Wednesday, April 15, 2026
Homeटॉप स्टोरीज़विक्रम नाट्य समारोह: 10 पौराणिक कथाओं के 10 रंग-प्रयोग

विक्रम नाट्य समारोह: 10 पौराणिक कथाओं के 10 रंग-प्रयोग

डॉ. जफर महमूद, इंदौर स्टूडियो। उज्जैन में 139 दिवसीय ‘विक्रमोत्सव 2026’ के अंतर्गत दस दिवसीय विक्रम नाट्य समारोह ने पहली संध्या से लेकर समापन तक भारतीय रंगमंच की विविध परंपराओं, पौराणिक कथाओं, सामाजिक विमर्श और नृत्य-नाट्य की समृद्ध परंपरा को जीवंत किया। महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ, स्वराज संस्थान संचनालय, मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस श्रृंखला में संस्कृत और हिंदी नाटकों के साथ-साथ नृत्य नाटिकाओं और संगीत प्रस्तुतियों ने दर्शकों को शास्त्रीय अभिनय, सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक भावनाओं से जोड़ा। जटायु के बलिदान से लेकर दुष्यंत-शकुंतला की प्रणयकथा, धर्मवीर भारती के अंधा युग से लेकर शिव महिमा पर आधारित आदि अनंत और समापन संध्या के सौगंधिकाहरण तक, हर प्रस्तुति ने उज्जैन की सांस्कृतिक धरती को रंग मंचीय वैभव से आलोकित किया। Play: Jatayuvadham, Vikram Theatre Festival, 'Vikramotsav 2026'. Report by indorestudio.comप्रथम संध्या – ‘जटायूवधम्’ (कुडियाट्टम शैली)
शक्तिभद्र कीआश्चर्य चूड़ामणि  पर आधारित इस प्रस्तुति में जटायु के बलिदान का मार्मिक चित्रण हुआ। निर्देशक मार्गी मधु चाक्यार, पद्मश्री मुझिक्कुलम कोच्चुकूटन चाक्यार के पुत्र, ने कुडियाट्टम की शास्त्रीय बारीकियों और भावाभिनय से दर्शकों को भाव-विभोर किया। रामायण के प्रसंग में रावण द्वारा सीता हरण और जटायु के युद्ध का दृश्य अत्यंत प्रभावशाली रहा। प्रस्तुति में परंपरा, अभिनय और मंच संयोजन का अद्भुत संगम दिखाई दिया। कलाकारों ने भाव, भंगिमा और शास्त्रीय गरिमा से वातावरण को आध्यात्मिक ऊँचाई दी।Play Charudattam, Vikram Theatre Festival, 'Vikramotsav 2026'. Report by indorestudio.comदूसरी संध्या – ‘चारुदत्तम्’ (भास रचित)
महाकवि भास द्वारा रचित इस नाटक का निर्देशन रामजी बाली ने किया। निर्धन ब्राह्मण चारुदत्त और वसंतसेना के निश्छल प्रेम की कथा ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। ऋषभ शर्मा ने चारुदत्त की भूमिका में नैतिकता और सिद्धांतों का जीवंत चित्रण किया, जबकि अदिति ने वसंतसेना के रूप में प्रेम और संवेदना को साकार किया। खलनायक शकार की भूमिका सैम सुकांत ने निभाई और सूत्रधार रवि चंद्रा ने कथा को बाँधकर रखा। नाटक ने यह संदेश दिया कि सत्य और प्रेम की विजय होती है, और चरित्र ही स्थायी सम्मान दिलाता है।Play Bharatwakaym, Vikram Theatre Festival, 'Vikramotsav 2026'. Report by indorestudio.comतीसरी संध्या – ‘भरतवाक्य’
उड़ीसा के निर्देशक हाराप्रसाद पट्टनायक द्वारा प्रस्तुत इस नाटक ने समाज और कलाकार की नैतिक जिम्मेदारी पर गहन प्रश्न उठाए। भरतवाक्य परंपरा से प्रेरित इस प्रस्तुति में रंगकर्म की आत्म-आलोचना की गई। व्यंग्यात्मक और प्रतीकात्मक शैली में यह नाटक परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन की खोज करता है। कलाकारों ने मंच पर यह विचार रखा कि आदर्श वाक्य केवल कथन न रहकर समाज में वास्तविक परिवर्तन लाएँ। प्रस्तुति ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर किया कि कला का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना भी है।Play: JatiJiwanam, Vikram Theatre Festival, 'Vikramotsav 2026'. Report by indorestudio.comचतुर्थ संध्या – ‘जाति जीवनम्’
