डॉ.विवेक गावड़े, इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। इंदौर के बेहतरीन हारमोनियम वादक,लाजवाब तबला नवाज़ और वरिष्ठ पत्रकार अरविंद अग्निहोत्री का गुरूवार को निधन हो गया। वे 57 वर्ष के थे। उनका पिछले कुछ दिनों से इंदौर के टी चोइथराम अस्पताल में उपचार चल रहा था। उनके निधन की ख़बर मिलते ही शहर के कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई। अरविंद शास्त्रीय संगीत के साथ ही अभिनव कला समाज में भी वर्षों से महति भूमिका निभा रहे थे।
वकालत का पेश रास नहीं आया : अरविंद अग्निहोत्री ने यूं तो क़ानून की डिग्री हासिल की थी। मगर वकालत का पेशा उन्हें कभी रास नहीं आया। बचपन से ही वे संगीत की दुनिया में रचे-बसे थे। उनके पिता बापूराव अग्निहोत्री खुद इंदौर के नामी हारमोनियम वादक रहे। उनके घर पर आये दिन भजनों के कार्यक्रम होते रहते थे। उनका हारमोनियम सुनने के लिए लोग दूर-दूर से आते थे। उनकी संगत में अरविंद अग्निहोत्री ने अपनी संगीत शिक्षा शुरू की। कमाल की बात यह है कि अरविंद जितने पारंगत हारमोनियम वादन में थे,तबले पर भी उनकी उतनी ही अच्छी पकड़ थी। उनके हुनर पर सुनने वाले दाद दिये बिना नहीं रहते थे।मुंबई के शौनक अभिषेकी के साथ उन्होंने कई यादगार कार्यक्रम किये। इन कार्यक्रमों में वे कभी हारमोनियम पर तो कभी तबले पर संगत करते। ख्यात मराठी गायक राहुल देशपांडे के साथ भी उन्होंने महफिलें की। अरविंद अग्निहोत्री ने तबले में मेरिट के साथ बी म्यूज़ किया था। इतना ही नहीं वे सारंगी भी बहुत अच्छी बजा लेते थे। सारंगी की तालीम भी उन्होंने अपने पिता से ही ली थी।
जुड़ी हैं बहुत सी यादें : शास्त्रीय गायक पंडित सुनील मसूरकर कहते है कि उनके साथ बहुत सी यादें जुड़ी हैं। वे बताते हैं कि अरविंद अग्निहोत्री ने मेरे साथ इंदौर शहर में अनेक कार्यक्रमों में हारमोनियम पर और तबले पर संगत की। इंदौर के बाहर भी कई संगीत जलसों में साथ गए। पंडित मसूरकर ने कहा, अरविंद अग्निहोत्री का स्वभाव बिल्कुल नारियल जैसा था। वो बाहर से बहुत सख्त दिखते थे लेकिन दिल से बहुत ही नरम स्वभाव के थे। जो ठीक नहीं लगता उससे बड़ी सदाशयता के साथ इनकार कर देते थे। अरविंद स्थानीय समाचार पत्र नईदुनिया के लिए भी काफी समय तक संगीत की रिपोर्ट्स और लेख लिखते रहे। अभिनव कला समाज में प्रधानमंत्री पद पर जब जुड़े तो उन्होंने कई शहर की बहुत सी प्रतिभाओं को मंच दिया। वो कुशल प्रशासक भी रहे। उन्होंने अपनी खुद की एक संस्था ‘श्रुति संवाद’ भी काफी समय तक सक्रियता से चलाई और शहर में अनेक संगीत के कार्यक्रम श्रुति संवाद के बैनर तले हुए। उनका पुत्र रोहित अग्निहोत्री भी हारमोनियम द्वारा अनेक संगीत कार्यक्रमों में पिता और दादाजी के पदचिन्हों पर चल पड़े हैं।

उनसे बहुत कुछ सीखा : स्टेट प्रेस क्लब के अध्यक्ष और अभिनव कला समाज के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल कहते हैं कि मैने उनसे बहुत कुछ सीखा साथ ही उनकी कला और प्रतिभा ने मुझे उनका दीवाना बना दिया था। मुझे याद है कि मेरे पिता के सम्मान में मैने आदरांजलि भजन संध्या का आयोजन जब अभिनव कला समाज मे किया था तो उन्होंने पूरे कार्यक्रम के लिये अपने विचार दिए और पूरे समय सभा मे मौजूद रहकर सभी कलाकारों का हौसला बढ़ाया था। पिछले एक साल से उनकी तबियत खराब चल रही थी। इसके बावजूद वे नियम से अभिनव कला समाज में जाकर अपने दायित्व के कामों में जुटे रहते थे। इंदौर शहर के लिए अरविंद अग्निहोत्री के अवसान से जो खालीपन आया है उसे भरना बहुत मुश्किल होगा। शास्त्रीय गायिका शोभा चौधरी, स्मिता मुक़ाशी, वैशाली बकोरे,रसिका गावड़े,पूर्वी निमगावकर सहित अनेक संगीत कलाकारों ने अपनी शोक संवेदना व्यक्त की। इंदौर स्टुडियो भी अरविंद अग्निहोत्री के निधन पर अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

