राज बेन्द्रे, इंदौर स्टूडियो। ‘अगर आप सच्चे अर्थों में शास्त्रीय संगीत की शिक्षा लेना चाहते हैं तो यू ट्यूब घराने को छोड़ दें और गुरू से सीखना प्रारंभ करें। विख्यात गायिका आरती अंकलीकर टिकेकर ने यह बात राग अमीर की व्याख्यानमाला में कही’। वे ‘राग अमीर’ आयोजन के तहत रागदारी संगीत व्याख्यान माला को संबोंधित कर रही थी। इंदौर के देवलालीकर कला वीथिका में आयोजित इस व्याख्यान माला में पुणे के हारमोनियम वादक चैतन्य कुटे ने भी संगीत के घरानों को लेकर महत्वपूर्ण भाषण दिया। आपको बता दें, राग अमीर, म.प्र शासन संस्कृति विभाग,उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी व म.प्र संस्कृति परिषद भोपाल का यह वार्षिक आयोजन है। तीन दिवसीय यह आयोजन हाल ही में इंदौर में संपन्न हुआ।
गुरू के पास जाकर उन्हें अपना गाना सुनायें: गायिका आरती अंकलीकर टिकेकर ने रियाज एवं प्रस्तुति विषय पर अपना व्याख्यान दिया। आपने गुरु किशोरी ताई अमोनकर को याद किया। साथ ही बताया कि, किशोरी ताई कहती थीं कि तानपुरा और स्वरमण्डल बहुत अच्छे से मिलाओ और हम सभी शिष्य यह कोशिश करते थे कि बेहतरीन तरीके से स्वरमंडल मिलायें। आपने कितनी रियाज़ करना चाहिए इस बारे में बहुत ही अच्छी बातें बताई कि जिन्हें सही मायने में संगीत में अपना करियर बनाना है, वे पहले गुरु के पास जाकर उन्हें गाना सुनायें और अगर गुरु कहते है कि हां आप गा सकते है। तब गुरु के बताये अनुसार ही रियाज़ करें।
गुरू के बिना अपने मन से रियाज़ ना करें: आपने कहा कि अपने मन से रियाज़ ना करें। अगर सही मायने मे संगीत सीखना है तब एक तप लगभग 10-12 वर्षों तक गुरु के पास रहकर तालीम लेना होगी और जब तक गुरु ना कहे तब तक मंचीय प्रस्तुति ना दें। आपको गुरु से ही यह पता चलेगा कि रियाज कितनी और किस ओर करना है और गुरु केवल संगीत का ज्ञान नहीं देता है बल्कि वह मानसिक रूप से भी आपको तैयार करता है। इस संपूर्ण प्रक्रिया में अनुशासन बेहद जरुरी है। रोज़ाना रियाज ज़रुर करें, भले ही आधा घंटा करें, पर रियाज़ रोज़ाना करें।
यू ट्यूब से संगीत को सीखना छोड़ दें: आरती जी ने कहा कि यूट्यूब से सीखना बंद करें। अगर आप संगीत की आरंभिक शिक्षा ले रहे हैं, तब यूट्यूब से ना सीखें क्योंकि जब तक आप 10 से 15 वर्षों तक एक घराने की तालीम ना लें, तब तक आगे की बात करना बेमानी है। आपने रियाज करने के लिए भी युवाओं से कहा कि जब तक रियाज ना कर, तब तक मोबाइल को हाथ मत लगाओ। जब तक शरीर,बुद्धि,मन और आत्मा तक संगीत नहीं पहुचता तब तक आप संगीत में डूब नहीं सकते। यह कहा भी गया है कि जब तक दस हज़ार घंटे किसी भी हुनर की रियाज़ नहीं की जाती तब तक आप उसमें माहिर नहीं हो सकते। युवा कलाकारों ने आरती जी से प्रश्न भी पूछे। कार्यक्रम में ही आरती जी ने राग भीमपलासी पर आधारित तराने को वहां मौजूद युवा कलाकारों को सिखाया भी। कार्यक्रम का संचालन विनय उपाध्याय ने किया।
अब व्यक्ति विशेष गायकी का दौर: रागदारी संगीत व्याख्यानमाला के अंतर्गत पुणे के हारमोनियम वादक चैतन्य कुटे ने संगीत में घरानों की परंपरा विषय पर अपने विचार रखे। एमजी रोड स्थित देवलालीकर कला वीथिका में आपने सारगर्भित व्याख्यान में कहा कि हम वर्तमान में घरानेदार गायकी से व्यक्ति विशेष की गायकी पर आ गए हैं। आपने व्याख्यान के दौरान 1905 की अब्दुल करीम खाँ साहब के राग मालकौंस की रिकॉर्डिंग भी सुनाई और बाद में 1936 की रिकॉर्डिंग भी सुनाई। अब्दुल करीम खाँ साहब किराना घराने के थे और किस प्रकार से उनकी गायकी मे 1905 में तेज और जोशीली तानों का समावेश था, परंतु 1936 आते-आते गायन में गंभीरता देखने को मिली। आपने उस्ताद रजब अली खाँ साहब की रिकॉर्डिंग भी सुनाई। श्री कुटे ने कहा कि घरानों में आदान-प्रदान होता रहा है। किस प्रकार से भारतरत्न पंडित भीमसेन जोशी जी किराना घराने का प्रतिनिधित्व करते थे परंतु उन्होंने कई अन्य घरानों से भी बातें ली। केसरबाई केलकर और उस्ताद अमीर खाँ साहब के गाने का असर भी उन पर पडा था। इसी प्रकार पं.जितेंद्र अभिषेकी जी आगरा घराने के थे परंतु उनके गायन मे कई अन्य घरानों की बाते भी सामने आती थी। अपने अनुसार गायन में नवाचार होता आ रहा है और कई कलाकार यह करते आए है और यह होना भी चाहिए। आपने विदुषी किशोरी ताई का मालकौंस भी सुनाया।
प्राइवेट सेक्टर की जगह अब पब्लिक सेक्टर के घराने: आपने कहा कि घराने पहले प्राइवेट सेक्टर में थे और अब पब्लिक सेक्टर में आ गए हैं। किशोरी ताई ने लगभग दो ढाई वर्ष तक गाना नहीं गाया क्योंकि गला खराब हो गया था। इसके बाद उन्होंने जो गाना गाया वह अलग ही था। वे रागों के व्याकरण के बाहर जाकर भी गाने लगी और वह बहुत सुंदर भी लगने लगा। इतना ही नहीं पंजाब घराने का असर भी नज़र आया क्योंकि उन्होंने फिल्म संगीतकार हुस्नलाल भगतराम से भी कुछ समय तक गायन सीखा। श्री कुटे ने मल्लिकार्जुन मंसूर और निवृत्ति बुआ सरनाईक के गाए रागों की रिकॉर्डिंग भी सुनाई। आपने उस्ताद अमीर खाँ और इंदौर घराने और पं. जसराज के मेवाती घराने के बारे में भी जानकारी दी। प्रश्न उत्तर सत्र का भी आयोजन किया गया। संचालन विनय उपाध्याय ने किया। इस अवसर पर उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक जयंत माधव भिसे व अकादमी के उप निदेशक राहुल रस्तोगी और अमीर खाँ परिवार के शाहबाज खान उपस्थित थे।
शास्त्रीय संगीत गुरू से सीखें, यू ट्यूब घराने को छोड दें!
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