निर्देशक चित्तरंजन सत्पथी के निर्देशन में ओडिशा के ‘द क्याज’ समूह ने इस पौराणिक कथा पर आधारित एकांकी नाटक प्रस्तुत किया। ऋषि जरत्कारु के विवाह-संकल्प और नागजाति की रक्षा का प्रसंग करुणा और आत्मबलिदान का संदेश देता है। कलाकारों ने जातिगत भेदभाव, वंश-रक्षा और नैतिक दायित्वों को गहनता से मंचित किया। नाग यज्ञ और वासुकि की भगिनी का आत्मोत्सर्ग दर्शकों को भावुक कर गया। अभिनय की सजीवता और वैचारिक गहराई ने नाटक को प्रभावी बनाया। Play: Abhigyan Shakuntalam, Vikram Theatre Festival, 'Vikramotsav 2026'. Report by indorestudio.comPlay: Abhigyan Shakuntalam, Vikram Theatre Festival, 'Vikramotsav 2026'. Report by indorestudio.comपंचम संध्या – ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ (कालिदास रचित)
निर्देशक अर्पिता धागत के निर्देशन में प्रस्तुत इस विश्वविख्यात नाटक ने राजा दुष्यंत और शकुंतला की प्रेमकथा को जीवंत किया। हिंदी अनुवाद मोहन राकेश द्वारा किया गया था। मंच पर विश्मय कुमार, विकास रावत, पुष्पराज सिंह बघेल ने दुष्यंत की भूमिका निभाई, जबकि नूपुर पांडे, शुभांशी शर्मा, रवीना मिंज, यशवानी गौंड, प्रिया गोस्वामी ने शकुंतला को साकार किया। विदूषक की भूमिका में गुरिंदर कुमार ने कसावट भरी। अन्य पात्रों में महिमा अग्रवाल (अनुसूया), शुभांशी शर्मा (प्रियंवदा), शुभांगी ओखड़े (गौतमी), देववर्ष अहिरवार (नट), दीपेंद्र सिंह लोधी (ऋषि दुर्वासा, शारद्वत) और पुष्पराज सिंह बघेल (शारंगरव) ने प्रभावी अभिनय किया।Play Based on: Chaturbharni, Vikram Theatre Festival, 'Vikramotsav 2026'. Report by indorestudio.comछठी संध्या – चतुर्भाणी पर आधारित 
गुप्तकालीन संस्कृत साहित्य के चार प्रसिद्ध एकांकी चतुर्भाणी  पर आधारित इस प्रस्तुति का निर्देशन जबलपुर के राजकुमार कामले ने किया। ‘उभयाभिसारिका’ और ‘पद्यप्राभृतकम’ के प्रसंगों में प्रेम, हास्य और नगर जीवन की विसंगतियों का व्यंग्यात्मक चित्रण हुआ। विक्की तिवारी (शश द्वितीय), सिद्धार्थ श्रीवास्तव (शश प्रथम), तरुण सिंह ठाकुर (कर्णीपुत्र), अश्वनी यादव (दत्तकलशी), आयुष्यमान शर्मा (विपुलामात्य), साहिल ठाकुर (पवित्रक/कवि) और सत्यम प्रजापति (भावजरदगव/दर्दरक) ने सजीव अभिनय किया। राधा बर्मन (देवसेना) और पलक तिवारी (सखी) ने प्रभाव छोड़ा। कथक नृत्य में मुक्ति मिश्रा और हंसिका मिश्रा तथा लोकनृत्य में राधा, पलक, मुक्ति, हंसिका और विशाल विश्वकर्मा ने सहभागिता की। मंचन से पूर्व निर्देशक का सम्मान विश्वविद्यालय और समाजसेवी संस्थाओं द्वारा किया गया।Play: Andha Yug, Vikram Theatre Festival, 'Vikramotsav 2026'. Report by indorestudio.comPlay: Andha Yug, Vikram Theatre Festival, 'Vikramotsav 2026'. Report by indorestudio.comसप्तम संध्या – धर्मवीर भारती का अंधा युग
हिंदी साहित्य के कालजयी गीति नाट्य अंधायुग  का निर्देशन मैस्नाम जॉय मीतेइ (नई दिल्ली) ने किया। महाभारत के युद्ध के बाद की विभीषिका और नैतिक पतन को केंद्र में रखकर धृतराष्ट्र, गांधारी और अश्वत्थामा की मानसिक अवस्थाओं को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया गया। जॉय मीतेइ (धृतराष्ट्र), साजेदा (गांधारी), मिशाल सिंह हजारिका (अश्वत्थामा), आशीष कुमार (दुर्योधन/दुष्शासन), मधुसूदन (भीम), राहिल अब्बास (कृष्ण/कृपाचार्य), हरेराम यादव (विदुर/कृतवर्मा) और सौरभ कुमार (संजय) ने प्रभावी अभिनय किया। अन्य भूमिकाओं में मुकुंद कपिल, गौतम, विराज देविदास नाइक, वैभव दीक्षित, नूपुर भट्ट और विभूति बहल ने योगदान दिया। नाटक ने यह चेतावनी दी कि नैतिक पतन से पूरा युग अंधकारमय हो उठता है।Play: Bhumi Surya Veergatha, Vikram Theatre Festival, 'Vikramotsav 2026'. Report by indorestudio.comPlay: Bhumi Surya Veergatha, Vikram Theatre Festival, 'Vikramotsav 2026'. Report by indorestudio.comअष्टम संध्या – भूमि सूर्य वीरगाथा (नृत्य नाटिका)
