रायपुर, द टेलीप्रिंटर। ‘जलसाघर’ और ‘मगध’ जैसी कालजयी काव्यकृतियों के लिए पहचाने जाने वाले कवि श्रीकांत वर्मा के गृह प्रदेश छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में उनके साहित्यिक अवदान पर एकाग्र दो दिनी संगोष्ठी 21 और 22 सितम्बर को होगी। यह कार्यक्रम रजा फाउण्डेशन एवं छत्तीसगढ़ फ़िल्म एण्ड विजुअल आर्ट सोसायटी मिलकर आयोजित कर रहे हैं।
रजा फाउण्डेशन के प्रबंध न्यासी अशोक वाजपेयी तथा छग फ़िल्म एंड विजुअल आर्ट सोसायटी के अध्यक्ष सुभाष मिश्र ने बताया कि इस आयोजन में देश के नामचीन साहित्यकार, लेखक और संपादक दो दिनों तक वैचारिक विमर्श करेंगे। 21 सितंबर को दोपहर साढ़े तीन बजे पहले सत्र ‘बुखार में कविता’ में साहित्यकार नंदकिशोर आचार्य, मदन सोनी, मंगलेश डबराल और अरूण कमल शिरकत करेंगे। दूसरे भाग में ‘घर लौटने की चाह’ विषय पर अतिथि वक्ता के रूप में आशीष त्रिपाठी, उदयन वाजपेयी और विष्णु नागर अपने विचार रखेंगे।
22 सितंबर को सुबह साढ़े दस बजे ‘तीसरा रास्ता’ में साहित्यकार विजय कुमार, संपादक ललित सुरजन और धुव शुक्ल अपनी बात रखेंगे। इसके बाद लेखक कनक तिवारी, ओम थानवी और राजेंद्र मिश्र साहित्य, समय और सत्ता को लेकर बात करेंगे।
उल्लेखनीय है कि श्रीकांत वर्मा मुक्त्तिबोध की पीढ़ी के बाद के कवियों में अन्यतम बेचैन और उत्तप्त कवि इस माने में ज़्यादा हैं कि उन्होंने अपनी कविता के जरिये न केवल अपने समय का सीधा, तीक्ष्ण और अंदर तक तिलमिला देने वाला भयावह साक्षात्कार किया बल्कि हर अमानवीय ताकत के विरूद्ध एक निर्मम और नंगी भिडंत की इसीलिए उनकी कविता में नाराजगी, असहमति और विरोध का स्वर सबसे मुखर है।

