Sunday, September 6, 2026
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विनोद कुमार शुक्ल की स्मृति में 1 लाख रु. के पुरस्कार की घोषणा

विशेष प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। हिंदी के अप्रतिम कवि और गद्यकार श्री विनोद कुमार शुक्ल की स्मृति में उनके जन्म दिवस प्रतिवर्ष एक लाख रुपये पुरस्कार की घोषणा की गई है। यह पुरस्कार साहित्य केंद्रित कृति के लिये होगा। ‘आज की जन धारा’ के प्रधान संपादक सुभाष मिश्र ने इस अख़बार के भोपाल में नये संस्करण के शुभारंभ के अवसर पर यह घोषणा की। बता दें कि श्री सुभाष मिश्र पत्रकारिता के साथ ही साहित्य और कला के क्षेत्र में अपनी रचनात्मक और सहयोगी गतिविधियों को निरंतर बढ़ावा देते रहे हैं। उन्होंने हाल ही में ‘मुक्तिबोध राष्ट्रीय नाट्य समारोह’ का आयोजन किया है।  उम्मीद जगाने वाली महत्वपूर्ण घोषणा: इस घोषणा के बाद कार्यक्रम के विशेष अतिथि चुनाव आयुक्त श्री मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि यह एक बहुत महत्वपूर्ण घोषणा है और इससे अखबार की प्रतिबद्धता और संकल्प बड़ी उम्मीद जगाते हैं। श्री हरिओम जटिया ने कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण बात है कि ‘आज की जन धारा’ सिर्फ सूचनाओं और खबरों पर निर्भर नहीं है बल्कि साहित्य के बारे में भी बहुत गंभीरता से सोचती है। उसके लिए इतनी बड़ी राशि के पुरस्कार की घोषणा की है – उनका अभिनंदन।साहित्य और संस्कृति के प्रति प्रतिबद्धता: कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा – ‘यह अख़बार से पृथक और विशेष इसलिए प्रतीत हो रहा है कि इस अख़बार की प्रतिबद्धता समाचार और खबरों के अलावा साहित्य और संस्कृति के प्रति भी है। ‘आज की जन धारा’ ने जो पुरस्कार की घोषणा की है, वह इस अर्थ में महत्वपूर्ण है कि इससे एक अखबार का सामाजिक दायित्व और सांस्कृतिक आस्था भी प्रकट होती है। उनकी यह घोषणा साहित्य और संस्कृति के प्रति एक बड़ी पहल है।प्रचलित धारा से अलग जन धारा: कार्यक्रम के विशेष अतिथि श्री लाजपत आहूजा ने कहा कि ‘आज की जन धारा’ प्रचलित धारा से पृथक प्रवाहित होने में अपनी विशिष्टता प्रमाणित करती रही है। इस पुरस्कार की घोषणा ने मेरे इस भरोसे को और मजबूत किया है। दिल्ली से आए ‘आज की जन धारा’ के सलाहकार संपादक और विशेष अतिथि भाल चंद्र जोशी ने कहा कि एक समाचार पत्र का काम सच को साहस के साथ लिखने के अतिरिक्त हमारे समय के सांस्कृतिक, सामाजिक और साहित्यिक घटनाओं और विभूतियों की सक्रियता पर निरंतर नजर रखने का भी है। निश्चित रूप से यह पुरस्कार हिंदी साहित्य की पुरस्कारों की भीड़ में इसलिए विशिष्ट और पृथक रहेगा कि इसकी तटस्थता सिर्फ साहित्य और प्रतिभा केंद्रित रहेगी। यह तटस्थता यदि कायम रही तो निश्चित रूप से यह पुरस्कार हिंदी साहित्य के पुरस्कारों में बहुत आदर के साथ याद किया जाएगा। साहित्यिक परंपरा को जीवित रखने का प्रयास: पुरस्कार की घोषणा के साथ ही प्रधान संपादक श्री सुभाष मिश्र ने कहा – ‘यह पुरस्कार एक विनम्र श्रद्धांजलि होने के साथ-साथ उस साहित्यिक परंपरा को जीवित रखने का प्रयास है, जो बाज़ार, तात्कालिक और शोर से परे मनुष्य के भीतर के सत्य को खोजती है। यह पहल स्पष्ट करती है कि ‘आज की जन धारा’ केवल समाचारों का संकलन नहीं, बल्कि विचार, विवेक और रचनात्मकता का मंच है। साहित्य के प्रति यह प्रतिबद्धता अखबार की आत्मा का हिस्सा है, जहाँ शब्द केवल सूचना नहीं, बल्कि समय का साक्ष्य और संवेदना का दायित्व भी हैं।  आगे पढ़िये – विनोद कुमार शुक्ल को दी साहित्य अकादेमी ने दी श्रद्धांजलि https://indorestudio.com/vinod-kumar-shukla-shok-samachar/

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