Saturday, May 9, 2026
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‘सूत्रधार’ की नाट्य स्पर्धा के दौरान कलाकारों में रहा उत्सव जैसा माहौल

शकील अख़्तर, इंदौर स्टूडियो। इंदौर में ‘सूत्रधार’ की हर साल होने वाली एकल और एकांकी नाट्य स्पर्धा शहर के रंगकर्मियों के लिये एक वार्षिक उत्सव की तरह है। इस दौरान कलाकारों में उत्साह देखते ही बनता है। इसका शहर के रंगकर्म पर सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। निश्चित ही इसका श्रेय ‘सूत्रधार’ संस्था के प्रमुख श्री सत्यनारायण व्यास को जाता है, वे विगत 16 साल से निरंतर इस स्पर्धा का आयोजन कर रहे हैं’। यह बात स्पर्धा के निर्णायक सदस्यों सर्वश्री सुनील मतकर, संतोष जोशी और प्रांजल श्रोत्रिय ने कही। (चित्र: सर्वश्रेष्ठ नाटक ‘मुग़ालते’ के कलाकार साथी। ‘सहस्त्रार’ की इस प्रस्तुति को मिले हैं सर्वेश्रेष्ठ निर्देशन,अभिनय,संगीत,प्रकाश,संगीत और नेपथ्य के लिये भी प्रथम पुरस्कार।) 32 नाटकों में 10 नये नाट्य दल शामिल हुये: वरिष्ठ नाट्य निर्देशक सुनील मतकर ने कहा, ‘इस आयोजन के असर को प्रतिस्पर्धा की टीमों की संख्या से ही लगाया जा सकता है। इस साल कुल 32 नाटक प्रतिस्पर्धा में थे। इनमें 21 एकांकी और 11 एकल नाटक रहे। हर साल नाट्य दलों की बढ़ती संख्या अच्छी बात है। इनमें ज़्यादातर युवा कलाकार आ रहे हैं’। श्री मतकर की कही इस बात के जवाब में श्री सत्यनारायण व्यास ने कहा, ‘इस साल 10-12 नये नाट्य समूहों ने शिरकत की। यह सबसे बड़ी उपलब्धि की बात है। इनमें ज़्यादातर शहर या आसपास के इलाकों थे। स्पर्धा के दौरान करीब 450 कलाकारों की हिस्सेदारी रही। ज़ाहिर है कि बहुत से नये कलाकार रंगमंच को महत्व दे रहे हैं। इसके अलावा तीन नाट्य दलों ने दिल्ली से आकर भाग लिया’। (चित्र: नाटक ‘मुग़ालते’ के एक दृश्य में सहस्त्रार ग्रुप के कलाकार) एक-दूसरे के नाटकों को लेकर गंभीर चर्चा: वरिष्ठ रंगकर्मी प्रांजल श्रोत्रिय ने कहा, ‘तीन दिवसीय इस स्पर्धा के दौरान माहौल एक उत्सव की तरह नज़र आया। साथ ही कलाकार एक-दूसरे के नाटकों पर गंभीर चर्चा करते भी नज़र आये। यह भी सीखने की एक प्रक्रिया है। यानी कलाकारों ने एक-दूसरे के नाटकों को देखा, जो ज़रूरी नहीं था। नाट्य प्रस्तुति एक टीम वर्क है, इसमें लेखक,निर्देशक,अभिनेता से लेकर नेपथ्य में सहयोग करने वाले कलाकारों के बीच सजग तालमेल की ज़रूरत होती है। प्रतिस्पर्धा के दौरान जब कलाकार सैट और लाइट लगाने के लिये एक-दूसरे की मदद करते दिखे तो अच्छा लगा। (चित्र: नाटक ‘मुग़ालते’ में अभिनय के लिये पहला पुरस्कार पूजा परमार को मिला।)महिला कलाकारों ने भी दिखाई अपनी प्रतिभा : रंगकर्म और आकाशवाणी इंदौर की यादगार प्रस्तुतियों के लिये प्रख्यात संतोष जोशी ने कहा – ‘अच्छी बात यह भी है कि अब बहुत सी महिला कलाकार रंगकर्म के क्षेत्र में आगे आ रही हैं। बड़े आत्मविश्वास के साथ अपनी कला का प्रदर्शन कर रही हैं। प्रतिस्पर्धा के दौरान यह बात भी देखने को मिली’। यही बात प्रांजल श्रोत्रिय ने कही। उन्होंने कहा, ऐसा होना रंगकर्म के लिये ज़रूरी है। वरना एक अच्छी महिला कलाकार की अक्सर हम तलाश ही करते रहते हैं’।  (चित्र: नाटक नजरा गई गुड़िया। अभिनय,संगीत,नेपथ्य के लिये दूसरा पुरस्कार।) परफॉरमेंस के आधार पर क्या रहा आकलन: इस सवाल पर श्री जोशी ने कहा, ‘जिन रंगसमूहों और कलाकारों ने पुरस्कार हासिल किये हैं, वे बधाई के पात्र हैं। जो पुरस्कार नहीं पा सके, उनमें से कुछ, बहुत छोटी-छोटी कमियों की वजह से पीछे रह गये। इसमें समय सीमा को नज़रअंदाज़ करना एक बड़ा कारण रहा। प्रतिस्पर्धा में एकल प्रस्तुति के लिये 40 मिनट और एकांकी के लिये 50 मिनट का समय दिया गया था। परंतु कुछ कलाकारों ने इस नियम को अनदेखा दिया। ऐसे में अच्छे प्रदर्शन करने के बावजूद वे प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गये’। श्री मतकर ने बताया, 7 एकांकी नाटकों और दो एकल प्रस्तुतियों को इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ा। (चित्र: एकांकी नाटक ‘मुक्ति’ को लेखन का मिला पुरस्कार)उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिये गंभीर तैयारी ज़रूरी: श्री मतकर ने कहा, ‘उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिये किसी कलाकार या ग्रुप को बड़ी गंभीरता से तैयारी करना चाहिये। जल्दबाज़ी या बेमन से दी जाने वाली प्रस्तुति से बचना चाहिये। हमें अपनी प्रस्तुति को वैचारिक और प्रस्तुति दोनों ही दृष्टि से सशक्त बनाने की कोशिश करना चाहिये। इसी बात पर संतोष जोशी ने कहा, ‘अगर नाटक का मूल मंतव्य या विषय आने से रह जाये, तब प्रस्तुति बेअसर और अधूरी ही रहेगी। इसी तरह अगर अभिनेता में उच्चारण दोष है, वह ‘है’ को ‘हे’ ही बोलता है, तब वह मंच का एक सक्षम अभिनेता नहीं बन पायेगा’।
(चित्र: एकांकी नाटक, नज़रा गईल गुड़िया के लिये मिला उर्मि शर्मा को सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का दूसरा पुरस्कार। )लगातार प्रशिक्षण और अभ्यास ज़रूरी: तीनों निर्णायकों ने कहा, अपनी समझ और तैयारी को बढ़ाने के लिये हमें लगातार प्रशिक्षण लेते रहना और अभ्यास करते रहना चाहिये। बाहर से आने वाले नाटकों को भी देखते रहना चाहिये। इसके साथ ही नतीजों को विनम्रता से स्वीकार करना भी आना चाहिये। इस अंहकार भाव से दूर ही रहना चाहिये कि’ ‘बॉस अपने को सब पता है,ट्रेनिंग की क्या ज़रूरत’? संतोष जोशी ने बताया, ‘पिछले साल की बात है। एक कथा प्रतियोगिता में अविजेता रही एक महिला कलाकार मेरे निर्णय से बेहद नाराज़ हो गईं। हालांकि परफॉममेंस के आधार पर निर्णय सभी के सामने हुआ था। वहाँ पूर्वाग्रह की कोई गुंजाइश नहीं थी। परंतु उन्हें व्यक्तिगत पूर्वाग्रह नज़र आया। …कहने का अर्थ यह है कि निर्णय पक्ष में ना आने पर, अपनी कमियों को समझकर आगे बढ़ना और उसकी तैयारी करना चाहिये। (चित्र: एकांकी नाटक ‘मुक्ति’ में अभिनय के लिये स्नेहा को मिला दूसरा पुरस्कार।)इंदौर में नाटकों के लायक ऑडिटोरियम नहीं: तीन दिन चली यह नाट्य स्पर्धा प्रेस क्लब के राजेंद्र माथुर सभा गृह और रवींद्र नाट्य गृह में संपन्न हुई। प्रांजल श्रोत्रिय ने कहा, ‘रवींद्र नाट्य गृह सुसज्जित और पहले से बेहतर ज़रूर हो गया है परंतु आज भी लाइट और सांउड यहाँ की एक बड़ी समस्या है। पीछे बैठने वालों को संवाद बोलते कलाकार की आवाज़ सुनाई नहीं देते। संतोष जोशी ने कहा, ‘सही मायनों में शहर को कलाकारों के लिये एक ऐसा नाट्य गृह होना चाहिये जो कलाकारों को बेहद कम दाम पर सुलभ हो और जो वास्तव में नाटकों के प्रदर्शन के काबिल हो। श्री सुनील मतकर ने कहा, ‘दु:खद यह भी है कि शहर में जो नये ऑडिटोरियम भी बनाये गये हैं, उनमें भी बड़ी तकनीकी खामियां हैं। वे भी नाट्य मंचनों के अनुकूल नहीं है’। उन्होंने कहा, ‘एक बार ख़ुद सुमित्रा ताई (लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष) ने इस मामले में मदद की थी। परंतु निर्माण करने वाले इंजीनियर्स ने हमारी बात नहीं मानी’। तीनों वरिष्ठ रंगकर्मियों ने नाट्यगृह के लिये 70 हज़ार रूपये के खर्च को