Wednesday, May 13, 2026
Homeकला खबरेंस्टेट प्रेस क्लब के मंच पर तीन थियेटर ग्रुप्स के विशिष्ट प्रयोग

स्टेट प्रेस क्लब के मंच पर तीन थियेटर ग्रुप्स के विशिष्ट प्रयोग

चंद्रशेखर बिरथरे ‘पथिक’, इंदौर स्टूडियो। इंदौर में स्टेट प्रेस क्लब के राष्ट्रीय पत्रकारिता महोत्सव में बीते दिनों  3 नाटकों का स्थानीय रवीन्द्र नाट्य गृह में मंचन हुआ। इनके नाम हैं -‘आधे अधूरे, साइबर क्राइम और नजरा गईली गुईयां’। तीनों ही नाटक एक-दूसरे अलग और अपने आप में विशिष्ट प्रयोग थे। इनकी कलाकार समूहों ने विशेष तैयारियां भी की थीं। तीनों ही प्रस्तुति में स्टेट प्रेस क्लब के साथ इसके अध्यक्ष, प्रवीण खारीवाल का विशेष सहयोग रहा। दीप प्रज्जलन की रस्म से शुभारंभ: कार्यक्रम में अतिथि के रूप में क्रमश: सिने-कला समीक्षक अजीत राय, रचनाकार-पत्रकार शकील अख़्तर और वरिष्ठ रंगकर्मी और सिने अभिनेता सुशील जौहरी शामिल हुए। शुभारंभ दीप प्रज्जलन की रस्म से हुआ। इसमें स्टेट प्रेस क्लब की ओर से बहुविध कलाधर्मी आलोक वाजपेयी और सीनियर फोटो जर्नलिस्ट सत्यजीत शिवनेकर मौजूद थे।मोहन राकेश का कालजयी नाटक: पहला नाटक “आधे अधूरे” रहा। मोहन राकेश लिखित यह एक कालजयी नाटक है। साठ के दशक में लिखे गये इस नाटक की कथा वस्तु भले प्रासंगिक न हो। परंतु आज कलाकार इस नाटक में काम करना अपना सौभाग्य समझते हैं।मध्यमवर्गीय परिवार पर केंद्रित कहानी: यह नाटक एक मध्यमवर्गीय परिवार पर केंद्रित है। पति महेन्द्रनाथ कारोबार में असफल होकर बेकार बैठा है। पत्नी सावित्री नौकरी कर किसी तरह घर की गाड़ी खींच रही है। बड़ी बेटी, अपने प्रेमी के साथ शादी कर चुकी है। छोटी बेटी भी बिगड़ रही है। बेटा भी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है। ऐसे में घर में तनाव का माहौल है और एक किस्म का मनोवैज्ञानिक युद्ध चल रहा है। हालात का असर पति-पत्नी के रिश्तों पर भी पड़ चुका है। दोनों के रिश्तों में कड़वाहट घुल चुकी है। पत्नी दूसरे पुरूषों में एक नया साथ ढूंढ रही है। हालांकि भी आसान नहीं है।गंभीर नाटक, प्रशंसनीय अभिनय: नटराज थियेटर ग्रुप एंड फ़िल्म प्रॉडक्शन्स द्वारा इस नाटक का शुभम वर्मा ने निर्देशन किया। नाटक में सावित्री की मुख्य भूमिका में निष्ठा मौर्य ने उत्कृष्ट अभिनय किया। उन्होंने अपने किरदार को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इसी तरह पति महेंद्रनाथ, बड़ी और छोटी बेटी, बेटा और तीन पुरूषों की भूमिका में लव अटूट, अर्पित पात्रा, तुषार गेहलोत, सिमरन शर्मा, ईशा दास, पलाश पाठक ने अपने किरदारों के अनुरूप प्रशंसनीय अभिनय किया। नाटक में मंच सज्जा – अभिधान लोधी, राजेश, संगीत – विवेक सिकरवार,प्रकाश संचालन विकास चौधरी,संस्कार द्विवेदी, आदित्य जायसवाल, रूप सज्जा – आती चौहान और वस्त्र विन्यास -अर्पित द्विवेदी का रहा। नाटक में कुछ जगहों पर पार्श्व संगीत की ध्वनि तेज़ होने की वजह से दर्शकों को संवाद सुनने में कठिनाई हुई।साइबर क्राइम, एक ब्लैक कॉमडी: दूसरा नाटक “साइबर क्राइम” एक ब्लैक कॉमेडी था। इसे इंदौर के ‘प्रयास थ्री डी’ रंग समूह ने प्रस्तुत किया। लेखन और निर्देशक वरुण जोशी का था। यह नाटक आज के दौर में मोबाइल, इंटरनेट या सोशल मीडिया के दुष्परिणामों की तरफ़ ध्यान आकर्षित करता है। अपनी हास्य और व्यंग्यात्मक कोलाज प्रस्तुति से दर्शकों को जागरूक करता है। नाटक के विषय और इसकी प्रस्तुति को युवा दर्शकों ने ख़ासा पसंद किया।