कला प्रतिनिधि,इंदौर स्टुडियो। आज़ादी के अमृत महोत्सव पर इंदौर में ‘तलाश-ए-जौहर’ नाम की व्याख्यान एवं कार्यशाला बीते दिनों आयोजित की गई। नये रचनाकारों की खोज के मकसद से यह सराहनीय कोशिश मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी ने की। संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में जाने-पहचाने शायर रशीद शादानी ने युवा रचनाकारों का मार्गदर्शन किया। अपने संबोंधन में उन्होंने शायरी की बारीकियों पर चर्चा की।
नये रचनाकारों को मंच देने की कोशिश: कार्यक्रम में अकादमी की निदेशक डॉ नुसरत मेहदी ने कहा कि उर्दू अकादमी ने प्रदेश के नये रचनाकारों को मंच देने के लिए “तलाश ए जौहर” कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इस बार उर्दू अकादमी ने प्रयास किया है कि प्रदेश के सभी शहरों, क़स्बों एवं गाँवों से रचनाकारों की खोज की जाये। इस महत्वपूर्ण काम के लिये हर एक ज़िले में समन्वयक बनाए गए हैं। इसके तहत चयनित रचनाकारों को निमंत्रित कर फिलबदी शायरी मुक़ाबला (तत्काल लेखन) आयोजित किया जा रहा है। डॉ. नुसरत मेहदी के संबोधन के बाद फिलबदीह मुकाबले के निर्णायक मंडल अज़ीज़ अंसारी और हनीफ़ दानिश द्वारा दो तरही मिसरे दिए, जो इस प्रकार थे। 1.शहरों से तो कहीं बेहतर जंगल के नज़ारे हैं। 2.या इलाही ये माजरा क्या है।
ताज मोहम्मद को मिला पहला पुरस्कार: उपरोक्त मिसरों पर नए रचनाकारों द्वारा कही गई ग़ज़लों पर निर्णायक मंडल के संयुक्त निर्णय से बुरहानपुर के ताज मोहम्मद ताज को प्रथम, उज्जैन के जावेद बेग को द्वित्तीय एवं राजपुर के कादिर हनफ़ी को तृत्तीय पुरूस्कार से सम्मानित किया गया। वहीं खंडवा के अकबर ताज को विशेष पुरूस्कार से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर नए शायरों के मार्गदर्शन हेतु वरिष्ठ शायरों द्वारा शायरी की प्रस्तुति भी दी गई। वरिष्ठ शायरों में रशीद शादानी, अन्वर सादिक़ी, नासिर इंदौरी एवं युसुफ़ मंसूरी के नाम शामिल हैं। इस सत्र का संचालन फ़रियाद बहादुर द्वारा किया गया। आयोजन के अंत में अकादमी की निदेशक डॉ नुसरत मेहदी ने तमाम श्रोताओं एवं प्रतिभागियों का शुक्रिया अदा किया। कार्यक्रम का संचालन मुमताज़ ख़ान और रिज़वान उद्दीन फारूकी के द्वारा किया गया। जिन शो’अरा ने प्रथम, द्वित्तीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया उनके अशआर हैं।
यूँ तो हर शय को तूने जाना है
अपने बारे में जानता क्या है
– ताज मोहम्मद ताज
ज़र्रे हैं अभी लेकिन आएगी वो साअत भी
अफ़लाक पे चमकेंगे हम ऐसे सितारे हैं
-मिर्ज़ा जावेद बेग
अंजाम से बे परवाह तदबीर किए जाना
होना है वही जो भी क़िस्मत के इशारे हैं
– कादिर हनफ़ी

