Tuesday, June 16, 2026
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‘इप्टा’ के नेशनल फेस्टिवल में ‘थाली का बैंगन’ का मंचन

कला प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। धार्मिक अवसरवाद और अंध भक्ति, आस्था के नाम पर नासमझ नज़रिया, श्रद्धा और अक़ीदत के नाम पर टूटता भरोसा और मौका परस्ती का चढ़ावा… नाटक ‘थाली का बैंगन’ में कुछ इन्हीं बातों का असर देखने को मिला। जोधपुर की रंग संस्था ‘आकांक्षा’ ने यह नाटक हाल ही में, ‘इप्टा’ के ‘नेशनल ड्रामा फेस्टिवल’ में प्रस्तुत किया। यह मुंबई के माटुंगा में यह फेस्टिवल मैसूर एसोसिएशन ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ। A presentation by Jodhpur-based theatre group 'Akanksha'—*Thali Ka Baingan*—at the IPTA Mumbai National Drama Festival. A report by Indore Studio.‘थाली का बैंगन’ कृश्न चंदर की कहानी पर आधारित नाटक है। इसका निर्देशन डॉ. विकास कपूर ने किया है। हास्य और व्यंग्य से भरपूर इस नाटक की खूबी इसके चुटीले संवाद और अर्थ पूर्ण संवाद हैं जो धार्मिक अंधता और पाखंड सोच के खिलाफ़ कड़ा संदेश भी देते हैं। A presentation by Jodhpur-based theatre group 'Akanksha'—*Thali Ka Baingan*—at the IPTA Mumbai National Drama Festival. A report by Indore Studio.यह नाटक संदेश देता है कि चंद स्वार्थी तत्व अपनी रोटियां सेकने के लिए आम जनता की धार्मिक भावनाओं और अंधविश्वास का जमकर दुरुपयोग करते हैं, जिसका खामियाजा समाज को ही भुगतना पड़ता है। नाटक के बाद दर्शकों ने कलाकारों की बेहतरीन प्रस्तुति के लिये ज़ोरदार तालिया बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया। इस प्रस्तुति को थियेटर के साथ ही बॉलीवुड के कुछ ख़ास अतिथियों ने भी देखा। A presentation by Jodhpur-based theatre group 'Akanksha'—*Thali Ka Baingan*—at the IPTA Mumbai National Drama Festival. A report by Indore Studio.मंच के पुरोधा और नेपथ्य के शिल्पी: कलाकारों की सूची नाटक की सफलता का मुख्य श्रेय इसके कलाकारों को जाता है, जिन्होंने अपने किरदारों में जान फूंक दी। मंच पर प्रमुख अभिनय अनुज अरोड़ा (इंदर-मुख्य पात्र/पति), डॉ. नीतू परिहार (सुंदरी-पत्नी), राजकुमार चौहान (मास्टर जी), जयदीप व प्रवीण शर्मा (गणेश मियां/मनन मियां), मोहम्मद हाशिर कश्फी (हाजी छन्नन), शरद शर्मा (साई करम शाह), हिमांशु जोशी (पण्डित राम दयाल), अफजल हुसैन (मौलवी साहब), अंतिमा व्यास (टी.वी. रिपोर्टर) तथा दीप्तांशु व्यास (पुत्तन) ने किया। कोरस व सहयोगी के रूप में कैलाश गहलोत, आराध्या परिहार, आदित्य, साहिल, सौरभ कच्छवाहा और मोहम्मद हाशिर शामिल रहे।
A presentation by Jodhpur-based theatre group 'Akanksha'—*Thali Ka Baingan*—at the IPTA Mumbai National Drama Festival. A report by Indore Studio.नाटक को तकनीकी व संगीतमय रूप से प्रभावी बनाने वाली बैकस्टेज टीम में गीत संयोजन अनुज अरोड़ा, गीत रिकॉर्डिंग सुनील गौड़ (गौड़ स्टूडियो, जोधपुर), वेशभूषा कैलाश गहलोत एवं डॉ. नीतू परिहार, रूप सज्जा (मेकअप) अंतिमा व्यास व कैलाश गहलोत, मंच व्यवस्था प्रवीण शर्मा और माया, ध्वनि प्रभाव रौनक गहलोत, मंच आलोकन (प्रकाश व्यवस्था) मोहम्मद शफी तथा प्रस्तुति नियंत्रण प्रवीण कुमार झा द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया
A presentation by Jodhpur-based theatre group 'Akanksha'—*Thali Ka Baingan*—at the IPTA Mumbai National Drama Festival. A report by Indore Studio. आपको बता दें कि Indian People’s Theatre Association (इप्टा) का नेशनल ड्रामा फेस्टिवल इस बार 20 से 27 मई तक आयोजित हुआ। इसमें पंजाब, दिल्ली, जोधपुर, लखनऊ, पटना, ओडिशा, तमिलनाडु, इंदौर, नासिक आदि ने अपने नाटकों का प्रदर्शन किया। इसमें अलग-अलग भारतीय भाषाओं—पंजाबी, उर्दू, उड़िया, तमिल, हिंदुस्तानी, मराठी के नाटक प्रस्तुत किये गये। IPTA FOUNDERS POSTER. indorestudio.com इप्टा इकाइयों की साझा करीब एक दर्जन प्रस्तुतियों ने हमारे समय के सामाजिक-राजनीतिक प्रश्नों को मंच पर रखा। लैंगिक न्याय, मज़दूर अधिकार, सांप्रदायिक सद्भाव, पर्यावरण संकट, वैज्ञानिक सोच और लोकतांत्रिक मूल्यों जैसे विषय इस बार की प्रस्तुतियों के केंद्र में रहीं। नाटकों के साथ पटकथा लेखन और निर्देशन पर कार्यशालाएँ, पैनल चर्चाएँ, दर्शकों के साथ संवाद और रंगकर्मियों के लिए नेटवर्किंग सत्र भी आयोजित किए गये। कैफ़ी और मैं का विशेष मंचन भी आकर्षण का केंद्र रहा।IPTA, MUMBAI. इप्टा की स्थापना 1943 में औपनिवेशिक भारत के कठिन दौर—युद्ध, अकाल और स्वतंत्रता आंदोलन—के बीच हुई थी। इसका उद्देश्य था “जनता का रंगमंच, जनता के लिए” यानी कला को सामाजिक चेतना और जनसंवाद का माध्यम बनाना। इसकी स्थापना और विकास में P. C. Joshi, Khwaja Ahmad Abbas, Ali Sardar Jafri, Balraj Sahni, Shambhu Mitra, Habib Tanvir और बाद में Kaifi Azmi, Bhisham Sahni जैसे अनेक साहित्यकारों-रंगकर्मियों की बड़ी भूमिका रही।late Shri Jitendra Raghuvanshi, IPTA MUMBAI. 1943 से देखें तो इप्टा को अब लगभग 83 वर्ष हो चुके हैं, और आज भी यह जनपक्षधर रंगमंच की सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक परंपराओं में गिनी जाती है। इस बार का महोत्सव इप्टा के वरिष्ठ नेता Jitendra Raghuvanshi की स्मृति को समर्पित रहा। आगे पढ़िये – तमस:इतिहास, इंसानियत और साज़िश https://indorestudio.com/tamas-play-review-nsd-repertory-bhisham-sahni/

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