इंदौर स्टूडियो डॉट कॉम। अज़ीम शायर कैफ़ी आज़मी के जन्मशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में मप्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन भोपाल और सम्मेलन की सागर इकाई का संयुक्त आयोजन ‘यादे कैफ़ी समारोह’ सागर में सम्पन्न हुआ। आयोजन में भोपाल के शायर डॉ इकबाल मसूद तथा दिल्ली से आए उर्दू-हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार और आलोचक डॉ जानकीप्रसाद शर्मा ने कैफ़ी आज़मी पर महत्त्वपूर्ण वक्तव्य दिया।
कैफ़ी जनपक्षधरता के शायर : वक्ताओं ने कहा कि कैफ़ी आज़मी प्रगतिशील आंदोलन की जनपक्षधरता के शायर थे। वे प्रतिरोध में संघर्ष और विद्रोह के क्रांतिकारी प्रतीक हैं। आम आदमी के हक के लिए न केवल वह आजीवन लिखते रहे वरन एक सोशल एक्टिविस्ट की तरह सड़कों पर उतरकर जन आन्दोलन का ज़रूरी काम भी करते रहे। उनके लेखन की बानगी के लिए उनकी इस नज़्म का यह अंश पर्याप्त है-
” आज की रात बड़ी गर्म हवा चलती है,
आज की रात न फुटपाथ पर नींद आयेगी।
सब उठें, मैं भी उठूँ, तुम भी उठो, तुम भी उठो,
एक खिड़की इसी दीवार में खुल जायेगी॥”

रचना पाठ भी हुआ : इस अवसर पर सुश्री अनुपमा रावत, अभिषेक वर्मा, शिवकुमार अर्चन, डॉ वर्षा सिंह, अशोक मिज़ाज ‘बद्र’ , डॉ नवीन कानूनगो, केशव तिवारी ‘केशु’ , मानव बजाज तथा दौलतराम प्रजापति ने रचना पाठ किया। यहाँ विनय प्रकाश जैन ‘नीरव’ के नवगीत संग्रह ‘यात्रा कितनी कठिन है’ का विमोचन भी हुआ। इस अवसर पर मप्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष पलाश सुरजन, महामंत्री मणि मोहन मेहता, युवा कवि सुरेन्द्र रघुवंशी (अशोकनगर) , रामस्वरूप दीक्षित (टीकमगढ़) , रमेश तिवारी (दमोह) , शोभाराम विश्वकर्मा (विदिशा) तथा सागर से डॉ. शरद सिंह, उमाकांत मिश्रा, डॉ. सुरेश आचार्य, आशीष ज्योतिषी, डॉ चंचला दुबे, पुनीत दुबे सहित प्रतिष्ठित सुधिजन उपस्थित थे।
कार्यक्रम के पहले सत्र का संचालन मणि मोहन मेहता तथा रचनापाठ सत्र का संचालन युवा कवि भोपाल के अनुराग तिवारी ने किया।

