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भारत के ख्यात चित्रकार और कवि सीरज सक्सेना
इन दिनों लिथुआनिया और पोलैंड की सृजनात्मक यात्रा पर हैं।
लिथुआनिया की उनकी ये तीसरी कला यात्रा है।
यहां उनके काम को एक विशेष पहचान और सम्मान मिला है।
आइये उनकी चित्रकला यात्रा के बारे में हम जानते हैं।
इस यात्रा के बारे में उन्होंने indorestudio.com से ख़ास बातचीत भी की……
सीरज ने उन्नीस सौ छियानवे में गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स, इंदौर से B.F.A किया था।
आज वे अपनी कलाकृतियों के माध्यम से
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन कर रहे हैं।
उनका एक कला स्टूडियो इंदौर में भी संचालित है।
कई सालों से दिल्ली के कला जगत में अपनी ख़ास पहचान बनाने वाले
सीरज सक्सेना आजकल मुंबई में निवास कर रहे हैं।…………
…………….सीरज ने लिथुआनिया के बारे में इंदौर स्टूडियो से चर्चा की।
उन्होंने बताया – ‘लिथुआनिया की राजधानी विनियस से दो घंटे की दूरी पर पानेवज़ीस शहर है।
ये शहर कला और संस्कृति का एक बड़ा केंद्र है।
इस छोटे से शहर में दो संग्रहालय, दो रंगशालाएं, एक पपेट म्यूज़ियम, कई सुंदर पार्क और एक बड़ी लाइब्रेरी है।
यहां पर कला प्रदर्शनियां भी आयोजित होती रहती हैं।
इसके अलावा शहर की नदी के किनारे बना एक सांस्कृतिक केंद्र है।
ये केंद्र लिथुआनिया के कलाकार स्टाशिश की याद में बना है।
इसका आधुनिक कला संग्रहालय बेहद खास है।
यहां पिछले 35 वर्षों से हर दो साल में
अंतर्राष्ट्रीय सिरेमिक कला शिविर और हर साल अंतर्राष्ट्रीय चित्रकला शिविर का आयोजन होता है।
दो हज़ार उन्नीस में भी मैंने यहां हुए सिरेमिक वर्कशॉप में हिस्सा लिया था।
मेरी ख़ुशनसीबी है कि इस बार फिर मुझे
यहां पर आमंत्रित किया गया है’।………….
…………….सीरज सक्सेना ने एक दिलचस्प बात भी बताई। उन्होंने कहा,
‘एक शाम जब मैं यहां के एक कलाकार दोस्त
ईगीदीजस के साथ पार्क में टहल रहा था…
तब ईगीदीजस ने मेरा ध्यान एक बोर्ड की ओर खींचा।
उसपर मेरे बारे में यहां की भाषा में लिखा गया था।
मैं अपने नाम के अलावा और कुछ नहीं पढ़ सका।
मुझे मेरे इस चित्रकार साथी ने बताया, यहां की एक कल्चरल मैगज़ीन है “सेन वागेस” ।
इस मैगज़ीन में मेरे बारे काम के बारे में एक आर्टिकल छपा है।
उसी लेख का एक हिस्सा उस पट्टिका यानी यहां लगाये गये बोर्ड पर लिखा गया है।
ये जानकर मैं हैरान रह गया’!……
रिपोर्ट में आप इस बोर्ड की तस्वीर भी देख सकते हैं……….
…………सीरज ने बताया, इस पट्टिका पर लिखा है:
“एक कलाकार जो विदेश के एक शहर से यहां पर आता है
यहां की सांस्कृतिक और कला गतिविधियों और कला आयोजनों को देखता है
उसे अपनी यादों में सहेजता है।
यह बात सिर्फ़ उसके लिए ही नहीं बल्कि
इस शहर के लिए भी महत्वपूर्ण और ज़िक्र के काबिल बन जाती है। ‘
…….ज़ाहिर है कि उनके सम्मान में लिखी ये टिप्पणी
सीरज सक्सेना की गहरी दृष्टि को रेखांकित करती है।
इस बात से ये भी पता चलता है कि
कैसे एक भारतीय कलाकार
विदेशी संस्कृति को अपनी रचनात्मकता के साथ आत्मसात कर रहा है।…..
उसके काम वहां पर किस तरह से देखा और सराहा जा रहा है।
सम्मान दिया जा रहा है…………
…..सीरज सक्सेना एक बहुआयामी कलाकार हैं….
उनकी कलाकृतियों में विविध माध्यमों का शानदार संगम देखने को मिलता है।
उनके प्रमुख कार्यों में दो हज़ार बाइस में मिस्र और
अभी-अभी दो हज़ार छब्बीस में ‘स्टोनवेयर’ (सिरेमिक) की कलाकृतियां
साथ ही दो हज़ार बीस में पोलैंड में लकड़ी (Wood Sculpture) पर उकेरी गई
उनकी विशाल संरचनाएं शामिल हैं।
इसके अलावा, वे कैनवस पर दो हज़ार तेईस में ऐक्रेलिक, कागज पर कोलाज और
दो हज़ार बाइस में ‘स्टिच्ड टेक्सटाइल’ जैसी अनूठी तकनीकों के माध्यम से
अपनी गहरी रचनात्मकता को अभिव्यक्त कर चुके हैं।………….
……….. सीरज सक्सेना ने दो हज़ार चौबीस में
इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में
‘नॉट विद वर्ड्स’ शीर्षक से पेंटिंग, कोलाज और सिरेमिक की
एक शानदार एकल प्रदर्शनी आयोजित की थी।
कहना ना होगा…..
लिथुआनिया और पोलैंड के उनके ताज़ा दौरे से
भारतीय और यूरोपीय कला जगत के बीच
सांस्कृतिक संवाद और अधिक मजबूत हो रहा है।
चित्रकला में नई प्रयोगशीलता और रचनात्मकता का
रास्ता बन रहा है….।
इंदौर स्टूडियो की रिपोर्ट। …..

