Wednesday, September 9, 2026
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लता जी के कार्यक्रम में 3 बार बिजली चली गई,सन्नाटा पसरा..लेकिन

अरुण गोखले,इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। इंदौर में भारत रत्न लता मंगेशकर के जन्मदिन पर आयोजित संगीत कार्यक्रम में एक या दो बार नहीं बल्कि तीन बार बिजली चली गई, सन्नाटा पसरा लेकिन संगीत का दिलचस्प सफ़र चलता रहा, सुरों की यादगार शाम सजी रही। संगीत रसिक पूरी तन्मयता से लताजी के गाये सदाबहार गीतों को सुनते रहे। ‘सुरों की क़ायनात’ नाम से यह कार्यक्रम इंदौर के जाल सभागार में आयोजित हुआ। सभागार 7 बजे से ही हाऊस पैक था। रात 11 बजे तक यहां 10 गायिकायें लताजी के उन 30 नग़मों को आवाज़ देती रहीं, जो फिल्म संगीत के चाहने वालों की ज़ुबान पर है। इस दौरान मंच पर डॉ.विवेक गावड़े और श्रीनिवास पुजारी लता जी के संगीत सफ़र से जुड़ी दिलचस्प बातें श्रोताओं को सुनाते रहे।आयोजन मध्यप्रदेश के संस्कृति विभाग और उस्ताद अलाउद्दीन खां अकादमी ने संयुक्त रुप से किया। कार्यक्रम में उस्ताद अलाउद्दीन ख़ां संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक जंयत भिसे,स्टेट प्रेस क्लब के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल और कला गुरू सुनील मसूरकर मौजूद रहे। संयोजन डॉ.विवेक और अभिषेक गावड़े के साथ श्रीनिवास पुजारी का रहा। कार्यक्रम में श्रद्धा जगताप, आकांक्षा जाचक, शिफ़ा अंसारी, सोनाली पुराणिक,नूपुर पंडित, अर्पिता बोबडे, मोना शेवड़े, रसिका गावड़े, सोनल दत्ता और सिमरजीत जैसी गायिकाओं ने लता जी के 30 सदाबहार गीतों की सुरीली प्रस्तुतियां दी। युगल गीतों में राजेंद्र गलगले और आशीष जैन ने साथ निभाया। हर्षद शेवगांवकर (की बोर्ड) के संगीत संयोजन में तबले पर अमोल कारखानिस, ढोलक पर रवि खेड़े, गिटार पर योगेश कान्हेरे और ऑक्टोपेड़ पर अमित शर्मा और आयुषी मकवाना शामिल रहे।कार्यक्रम का कवितामयी संचालन सुगंधा बेहेरे ने किया। डॉ. विवेक गावड़े और श्रीनिवास पुजारी जी ने इस दौरान भारत रत्न लता मंगेशकर के जीवन के बहुत से प्रसंग सुनाये। कई अनछुये पहलुओं की जानकारी देकर कार्यक्रम को और भी दिलचस्प बना दिया। एक और विशेष बात लता जी के जीवन पर लगाई गई दुर्लभ चित्रों की प्रदर्शनी रही। इसका संयोजन श्रीनिवास पुजारी ने ही किया। कार्यक्रम में सुनाये गये लता के गाये यह गीत :कार्यक्रम में आकांक्षा जाचक ने अल्ला तेरो नाम,अर्पिता बोबडे-आशीष जैन ने तेरे मेरे मिलन की ये रैना,रसिका गावड़े ने माई री मैं कासे कहूँ,सोनल दत्त-,राजेंद्र गलगले ने तुम गगन के चंद्रमा हो, दिल की गिरह खोल दो, ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं,शिफ़ा अंसारी ने मैं तो कब से खड़ी इस पार,सिमरजीत ने कोई नहींहै फिर भी है मुझको, आ आ भी जा रात ढलने लगी, बहारों मेरा जीवन भी सँवारो, खेलो ना मेरे दिल से, शर्म आती है मगर,सोनाली पुराणिक ने बाहों में चले आओ, तू जहाँ जहाँ चलेगा,नूपुर पंडित-राजेंद्र गलगले ने बीती ना बिताई,मोना शेवड़े ने रस्मे उल्फत को निभाएं,मोना-आशीष ने किसी राह में किसी मोड़ पर,अर्पिता बोबडे ने क्या जानूँ सजन होती है क्या,आकांक्षा-राजेंद्र ने इक शहंशाह ने बनवा के,रसिका-आशीष ने पत्ता पत्ता बूटा बूटा ,नूपुर पंडित ने तेरे सुर और मेरे गीत,शिफ़ा-राजेंद्र ने तस्वीर तेरी दिल में,श्रद्धा-आशीष ने इस मोड़ से जाते है और सोनल-आशीष: करवटें बदलते रहे प्रस्तुत किया।इस कार्यक्रम में सबसे ज़्यादा गीत सोनल दत्ता प्रस्तुत किये। उनके सुनाये गये गीत क्रमश:इस प्रकार रहे। सजना बरखा बहार, लग जा गले ,वो चुप रहे तो मेरे दिल, इक राधा इक मीरा , ये ज़िन्दगी उसी की है,श्रद्धा जगताप ने सुनो सजना पपीहे। गौर तलब है कि इंदौर में लताजी के जन्मदिवस पर एक के बाद एक दो आयोजन हुए।‘लताशा’ में 20 बेटियों का सम्मान : लताजी और आशाजी के जन्मदिन और डॉटर्स डे पर 20 गायिकाओं के अभिनंदन का कार्यक्रम ‘लताशा’ नाम से आयोजित हुआ। इसमें शहर की प्रतिभाशाली बेटियों क्रमश: मोना शेवड़े,श्रद्धा जगताप, सपना केकरे, अर्पिता बोबडे, कविता श्रीवास्तव, सोनाली पुराणिक, शिफा अंसारी, संध्या गरवाल, शिवांगी मिश्रा पाठक, अनिका अग्रवाल,नूपुर पंडित, निधि नागर,नूपुर गडकरी,अनुभा खाडिलकर, नूपुर कौशल, शिक्षा शर्मा, निशा चेलानी,पल्लवी सिंह के साथ ही स्पेशल डॉटर हर्षिता जायसवाल का अभिनंदन किया गया। चुनिंदा गीत प्रस्तुत किये गये। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य राज्य मंत्री मंत्री प्रदीप पटेल,संगीतज्ञ पं. सुनील मसूरकर, सेंट्रल जेल अधीक्षक अलका सोनकर, पूर्व पार्षद चंदू राव शिंदे, शिक्षाविद अवधेश दवे और वरिष्ठ पत्रकार अनमोल तिवारी मौजूद थे। प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत कार्यक्रम संयोजकगण गोरधन लिम्बोदिया,अभिषेक गावड़े, राजेन्द्र कौशिक,सोनाली यादव, ने किया। अंत में आभार स्टेट प्रेस क्लब के अध्यक्ष प्रवीण कुमार खारीवाल ने जताया।

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