शकील अख़्तर,इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम: नाटक ‘तोत्तो चान’ की शानदार संगीतमयी प्रस्तुति के साथ ही दिल्ली में बच्चों के अंतरराष्ट्रीय रंगमंच उत्सव ‘जश्ने-बचपन’ का समापन हो गया। तोत्तो चान की यादगार और बेहतरीन प्रस्तुति का दर्शकों ने खड़े होकर अभिवादन किया। नाटक में सभी कलाकारों के साथ ही नन्ही कलाकार तनिष्का हत्वालने ने अपने जीवंत अभिनय से दर्शकों को अभीभूत कर दिया। यह नाटक भोपाल के विहान ड्रामा वर्क्स की प्रस्तुति है। इसका निर्देशन सौरभ अनंत ने किया है। संगीत अभिकल्पना और गीत हेमंत देवलेकर हैं। वे नाटक में हेड मास्टर की प्रमुख भूमिका भी निभाते हैं।
उत्सव में खेले गये 23 नाटक : उत्सव का ये 14 वां संस्करण था। उत्सव में दो विदेशी नाटकों के साथ देश भर के राज्यों से चुने गये कुल 23 नाटकों का मंचन हुआ। 17 नवंबर से 25 नवंबर तक चले इस उत्सव को बड़ी संख्यां में दर्शकों ने देखा। करीब 500 कलाकारों ने अपने परफॉरमेंस से दर्शकों का दिल जीता। उत्सव पर एनएसडी के डायरेक्टर इन चार्ज सुरेश शर्मा और थिएटर इन एजुकेशन के प्रमुख लतीफ खटाना ने खुशी जताई। सुरेश शर्मा ने कहा, “मैं पिछले 19 सालों से एनएसडी में हूं और निदेशक-प्रभारी के रूप में यह मेरा पहला उत्सव है। मुझे बहुत खुशी है कि उत्सव ने विभिन्न संस्कृतियों के बीच की खाई के बीच एक पुल बनाने की कोशिश की । इसमें बच्चों को न केवल अपने प्रोडक्शन के बारे में, बल्कि एक-दूसरे की संस्कृति के बारे में भी पता चला। हम इस उत्सव को नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से बाहर लाने और दिल्ली और एनसीआर के अन्य सभागारों में भी आयोजित करने की योजना पर विचार कर रहे हैं।”
जावा के संगीतमयी नाटक से हुई शुरूआत : बच्चों के लिए सर्वश्रेष्ठ रंगमंच के इस नौ-दिवसीय नाट्य उत्सव की शुरुआत जावा के एक संगीतमय नाटक- ‘सूखा पत्ता’ से हुई थी। नाटक में जीवन की विभिन्न जटिलताओं के बारे में बताया गया था। नाटकों का प्रदर्शन चार सभागारों – सम्मुख, अभिमंच, अभिकल्प और लिटिल थिएटर ग्रुप (एलटीजी) में किया गया था। उखानु (अहमदाबाद), असली पंख (जोधपुर), शी स्टुड अप (चंडीगढ़), अंधन नाई (केरल), तोत्तो चान (पटना), हा-जा-बा-रा-ला (कोलकाता) और स्मार्टफोन (असम) जैसे क्षेत्रीयनाटकों ने दर्शकों को हंसाया भी और रुलाया भी। अंतरराष्ट्रीय नाटक, सूखा पत्ता (इंडोनेशिया) और प्यूबर्टी (श्रीलंका) ने अपने शक्तिशाली चित्रण और प्रस्तुति के बल पर दर्शकों को अचंभित किया।

18 निर्देशकों को मिला अवसर : एक खास बात यह रही कि इस बार एनएसडी की थिएटर इन एजुकेशन (टीआईई कंपनी ) ने इस बार 18 नये निर्देशकों को अवसर दिया था। साथ ही हर दिन डायरेक्टर्स मीट में निर्देशकों ने भी अपने नाटकों के साथ ही रंगमंच से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे। बच्चों के रंगमंच के परिदृश्य पर चर्चा के लिये उत्सव के दौरान दो-दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें थिएटर के जानकारों ने बच्चों के रंगमंच से जुड़ी बातों पर अपने विचार दिये। उत्सव में पांच सौ से अधिक कलाकारों ने शिरकत की। इसे बच्चों के अलावा हर वर्ग समूह के दर्शकों ने देखा। तकरीबन नाटक हाऊस फुल रहे। इनकी ऑन लाइन और काउटंर पर बराबर बिक्री हुई। 17 से 25 नवंबर तक चले इस उत्सव में माइम के अलावा हिंदी,मराठी,बंगाली,असमिया,मलयाली और अंग्रेज़ी भाषा में नाटक खेले गये।
चार तरह के नाटकों का हुआ प्रदर्शन : इस बार नाटकों को चार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया था। इसमें बच्चों के प्रदर्शन,बच्चों और व्यस्क कलाकारों के प्रदर्शन,बच्चों के लिए बड़ों के प्रदर्शन और एक कठपुतली शो समाहित किया गया था। उत्सव में राजधानी दिल्ली और एनसीआर के गैर सरकारी संगठनों के जरूरतमंद बच्चों को नाटकों को देखने के लिये बुलाया गया था। उन्होंने शुभारंभ समारोह में भी शिरकत की। सुरेश शर्मा के मुताबिक, असल में जश्ने बचपन के आयोजन का मुख्य उद्देश्य थियेटर को प्रमुखता में लाना है। डिजिटल माध्यमों की वजह से आधुनिक युग में इसकी चमक फीकी पड़ी है। बच्चे इन दिनों रंगमंच से अवगत नहीं हो रहे है, क्योंकि स्कूलों में थिएटर को एक विषय के रूप में नहीं पढ़ाया जाता है। संगीत और कला की तरह, रंगमंच को भी स्कूलों में पढ़ाया जाना चाहिए क्योंकि यह न केवल भावनाओं को व्यक्त करने के सबसे आसान तरीकों में से एक है, बल्कि यह हमें अपने व्यक्तित्व को विकसित करने में सक्षम भी बनाता है। ” थियेटर-इन-एजुकेशन के चीफ अब्दुल लतीफ खटाना कहते हैं, ” कहने को जश्ने बचपन मासूमियत का एक उत्सव है, चूँकि बच्चे अपने अभिभावकों और बुजुर्गो के साथ नाटक देखने आते है, इस मायने में उत्सव सभी आयु वर्गों को एक छत के नीचे लाता है। समाज को एकीकृत करता है। बच्चों के नाटकों को देखने से पता चलता है कि नाटक बड़ों और बच्चों के बीच सुंदर सहयोग का नतीजा हैं।”

27 साल से जारी रंग टोली का सफ़र : एनएसडी की थिएटर इन एजुकेशन या संस्कार रंग टोली (टीआईई कं) की स्थापना 16 अक्टूबर, 1989 को हुई थी। इस तरह यह कंपनी अब 27 साल पूरे कर चुकी है। संसार रंग टोली बच्चों के लिये काम करने वाली देश की अकेली ऐसी कंपनी हो जो 15 हजार से अधिक बच्चों के साथ काम कर चुकी है। इसे देश भर में बच्चों के रंगमंच के विकास में योगदान करने के लिए प्रारंभ किया गया था। साल-दर-साल सफलता के बाद, अब यह भारत में बच्चों के लिए सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण रंगमंच उत्सवों में शुमार होने लगा है। टीआईई कंपनी ने अब तक देश के विभिन्न हिस्सों में 2000 से अधिक प्रस्तुतियां दी हैं।
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