नृत्य निर्देशक कुलेश्वर कुमार ठाकुर के निर्देशन में याज्ञना परफॉर्मिंग आर्ट्स (नई दिल्ली) के कलाकारों ने इस नृत्य नाटिका को प्रस्तुत किया। मयूर भंज छाऊ नृत्य शैली में गुरु-शिष्य परंपरा और 18वीं सदी के राज्य की कथा को मंचित किया गया। शेर पकड़ने और उत्सव मनाने के प्रसंगों को नृत्य भंगिमाओं से जीवंत किया गया। 15 नर्तकों में कुलेश्वर, महेश, सुमित मंडल, प्रशांत, कालिया आयुषी, अंकित, प्रभाकर, जय सिंह, अर्जुनदेव मलिक, मोहित, अर्चना, सोमली, समृद्धि आदि ने अपनी साधना का परिचय दिया। प्रकाश संचालन अतुल मिश्रा और संगीत निर्देशन माया धार ने किया। आभूषणों से सज्जा नीलू कुमारी ने की। यह प्रस्तुति पहले इंडिया गेट, नेपाल और जांबिया में प्रदर्शित हो चुकी है।Play: Adi Anant, Vikram Theatre Festival, 'Vikramotsav 2026'. Report by indorestudio.comनवमी संध्या – आदि अनंत (शिव महिमा नृत्य नाटिका)
प्रख्यात नृत्य निर्देशक संगीता शर्मा के निर्देशन में अन्वेषणा सोसाइटी फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स (नई दिल्ली) ने शिव महिमा पर आधारित आदि अनंत प्रस्तुत किया। शिव के योगी और नर्तक दोनों रूपों को नृत्य भंगिमाओं से साकार किया गया। कलाकारों ने शिव सृजन, संहार और संरक्षण के तीन रूपों को मंच पर जीवंत किया। अभिनव मलिक (शिव), पुण्या नायर (शक्ति), शुभाशीष डे (अर्जुन), समग्रिता चंदा (गंगा) और प्रिंसेस पाणिग्रह (गंगा प्रवाह) ने प्रभावी अभिनय किया। राक्षसों की भूमिका तुषार यादव और आशीष कुमार ने निभाई। प्रकाश संचालन अतुल मिश्रा और संगीत संयोजन सैन डेजीवेश सिंह ने किया। प्रस्तुति ने शिव की सर्वव्यापिता और एकता का संदेश दिया।Plays: Sauganghikaharan, Vikram Theatre Festival, 'Vikramotsav 2026'. Report by indorestudio.comसमापन संध्या – अभंग नाद और सौगंधिकाहरण
समारोह का समाहार कर्नाटक संगीतज्ञ मनोहर के निर्देशन में अभंग नाद की प्रस्तुति से हुआ। तबला, मृदंगम, घटम, ढोलक, वायलिन और बांसुरी जैसे वाद्यों के संगम से महाराष्ट्र की अभंग परंपरा को मंचित किया गया। भगवान विठ्ठल की स्तुति में रचित अभंगों ने सभागार को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। दूसरी प्रस्तुति में नाट्य निर्देशक पियाल भट्टाचार्य ने सौगंधिकाहरण का मंचन किया। महाभारत के वनपर्व पर आधारित इस नाटक में द्रौपदी की इच्छा पर भीम का सौगंधिक फूल लाने का प्रसंग और गंधमादन पर्वत पर हनुमान से भेंट का दृश्य प्रस्तुत हुआ। कलाकारों ने भीम और हनुमान के संवाद को जीवंत कर दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। Abhang Naad, Vikram Theatre Festival, 'Vikramotsav 2026'. Report by indorestudio.comसंस्कृति, साहित्य और कला का जीवंत दस्तावेज़:
दस संध्याओं की इस श्रृंखला ने स्पष्ट किया कि विक्रम नाट्य समारोह केवल मनोरंजन का मंच नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, साहित्य और कला का जीवंत दस्तावेज है। शास्त्रीय नाट्य परंपरा, सामाजिक चेतना, नृत्य अनुशासन और भक्ति रस का अद्भुत संगम दर्शकों को भावनात्मक और वैचारिक ऊँचाइयों तक ले गया। हर प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि रंगमंच केवल कथा या अभिनय नहीं, बल्कि समाज, परंपरा और आध्यात्मिकता का प्रतिबिंब है। उज्जैन की इस सांस्कृतिक यात्रा ने दर्शकों को परंपरा और प्रयोग के बीच संतुलन का अनुभव कराया और विक्रमोत्सव को एक अविस्मरणीय सांस्कृतिक उत्सव के रूप में स्थापित किया। आगे पढ़िये – विक्रमोत्सव 2026 का शुभारंभ https://indorestudio.com/vikramotsav-2026-ujjain-inauguration/

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

जावेद अहमद शाह ख़ान "अल-हिंदी" on रंगमंच की नई उड़ान…सौम्या व्यास