लेकर कहा’- ‘सभी को पता है, कलाकार इतनी बड़ी राशि देने में सक्षम नहीं होते। वे किसी तरह, मदद से अपनी कला और शहर की संस्कृति को ज़िंदा रखते हैं। मगर ऐसा लगता है शासन,प्रशासन में बैठे लोगों को इस बात की परवाह नहीं है’। (सोलो प्ले ‘उत्तर कामायनी’ में तपन शर्मा को अभिनय के लिये मिला दूसरा पुरस्कार) सर्वश्रेष्ठ निर्देशन,सर्वश्रेष्ठ नाटक मुग़ालते: पुरस्कार समारोह में निर्णायकों के साथ बतौर मुख्य अतिथि इंदौर इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नालॉजी के प्रबंध निदेशक, श्री अरूण भटनागर मौजूद थे। उन्होंने आयोजन पर प्रसन्नता ज़ाहिर की। इस बार विभिन्न वर्ग श्रेणियों कलाकारों को बीस अधिक पुरस्कार दिये गये। प्रतिस्पर्धा की एकांकी नाट्य स्पर्धा में सहस्त्रार ग्रुप द्वारा प्रस्तुत नाटक ‘मुगालते’ पर प्रतिस्पर्धा में पुरस्कारों की बरसात हुई है। इसे सर्वश्रेष्ठ नाटक,अभिनय,संगीत,प्रकाश और नेपथ्य के साथ सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का पुरस्कार मिला है। ‘मुग़ालते’ का निर्देशन तपन शर्मा ने किया है। उन्होंने कहा, ‘हमारा यह नाटक निखिल सचान की एक कहानी पर आधारित है। इसमें गौरव भावसार और चिन्मय तारे ने अभिनय किया है। यह एक तवायफखाने की कहानी हैं। जहाँ पर एक लेखक आता है जो एक तवायफ़ की ज़िदंगी पर फ़िल्म बनाना चाहता है। वहां पर उसकी विभा नाम की एक वेश्या से मुलाकात होती है। कहानी में कोठे में रहने वाली वेश्याओं की ज़िदंगी, उनका समाज के प्रति नज़रिया जैसी बातें सामने आती हैं। आगे आपसी भ्रांतियां दूर होती हैं। लेखक और वेश्या आपस में जुड़ जाते हैं। राहुल ने कहा, ‘हमने इस नाटक को लेकर काफी तैयारी की थी। कोशिश की थी प्रस्तुति समग्र रूप से बेहतर बन सके’। उन्होंने बताया, ‘प्रतिस्पर्धा में काफी अच्छे नाटक आये थे। कुछ समूहों ने बहुत अच्छी तैयारी की थी,बेशक उनसे भी हमें सीखने को मिला’। (चित्र: सर्वश्रेष्ठ नाटक ‘मुग़ालते’ को मिला नेपथ्य का पहला पुरस्कार )आइये अब डालते हैं पुरस्कार पाने वाले नाटकों और विजेता कलाकारों की सूची पर एक नज़र:
एकल नाटकों में विजेता ग्रुप
: पहला – शतरंज के मोहरे (पथिक), दूसरा – उत्तर कामायनी (सहस्रार), तीसरा- अर्ध नर एकांकी नाटकों के विजेता ग्रुप: पहला – मुग़ालते (सहस्रार), दूसरा – ब्लाइंड मेन्स क्लब (दिल्ली), तीसरा – मुक्ति (स्नेहा)। एकांकी अभिनय में विजेता महिला: पहला – पूजा परमार, दूसरा – स्नेहा, तीसरा – उर्मि शर्मा। एकांकी अभिनय में विजेता पुरूष: पहला – प्रकाश शर्मा, दूसरा – नीरज, तीसरा – अजय जोशी। एकांकी मूल लेखन : मुक्ति।  श्रेष्ठ बाल अभिनेता : पीहू पिंगले (समर्थ ग्रुप)। इसके साथ ही संगीत संयोजन,प्रकाश योजना,नेपथ्य के साथ ही मालवी नाटक ‘बेटी को ब्याव’ को विशेष पुरस्कार और ‘बेटीना खे मत मारो’ को भी पुरस्कृत किया गया।
पुरस्कारों के प्रायोजकों और सहयोगियों के प्रति आभार: इस प्रतिस्पर्धा के लिये नक़द पुरस्कार सवर्श्री तपन मुखर्जी, डॉ.निशिकांत कोचकर, अहिल्या नाट्य मंडल, प्रभात पंवार, रसोमा लैबोरेट्रीज़,अनवरत थियेटर और विलास गुप्ते परिवार द्वारा प्रायोजित रहे। आयोजन में सभी के सहयोग के लिये श्री सत्यनारायण व्यास ने इंदौर प्रेस क्लब सहित सर्वश्री अशोक सोजतिया, राजेंद्र मोदी और गोविंदराम सस्केरिया चैरिटी ट्रस्ट के साथ ही इंदौर इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नालॉजी के प्रबंध निदेशक श्री अरूण भटनागर प्रति आभार जताया है।
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