इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। बलराज साहनी का जन्म 1 मई 1913 को हुआ था। उनके बचपन का नाम युधिक्षित साहनी के पिता थे। बलराज सिंह फिल्मों और रंगमंच के एक सशक्त अभिनेता रहे। धरती के लाल,दो बीघा ज़मीन,काबुलीवाला और गरम हवा उनके अभिनय से सजी बड़ी कामयाब फिल्में रहीं। वे पाकिस्तान के हिस्से वाले पंजाब के भेरा नाम के स्थान के रहने वाले थे। पंजाब विश्वविद्यालय और कवि रवींद्रनाथ टैगोर के शांति निकेतन में रहे साहनी विश्वयुद्ध के दौरान लंदन में बीबीसी में रहे। स्वदेश लौटे और कम्युनिस्ट विचारधारा से प्रभावित हुए। वामपंथियों के सांस्कृतिक मंच जन नाट्य संघ (इप्टा) के सक्त्रिय सदस्य बने और यहीं से वे फिल्मों में आए। यह बात तब की है, जब देश स्वाधीन हो चुका था और राजनेताओं का एक बड़ा वर्ग कम्युनिस्टों को जन आंदोलन में समर्थन न देने के कारण देशद्रोही माना जा रहा था। तभी देश में कम्युनिस्टों की धर-पकड़ शुरू हुई। इस धर-पकड़ के शिकार बलराज साहनी भी हुए। उन पर कम्युनिस्ट होने का, वामपंथी सांस्कृतिक आन्दोलन को समर्थन देने और उसे आम लोगों तक ले जाने का आरोप लगा। साहनी साहब को गिरफ्तार कर लिया गया।
उन दिनों निर्माता-निर्देशक के.आसिफ, जो बाद में फिल्म मुगल-ए-आजम के कारण खूब चर्चित हुए, हलचल नाम से एक सामाजिक फिल्म बना रहे थे। इसकी कहानी उनके पास गीतकार के रूप में चर्चा पाने वाले हसरत जयपुरी लाए थे और उन्होंने कहानी पढ़ने के बाद तय किया कि वे ही इसका निर्माण करेंगे। इस तरह वे इस फिल्म के निर्माता थे। फिल्म को निर्देशन का जिम्मा उन्होंने खुद न लेकर एस के ओझा को सौंपा।
‘हलचल’ के मुख्य कलाकार थे दिलीप कुमार और नरगिस। अन्य कलाकारों में सितारा देवी, के एन सिंह, जीवन, कुक्कू और याकूब के नाम थे। फिल्म में बलराज साहनी भी अहम किरदार निभा रहे थे। वे इसमें जेलर बने थे। जब बलराज साहनी मूवमेंट के कारण गिरफ्तार हो गए, तब के आसिफ के सामने परेशानी पैदा हो गई, क्योंकि उस समय फिल्म की शूटिंग चल रही थी। फिल्म की कई रील शूट हो चुकीं थी। अगर शूटिंग कैंसल होती, तो निर्माता को काफी परेशानी होती। पैसे तो लगते ही, इन सबसे अलग दिलीप कुमार, नरगिस और सितारा देवी जैसे कलाकारों की नए सिरे से तारीखें मिलना मुश्किल हो जाता। मजबूर होकर के.आसिफ ने अपील की। उन्होंने अपनी कठिनाई और होने वाली आर्थिक हानि का हवाला दिया। सरकार से आग्रह किया कि जिस दिन हलचल की शूटिंग हो, उस दिन बलराज साहनी को शूटिंग के लिए आने की अनुमति दी जाए या फिर उन्हें रिहा किया जाए। काफी कहने-सुनने और मान-मनौवल के बाद सरकार ने रिहाई की बात तो नहीं मानी, लेकिन हां, उन्हें फिल्म के सेट पर शूटिंग के लिए जेल से स्टूडियो आने-जाने की अनुमति जरूर दे दी। फिल्म की शूटिंग शुरू हुई। बलराज साहनी आर्थर रोड जेल से वैन में बैठकर पुलिस के पहरे में स्टूडियो जाते, सिपाहियों की उपस्थिति में शूटिंग करते और शाम को जेल वापस आ जाते। वे अपने संवाद और स्कि्त्रप्ट साथ लाते और जेल में देर तक रिहर्सल करते। फिर अगले दिन जाते और शूटिंग करते। हलचल की ज्यादातर शूटिंग बलराज साहनी ने ऐसे ही जेल से आते-जाते पूरी की।