रचनात्मक ऊर्जा से भरी प्रस्तुति: “साइबर क्राइम” इसके युवा कलाकारों की रचनात्मक ऊर्जा से भरी प्रस्तुति थी। कलाकारों में आपसी तालमेल और शारीरिक संचालन का सुंदर समन्वयन था। दृश्य रचना में कल्पनाशीलता थी, परंतु उसे और अधिक संप्रेषणीय बनाने का प्रयास किया जा सकता है। संभावनाओं के अनुरूप और भी इम्प्रोवाइज़ किया जा सकता है। यह एक ऐसी प्रस्तुति भी है जिसके स्कूलों में भी शोज़ होते रहना चाहिये। नाटक में आयुष पांचाल, अनुराग शर्मा, सिद्धि तिवारी, फ़ैज़ान ख़ान, अनिमेष नीमा, नमन डाबी, अरुण परमार और हर्ष बंसल ने अभिनय किया है। मंच व्यवस्था शिवम् और जतिन की रही। नाटक को बेहतर बनाने में राघव राज और ज्योति राघव का साथ मिला।नारी विद्रोह का सशक्त नाटक: तीसरा और अंतिम नाटक रहा – ‘नजरा गईली गुईयां’। यह नाटक गीताश्री लिखित कहानी का रूपातंरण था। इसे इंदौर के नये रंगकर्मी ग्रुप ‘फेड इन रंगकर्मी’ ने प्रस्तुत किया। नाटक का निर्देशन और परिकल्पना सुश्री उर्मि शर्मा की थी।  दुराग्रहों के ख़िलाफ़ नारी का संघर्ष: नाटक एक ऐसी माँ-बेटी की कहानी है जो पारंपरिक दुराग्रहों और पाखंड के ख़िलाफ़ अपनी तरह से संघर्ष करती हैं। माँ ने एक पत्नी के रूप में जो जीवन भोगा है, वह नहीं चाहती कि उसकी बेटी भी उसी तरह का जीवन जीये। माँ चाहती है कि उसकी बेटी जिस व्यक्ति से भी शादी करे, वह उसका सम्मान करे। कहानी में एक नया मोड़ तब आता है, जब माँ का स्वर्गवास हो जाता है। माँ के निधन के बाद परिजन तेहरवीं के लिये बेहिसाब खर्च के लिये दबाव बढ़ाते हैं, तब शिक्षित बेटी पाखंडी रस्म के खिलाफ़ उठ खड़ी होती है। वह इसमें सफल भी रहती है।प्रभावशाली दृश्य और संगीत: उर्मि शर्मा निर्देशित यह नाटक अपने प्रभावशाली दृश्यों का असर दर्शकों पर छोड़ता है। नाटक में अंकित दास,यशिका महाडिक,ऐलिस गोरे ने सराहनीय अभिनय किया है। इसी तरह आशीष उज्जीवाल और गौतम, गुलिया भी अपने किरदारों के साथ न्याय करते हैं। चेतन आमेटा, ऋषिका राजपूत की मंच सज्जा अच्छी थी, परंतु बार-बार परिवर्तन नाटक की गति को कुछ रोकता है। इस व्यवधान को दूर किया जाना चाहिये। अतुल पाटीदार की प्रकाश व्यवस्था में कुछ खामियां खलती हैं, जबकि हार्दिक मेहता और उन्नति राव का पार्श्व संगीत बढ़िया था।शाल ओढ़ाकर अतिथियों का सत्कार: नाट्य प्रस्तुतियों के अंत स्टेट प्रेस क्लब के अध्यक्ष प्रवीण धारीवाल के साथ अभिषेक चौकसे और आलोक वाजपेयी जी ने अतिथियों का सत्कार किया। ‘कला और संस्कृति’ को स्थान: स्टेट प्रेस क्लब के प्रमुख प्रवीण खारीवाल की प्रशंसा करना होगा कि वे राष्ट्रीय पत्रकारिता महोत्सव में ‘कला और संस्कृति’ पर केंद्रित आयोजन भी करते हैं। वे इंदौर अभिनव कला समाज के भी अध्यक्ष हैं। उनके प्रयासों से ही अभिनव कला समाज में अभ्यास करने वाले नाट्य समूहों ने अपनी प्रस्तुतियां समारोह में दी। उन्होंने कहा कि कलाकारों को उचित मान और मंच मिले, यही स्टेट प्रेस क्लब के साथ ही अभिनव कला समाज का भी उद्येश्य है। बता दें महोत्सव में देश भर के पत्रकार जमा होते हैं। तीन दिनों के इस आयोजन में पत्रकार, प्रासंगिक विषयों पर मंथन के साथ ही संध्याकालीन सांस्कृतिक आयोजन का आनंद लेते हैं। आगे पढ़िये –https://indorestudio.com/bejan-pattharon-me-bapu-mahatma-ke-mastak-par-kritagyata-ka-mangal-tilak/

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

जावेद अहमद शाह ख़ान "अल-हिंदी" on रंगमंच की नई उड़ान…सौम्या व्यास