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कला प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। बंगाली नववर्ष ‘पोहिला बोइशाख’ के शुभ अवसर पर सांस्कृतिक संस्था ‘स्वरदा’ ने हिंदी सिनेमा की दिग्गज बंगाली अभिनेत्रियों को समर्पित एक विशेष सांगीतिक संध्या ‘मिष्टिदोई’ का आयोजन किया। प्रीतमलाल दुआ सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में सुरीले गीतों के माध्यम से उन नायिकाओं को याद किया गया, जिन्होंने हिंदी सिनेमा को अपनी अभिनय क्षमता और शालीनता से नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
हिंदी सिनेमा के विकास को समृद्ध करने में बंगाली अभिनेत्रियों की भूमिका बेहद अहम रही है। अनिता गुहा, सुचित्रा सेन, जया भादुड़ी, शर्मिला टैगोर, राखी गुलज़ार, मौसमी चटर्जी और सुमिता सान्याल जैसी अभिनेत्रियों ने रूपहले पर्दे पर जो जादू बिखेरा, उसे ‘स्वरदा’ के मंच पर गीतों के जरिए जीवंत किया गया।
कार्यक्रम में गायिका सपना केकरे, माला स्टीफन्स और नंदिनी कुलकर्णी ने अपने मधुर स्वरों से समां बांध दिया। सांगीतिक संध्या की शुरुआत तीनों गायिकाओं द्वारा अनिता गुहा पर फिल्माए गए प्रसिद्ध गीत ‘मैं तो आरती उतारूं रे’ से हुई। इसके बाद सपना केकरे ने ‘ना जिया लागे ना’ का बांग्ला संस्करण गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने ‘ए री पवन’, ‘बड़ा नटखट है रे’ और ‘वो भूली दास्तां’ जैसे गीत भी पेश किए। गायक रवींद्र मराठे के साथ उनका युगल गीत ‘मेघा रे मेघा रे’ बेहद सराहा गया।
गायिका माला स्टीफन्स ने ‘रहे ना रहे हम’ को बांग्ला में प्रस्तुत कर महफ़िल में एक अलग रंग जमाया। इसके अलावा उन्होंने ‘पिया बिना’ और ‘कुछ दिल ने कहा’ के साथ-साथ रवींद्र मराठे के साथ ‘अपने प्यार के सपने सच हुए’ गाकर दर्शकों का दिल जीत लिया। वहीं, नंदिनी कुलकर्णी ने ‘सुन री पवन’ का बांग्ला संस्करण पेश किया। इसके बाद उन्होंने ‘बोले रे पपीहरा’ और ‘बहारों मेरा जीवन भी’ जैसे गीतों से मधुरता बिखेरी। उन्होंने रवींद्र मराठे के साथ ‘तेरे बिना जिंदगी से कोई’ गाकर कार्यक्रम को उरूज पर पहुंचा दिया।
शंख ध्वनि से कार्यक्रम का पारंपरिक शुभारंभ, तीनों गायिकाओं का बंगाली पहनावा और गीतों का बांग्ला संस्करण पेश करना इस सांगीतिक संध्या की सबसे बड़ी खूबी रही। इस अनूठे प्रयोग ने लंबे समय तक के लिए श्रोताओं के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ दी। आगे पढ़िये – सिने संगीत के स्वर्णयुग का अंतिम ध्वजवाहिका का स्वर्गारोहण https://indorestudio.com/asha-bhosle-tribute-golden-era-of-film-music-ajay-bokil/

