Wednesday, May 13, 2026
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सीधी में नाटक ‘मथानी लुहार’ का मंचन, कार्यशाला के कलाकारों ने दी प्रभावी प्रस्तुति

कला प्रतिनिधि,इंदौर स्टुडियो। सीधी में चल रही नाट्य कार्यशाला में नीरज कुंदेर द्वारा निर्देशित नाटक ‘मथानी लुहार’ का मंचन हुआ। स्थानीय बैजनाथ सभागार में यह प्रशिक्षणार्थियों की यह प्रभावी प्रस्तुति रही। गौरतलब है कि 75 दिवसीय इस आवासीय कार्यशाला में यह चरण ‘स’ की प्रस्तुति रही।1857 की क्रांति का महत्वपूर्ण नाम, मथानी लुहार: 1857 में विन्ध्य के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ठाकुर रणमत सिंह,रणजीत रॉय दीक्षित, धीर सिंह और श्यामशाह के बाद मथानी लुहार एक महत्वपूर्ण नाम है। यद्दपि इस क्रांतिकारी के योगदान पर अभी तक अपेक्षित काम नहीं हो सका है। विन्ध्य के वरिष्ठ पत्रकार जयराम शुक्ला ने उन पर एक आलेख लिखा था, जिसे निर्देशक नीरज ने पढ़ा और फिर रोशनी प्रसाद मिश्र से इस क्रांतिकारी के अवदान को लेकर चर्चा की। इसके बाद दोनों ने आलेख पर नाटक के निर्माण की योजना बनाई। इस तरह यह नाटक मंच तक पहुँचा। कार्यक्रम की शुरूआत जयराम शुक्ला एवं इंजी.आर.बी.सिंह ने दीपप्रज्ज्वलित कर किया। तदुपरान्त नाटक का मंचन शुरू हुआ।संतुलित अभिनय, बेहतर मंच प्रबंधन: नाटक में संगीत और नृत्य काफी प्रभावी दिखा, इन सबके बीच अभिनेताओं ने अपने संतुलित अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया। नाटक के अंतिम दृश्य में मथानी की मौत ने दर्शकों को झकझोरकर रख दिया। नाटक में क्रमश: अमन रावत,मनीष पटेल,मनोज कुमार, प्रतिष्ठा सबल,केतकी मुस्ले, अमित कुशवाहा, नायूम,धनंज्जय कुशवाहा, प्रभुराज यादव,नीरज कुम्भारे ने जीवंत अभिनय किया। जबकि प्रकाश परिकल्पना रजनीश जायसवाल, रूपसज्जा प्रतिष्ठा सबल एवं केतकी,मंच सज्जा मनोज,नयूम,मनीष,अमन,वस्त्रविन्यास एवं संगीत संयोजन प्रजीत साकेत का रहा। अभिनय प्रशिक्षण शिवनारायण कुंदेर द्वारा किया गया। आलेख एवं संगीत परिकल्पना रोशनी प्रसाद मिश्र का था, संगीत परिकल्पना एवं निर्देशन नीरज कुंदेर की थी।सरकारी गजेटियर सीमित रहा नाम : प्रस्तुति के उपरान्त रीवा से आये वरिष्ठ पत्रकार जयराम शुक्ला ने मथानी लुहार की क्रान्ति यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1857 की क्रांति में विन्ध्य के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में ठाकुर रणमत सिंह, रणजीत रॉय दीक्षित, धीर सिंह और श्यामशाह के बाद अगर किसी का नाम आता है वह हैं मथानी लुहार,जिनके बारे में हम कृतघ्नों ने जानने की कोशिश तक नहीं की वह सिर्फ़ और सिर्फ़ सरकारी गजेटियर तक ही सीमित रह गए। इसके बाद संस्था के संरक्षक इंजी. आर.बी.सिंह ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इंद्रवती नाट्य समिति हमेशा ऐसे महापुरुषों पर ही केंद्रित नाटकों का मंचन करती रही है आगे भी कोशिश रहेगी कि ऐसे महापुरुष जिन्हें अभी तक महत्व नहीं मिला और उनकी भूमिका देश हित में रही उन पर नाटक का लेखन कर मंचन करती रहेगी।
कार्यशाला का प्रबंध और संयोजन :  कार्यशाला का आयोजन इंद्रवती नाट्य समिति द्वारा किया गया है जिसका प्रबंधन आर्ट ऑन क्लिक,संयोजन एक्सट्रीम आर्ट एण्ड एजुकेशनल सोसायटी तथा समन्वयन रंगपटल परफार्मिंग आर्ट सोसायटी द्वारा किया जा रहा है। प्रयोजन वैष्णवी गार्डेन का है व विशेष सहयोग डॉ. अनूप मिश्र, इंजी. आर. बी.सिंह, विवेक सिंह, अजीता द्विवेदी, सुनील भुर्तिया,ट्रांसफ्रेम,सुनील चौधरी, कुन्दन वर्मा का है।
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