इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। इंदौर के मशहूर सेक्सोफोन वादक स्व.राजू कुलपारे एक ऐसा नाम रहे हैं जिन्होंने मंच पर हज़ारों प्रोग्राम दिये, दर्जनों रिकॉर्डिंग्स में अपने साज़ का लोहा मनवाया और बहुत से नये कलाकारों को यह साज़ सिखाया। हाल ही में इंदौर के रविंद्र नाट्य गृह में ‘सेक्सोफ़ोन फेस्ट 21’ मनाकर उनकी याद को ताज़ा किया गया। संगीत के क्षेत्र में उनके अविस्मरणीय योगदान के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त की गई। उल्लेखनीय है कि राजू कुलपारे न सिर्फ एक बेहतरीन कलाकार थे, बल्कि वे सबके चहेते सितारे भी थे। स्व.राजू के बेटों और शिष्यों ने मिलकर उनकी जयंति पर यह यादगार आयोजन किया।
*इंदौर को सेक्सोफ़ोन कैपिटल बनाने का सपना* सोसाइटी ऑफ सेक्सोफोन लवर्स के संजय वर्मा कहते हैं, ‘हम इस फेस्टिवल को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल और गोवा में होने वाले कार्निवाल की तरह बनाना चाहते हैं। हमें यक़ीन है इंदौर एक दिन देश की सेक्सोफोन केपिटल बन सकता है।‘ कार्यक्रम की शुरूआत स्व. राजू कुलपारे के बेटे और शिष्य योगेश कुलपारे ने पिता के लिये हैप्पी बर्थडे धुन बजाकर की। फ़िल्म ‘शान’ के थीम सांग को लीड करते मनोज ने सुनने वालों को इस बात का अहसास कराया कि वे भी पिता के कदमों पर इस साज़ को नई बुलंदी देने को तैयार हैं। यहां आपको बता दें, सोशल मीडिया पर वे ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’की बजाई धुन से ख़ासे लोकप्रिय हैं, श्याम बैंड के नाम से लोग उन्हें पहचानते हैं। उन्होंने बेदर्दी बालमा और अजी ! रूठकर अब कहां जाइयेगा भी पेश किया। *मनोज बैन ने बनाई अंतरराष्ट्रीय पहचान* राजू कुलपारे के शिष्य यूं तो देश भर में फैले हैं, परंतु उनके जबलपुर के शिष्य मनोज बैन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं। इस बाजे के पर्याय बन चुके बैन मनोज सैक्सोफोन कहलाना लिखवाना पसंद करते हैं। वे सेक्सोफोन फेस्ट में कुल आठ सैक्सोफोनिस्ट के साथ स्टेज पर परफॉर्म करते नज़र आये। इस फेस्ट में पवन शाह (जबलपुर), लिलेश कुमार (दुर्ग), प्रमोद (दुर्ग),असलम ख़ान (देवास),सदानंद इंग्ले (इंदौर),डॉ अक्षत पांडे (इंदौर) ने हिस्सा लिया। सदानंद इंगले की बजाई धुन ‘ तेरे बिना ज़िंदगी से कोई शिकवा नहीं’ पर दर्शक भीतर तक भीग गए । वहीं डॉ अक्षत ने युवाओं को सारा लंदन ठुमकता पर नाचने पर मजबूर कर दिया। उनकी भाव-भंगिमा और बजाने के अंदाज़ से बड़े भी आनंद से सराबोर हो गए। अतिथि के तौर इस संगीत आयोजन में बीजेपी नेता जवाहर मंगवानी ने शिरकत की। संगीत प्रेमी जवाहर जी काफी देर तक फेस्ट में मौजूद रहे। संगीत का आनंद लिया। फेस्ट का संचालन डॉ. जावेद ख़ान ने किया।

