विनोद कुमार शुक्ल को दी साहित्य अकादेमी ने श्रद्धांजलि

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साहित्य प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। प्रख्यात उपन्यासकार, कवि और साहित्य अकादेमी के महत्तर सदस्य विनोद कुमार शुक्ल का 23 दिसम्बर 2025 को निधन हो गया। उनके सम्मान में साहित्य अकादेमी कार्यालय में शोक सभा आयोजित कर दो मिनट का मौन रखा गया। सचिव पल्लवी प्रशांत होळकर ने श्रद्धांजलि संदेश पाठ किया और दिल्ली सहित सभी क्षेत्रीय कार्यालयों में आधे दिन का अवकाश घोषित किया। सरल भाषा, गहन संवेदना और जादुई यथार्थवाद से परिपूर्ण उनकी रचनाएँ सामान्य जीवन, अकेलेपन और उम्मीद को अद्भुत सहजता से प्रस्तुत करती हैं। उनके प्रमुख उपन्यासों में नौकर की कमीज, दीवार में एक खिड़की रहती थी, खिलेगा तो देखेंगे और हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी और बौना पहाड़ शामिल हैं। कहानी संग्रहों में पेड़ पर कमरा और घोड़ा और अन्य कहानियाँ तथा कविता-संग्रहों में लगभग जयहिंद, सब कुछ होना बचा रहेगा और कभी के बाद अभी विशेष रूप से चर्चित रहे।‘नौकर की कमीज’ पर फिल्मकार मणि कौल ने इसी नाम से एक यादगार कला फिल्म भी बनाई थी। विनोद कुमार शुक्ल को साहित्य अकादेमी पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया गया। उनका निधन भारतीय साहित्य जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। आगे पढ़िये – अपने क्रियेशन के वक्त कहीं गुम हो जाते थे अरुण – मीना पांडेय https://indorestudio.com/vivechna-arun-pandey-creation-meena-pandey/

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