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राजेश बादल, इंदौर स्टूडियो। 26 नवंबर राजकुमार केसवानी जी का जन्मदिवस था और उस दिन एक ऐसा कार्यक्रम हो गया जो आमतौर पर किसी के अलविदा कहने के बाद भारत में कम ही होता है। इस कार्यक्रम में स्व.केसवानी को सभी ने दिल से याद किया। उनके हुनरमंद शख्सियत की जी भर के प्रशंसा की। राजकुमार जी में यूँ तो तमाम ख़ूबियां थी मगर सबसे बढ़कर वे एक शानदार इंसान थे।
एक इंसान में इतने हुनर,कल्पना से परे: महीनों से यह कवायद चल रही थी कि भाई राजकुमार केसवानी की याद में क्या किया जाना चाहिए। उनके कौन से रूप को नई पीढ़ियों तक पहुँचाना चाहिए। क्या नहीं थे वे ? किसी एक इंसान के भीतर इतने हुनर हो सकते हैं, कल्पना से परे है। एक संवेदनशीन और नरम दिल के कवि, संगीत की महीन स्वर लहरियों के दीवाने और उसके एक अनमोल ख़ज़ाने के मालिक, बेजोड़ क़िस्सागो, फ़िल्मों की अनगिनत छिपी हुई दास्तानों को सामने लाने वाले शब्दसितारे, बेहतरीन खोजी पत्रकार, टीवी पत्रकारिता में तमाम कीर्तिमान रचने वाले संवाददाता, अख़बार की कायापलट करने की क्षमता रखने वाले विलक्षण संपादक, पुरानी शैली के पेशेवर फ़िल्म वितरक,उर्दू, सिंधी, हिंदी और अँगरेज़ी के अदभुत जानकार और भी पता नहीं, क्या-क्या थे वे लेकिन सबसे ऊपर एक शानदार इंसान। जब कोई ऐसी शख़्सियत हमारे बीच से अचानक चली जाती है तो लगता है कि अजीब सा ख़ालीपन ज़िंदगी में आ गया।
केसवानी के सैकड़ों चाहने वाले पहुँचे: राजकुमार केसवानी को सप्रे संग्रहालय के सभागार में याद करने के लिए उनके सैकड़ों चाहने वाले पहुँचे। हॉल में तिल रखने के लिए भी जगह नहीं थी। संग्रहालय के संस्थापक संयोजक पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर के चेहरे पर अपने पड़ोसी को शिद्दत से याद करने का संतोष पढ़ा जा सकता था। उन्होंने याद किया कि घर से बाहर निकलते ही नज़रें मिलतीं तो लपक कर केसवानी आते और पेट भर बतियाते। वैसे वे कम लोगों से ही खुलते थे।
मंच पर अभिव्यक्ति के तीन सितारे: राजकुमार को याद करने के लिए मंच पर अभिव्यक्ति के तीन सितारे मौजूद थे। मुंबई की मायानगरी में परदे पर कहानी के ज़रिए अनूठी छाप छोड़ने वाले रूमी जाफ़री, परदे पर ही कविता का हैरत में डालने वाला संसार रचने वाले इरशाद क़ामिल और फ़िल्मों में अभिनय से धूम मचाने वाले जाने माने रंगकर्म सितारे राजीव वर्मा, पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर और लेखक स्वयं याने राजेश बादल भी था। सबने शिद्दत से याद किया। भरपूर याद किया। उसे लिखूँगा तो अलग से किताब बन जाएगी। राजकुमार जी आप होते तो देखते कि जिन्हें आप छोड़ कर गए हैं , उनके दिलों में आप कैसे बैठे हुए हैं।
जारी रहना चाहिये याद का सिलसिला: यह भी तय हुआ था कि राजकुमार जी की याद का सिलसिला जारी रहना चाहिए। इसलिए हर साल खोजी और मानवीय सरोकारों पर श्रेष्ठ काम करने वाले रचनाकर्मी को हर साल सम्मानित किया जाए। चाहे वह पत्रकारिता से हो या लेखन विधा से या फिर फ़िल्म संसार से।
वर्तिका नंदा को केसवानी स्मृति का पहला पुरस्कार: इस साल पहला सम्मान पत्रकार लेखिका और क़ैदियों के अधिकारों पर काम करने वाली वर्तिकानंदा को देने का फ़ैसला हुआ। उन्हें सम्मान में एक लाख रूपए, प्रशस्ति पत्र और स्मृतिचिह्न दिया गया। वर्तिका राजकुमार जी के साथ एनडीटीवी में काम कर चुकी हैं। यह भी निश्चय हुआ कि अगले साल से पत्रकारिता की विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्रों छात्राओं को भी सम्मानित किया जाए।
सफल कार्यक्रम के पीछे रौनक का श्रम: इस कार्यक्रम का संयोजन सप्रे संग्रहालय ने किया लेकिन स्वर्गीय केसवानी जी के बेटे रौनक ने इसे कामयाब बनाने के लिए दिन-रात एक कर दिया। आदरणीया भाभी जी श्रीमती सुनीता केसवानी की गरिमामय उपस्थिति ने सारे समय राजकुमार जी के वहां होने का अहसास बनाए रखा। इस आयोजन में यदि वरिष्ठ मीडिया कर्मी और रंगकर्मी अशोक मनवानी का ज़िक्र नहीं हो तो यह सूचना अधूरी रहेगी। उन्होंने सफल संचालन किया और दैनिक भास्कर परिवार के मनीष समंदर ने आभार माना । शब्द सितारे के लिए आपको सलाम! (राजेश बादल राज्यसभा टीवी के संस्थापक संपादक व कार्यकारी निदेशक और देश के प्रतिष्ठित लेखक और पत्रकार हैं।) आगे पढ़िये-
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