इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। विभिन्न प्रकार की पगड़ियां सिर पर कैसे बांधी जाती हैं और मंच के लिये सैट डिज़ाइन कैसे किया जाता है। आर्टिस्ट कंबाइन इंस्टीट्यूट ऑफ परफॉरमिंग आर्ट्स,ग्वालियर द्वारा जारी कार्यशाला में यह प्रशिक्षण रंगमंच कला विशेषज्ञ दीपक सोनी ने दिया। उन्होंने इस संबंध में विद्यार्थियों की जिज्ञासा का समाधान भी किया। यह जानकारी इंस्टीट्यूट के सचिव संजय लघाटे ने दी। उन्होंने इंस्टीट्यूट की ओर से श्री सोनी का स्वागत किया। विद्यार्थियों से उनका परिचय दिया।
क्या होती है रंगमंच कला : श्री सोनी ने वर्कशॉप के पहले दिन रंगमंच से जुड़ी मूलभूत बातें विद्यार्थियों को बताई। इसके बाद उन्होंने सिर पर बांधे जाने वाली पगड़ियों से परिचित कराया। उन्होंने कई तरह की पगड़ियों का विवरण प्रस्तुत किया। उनसे जुड़ी विविध दिलचस्प जानकारियां दीं। साथ ही छात्रों के सामने किसान, राजा, मुगल, रेगिस्तानी यात्रियों आदि द्वारा पहनी जाने वाली पगड़ियों को बांधकर दिखाया।
कैसे बनाई जाती है स्थाई पगड़ी :उन्होंने स्थाई तौर पर पगड़ी बांधे जाने का प्रशिक्षण भी दिया। इसके साथ ही सभी प्रकार की पगड़ियों के बीच का अंतर भी समझाया। उन्होंने यह भी बताया कि आख़िर किस प्रकार की पगड़ी में किस तरह के कपड़े का उपयोग किया जाता है। उन्होंने कुछ विद्यार्थियों को चुनकर उन्हें पगड़ी बांधकर भी बताया। बाद में मास्क से सम्बंधित जानकारी दी भी दी। चित्रकला के ज़रिये मास्क डिज़ाइन के बारे में बताया।
मंचन के लिये सैट का निमार्ण: श्री सोनी ने विद्यार्थियों को कार्यशाला में नाटक के अनुसार सैट डिज़ाइन करने की मूलभूत बातों से भी परिचित कराया। उन्होंने इसका व्यवाहारिक ज्ञान भी दिया। आपने विद्यार्थियों को मोहन राकेश के ख्यात नाटक- ‘आधे-अधूरे’के सैट निर्माण को बनाकर दिखाया। विद्यार्थियों को समझाया कि नाटक के लिये इसका सैट और मंच व्यवस्था किस तरह से काम करेगी। नाटक की प्रस्तुति पर इसका कैसा और कितना प्रभाव पड़ेगा।
दीपक सोनी जी के इस प्रशिक्षण में इंस्टीट्यू के छात्रों ने भी गहरी रूचि दिखाई। उन्होंने यथा संभव जानकारी पाने की कोशिश की। आपको बता दें, आर्टिस्ट कंबाइन इंस्टीट्यूट में निरंतर रंगमंच से जुड़े विशेषज्ञों को आमंत्रित करता है। ताकि विद्यार्थियों को मंच के नेप्थय और मंच पर अभिनय से जुड़ी समस्त जानकारियां सीधे एक्सपर्टस् के माध्यम से मिलती रहे।
सिर पर कैसे बांधी जाती है पगड़ी, कैसे बनाया जाता है नाटक का सैट ?
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