Thursday, October 15, 2026
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द नर्मदा स्टोरी: एमपी पुलिस के शौर्य और मातृत्व की गाथा

सिने प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। आगामी हिंदी फीचर फिल्म ‘द नर्मदा स्टोरी’ के प्रमोशन के सिलसिले में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता रघुबीर यादव, अभिनेता शरद सिंह और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त निर्देशक ज़ैगम इमाम ने इंदौर का दौरा किया। शहर के प्रसिद्ध बड़ा बाज़ार क्षेत्र में स्थानीय व्यंजनों का लुत्फ़ उठाने के बाद, फिल्म की टीम ने मीडिया से संवाद करते हुए इस मार्मिक क्राइम ड्रामा के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।मातृत्व के संघर्ष और खाकी के समर्पण की कहानी:
मध्य प्रदेश की पृष्ठभूमि पर रची गई यह फिल्म एक आदिवासी मां के संघर्ष की सशक्त दास्तान है, जो अपनी बेटी को अपराधियों के चंगुल से बचाने के लिए हर चुनौती से टकराती है। इस जंग में महिला सब-इंस्पेक्टर नर्मदा रैकवार उसका साथ देती हैं। उल्लेखनीय है कि यह पुलिस अधिकारी का मुख्य किरदार मध्य प्रदेश की चर्चित आईपीएस अधिकारी सिमाला प्रसाद ने ही निभाया है। यह फिल्म विशेष रूप से महिला पुलिसकर्मियों के साहस, समर्पण और समाज के साथ उनके भरोसे को सलाम करती है।नर्मदापुरम के वास्तविक परिवेश में हुई शूटिंग:
निर्देशक ज़ैगम इमाम ने बताया कि कहानी को प्रामाणिक और जीवंत बनाने के लिए फिल्म की पूरी शूटिंग नर्मदापुरम और उसके आसपास के प्राकृतिक परिवेश में की गई है। इसमें नर्मदा अंचल की संस्कृति और सामाजिक परिस्थितियों को गहराई से पिरोया गया है। फिल्म में रघुबीर यादव, मुकेश तिवारी, शरद सिंह और इश्तेयाक ख़ान जैसे दिग्गज कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में नज़र आएंगे।माटी से जुड़ाव और जीवंत अभिनय का अनुभव:
वरिष्ठ अभिनेता रघुबीर यादव ने कहा कि इंदौर का अपनापन हमेशा सुकून देता है। उन्होंने शूटिंग के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश की मिट्टी और लोगों ने इस कहानी को जीवंत बना दिया है; यह महज़ एक फिल्म नहीं, बल्कि प्रदेश की संवेदनाओं का सच्चा दस्तावेज़ है। वहीं, अभिनेता शरद सिंह ने इसे अपने गृह राज्य की कहानी बताते हुए कहा कि वास्तविक परिस्थितियों के बीच अपनी धरती पर काम करने से उनके अभिनय में और अधिक गहराई आई है।
महिला सशक्तिकरण का प्रखर संदेश:
मीडिया से बातचीत का सार देते हुए निर्देशक ज़ैगम इमाम ने स्पष्ट किया कि ‘द नर्मदा स्टोरी’ केवल एक क्राइम ड्रामा नहीं है। यह न्याय, अदम्य साहस और महिला सशक्तिकरण की एक ऐसी कहानी है, जिसका उद्देश्य समाज में एक सकारात्मक और नया संवाद स्थापित करना है। आगे सुनिये – सिने संगीत के सुनहरे दौर का आख़िरी सुर भी मौन – अलविदा सुमन कल्याणपुर  https://indorestudio.com/suman-kalyanpur-obituary-hindi-cinema-tribute/

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