताओं ने खूब पसंद किया। दवा व्यवसायी और पचास की उम्र से इस बाजे की मुहब्बत में गिरफ्तार है जिस पर उनके बच्चों को भी नाज़ है और ज़िद करके उनके हाथ पर सैक्सोफोन का छोटा सा टैटू इस गरज़ से गुदवा दिया है कि आप इस को बजाना नहीं छोड़ेंगे। मुस्कान सजाये ,विनम्र सदानंद इंग्ले बहुत ही सधी प्रस्तुतियां दी जिसमें उनकी रियाज़ और दम का हुनर साफ़ नज़र आता है। एक्सटेम्पोर गेस्ट के तौर बरसों से फिल्मों में गिटार पर अपना हुनर दिखने वाले दिलीप नायक भी टैनोर टाइप सैक्सोफोन के साथ मंच पर आये उन्होंने फरमाइश पर वेस्टर्न जाज़ सुनाया उनके साथ कई देशों में अपनी प्रस्तुति दे चुके युवा रोहन सिंघल अपनी हार्मोनिका संग मौजूद थे जिनके वादन गायन और अंदाज़ ने उन्हें तालियों के बीच सुना।
शहर में ऑडिटोरियम भी बनें :
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष जीतू जिराती और भाजयुमो के प्रदेश उपाध्यक्ष गंगा पांडे मौजूद थे। उनके साथ सभी अतिथियों और कलाकारों का स्वागत आयोजकों द्वारा किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष जीतू जिराती और भाजयुमो के प्रदेश उपाध्यक्ष गंगा पांडे मौजूद थे। उनके साथ सभी अतिथियों और कलाकारों का स्वागत आयोजकों द्वारा किया गया। एक विशेष बात यह है कि कार्यक्रम सांघी मुक्ताकाश के उस हॉल में हुआ, जो कपड़ों की सेल के लिये अपनी पहचान बना चुका था। अब अभिनव कला समाज की नई कार्यकारिणी ने इंदौर में ऑडिटोरियम की कमी के मद्देनज़र शहर के बीचो-बीच इसे एक व्यवस्थित कार्यक्रम हॉल में बदलने की ज़िम्मेदारी पूरी की है। सैक्सोफोन सोसायटी के अध्यक्ष और कार्यक्रम का संचालन कर रहे संजय वर्मा ने इस मौके का लाभ उठाते हुए ऐसी ही एक मंशा अतिथियों के समक्ष ज़ाहिर भी की। उन्होंने कहा, सरकार तन के रोगियों के लिए अस्पताल बनाती है लेकिन मन के रोगियों के लिए ऑडिटोरियम क्यों नहीं बनाती ? इंदौर की सड़कों पर जहां बेतहाशा ट्रैफिक में लोग एक-दूसरे को कुचलते,टकराते,घूरने और लड़ने को तैयार दिखते हैं। इन ऑडिटोरियम में लोग एक-दूसरे को जगह और सम्मान देते और सुविधा बनाते नज़र आते हैं। यकीन जानिये शो जब ज़्यादा होंगें तो सरकार को थानों,कचहरियों और अस्पतालों की भी ज़रूरत भी कम ही पड़ेगी।
नज़र आये जाने-पहचाने चेहरे:
कार्यक्रम में इस साज़ से दिली प्यार करने वाले कई जाने-पहचाने चेहरे और कलाकार नज़र आये। सभी ने कार्यक्रम की सराहना की। कार्यक्रम में ग्वालियर घराने के प्रसिद्ध गायक और शिक्षक सुनील मसूरकर भी मौजूद थे। अंत में एक और ख़ास बात। इस तरह के कार्यक्रमों में ध्वनि व्यवस्था का प्रबंधन एक बड़ी ज़रूरत होती है। ताकि प्रस्तुति और ऑर्केस्ट्रा बेहतर साउंड के साथ प्रेक्षकों के कानों तक पहुँच सके। आगे ऐसे आयोजनों में तकनीकी दृष्टि इस पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत होगी। यह बात इस कार्यक्रम को सुनते हुए महसूस हुई।
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