कला प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। मनीष जोशी, केहर सिंह ठाकुर, सुदेश शर्मा, मुश्ताक काक, डॉ. देशराज मीणा, दिनेश अहलावत, महेश नारायण और गोपाल शर्मा। उत्तर भारत के आठ राज्यों से चयनित ये वो 8 रंग विभूतियाँ हैं जिन्हें रोहतक में विश्व रंगमंच दिवस पर ‘बेस्ट थियेटर प्रमोटर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया जायेगा। सभी को 11-11 हज़ार रूपये का चेक, बेस्ट थिएटर प्रमोटर का प्रशस्ति पत्र और अंग वस्त्र भेंट किया जायेगा।
समर्पित रंगकर्म और सहयोग: हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ परफॉरमिंग आर्ट्स रोहतक के चेयरमैन, वैशव दीपक त्रिखा ने उनसे हुई चर्चा में यह बात कही। उन्होंने कहा -‘उत्तर भारत के आठ राज्यों से चयनित ये ऐसे व्यक्तित्व हैं जो समर्पित रूप से नाट्यकर्म में जुटे हैं साथ ही रंगकर्म को बढ़ावा देने की ज़िम्मेदारी भी बख़ूबी निभा रहे हैं। आज हमें ऐसे ही संवेदनशील साथियों की ज़रूरत हैं। ऐसे व्यक्तित्व,जो दूसरे कलाकर्मियों को भी सहयोग और समर्थन दे सकें’। उन्होंने बताया यह कार्यक्रम, रोहतक के सेक्टर 36 में मौजूद जेपी इंटरनेशनल स्कूल में होगा। कार्यक्रम में बतौर अतिथि हरियाणा की आर्ट एंड कल्चरल अफेयर ऑफिसर सुश्री तान्या चौहान, यूथ वेलफेयर के डायरेक्टर जगबीर राठी और फिल्म निर्माता और निर्देशक मुकेश दहिया शामिल होंगे। (हरियाणा इंस्टीट्यूट के नि:शुल्क मंच पर नाटक का मंचन।)
हर साल दे रहे प्रमोटर अवॉर्ड: श्री त्रिखा ने कहा- ‘हम प्रतिवर्ष यह पुरस्कार’ देवेंद्र त्रिखा बेस्ट थियेटर प्रमोटर अवॉर्ड’ के नाम से दे रहे हैं। यह ऐसे रंगकर्मी,रंगप्रेमी या रंग-संवर्धक को दिया जाता है जिसने रंगकर्म के कामों को विभिन्न स्तरों आगे बढ़ाने, सहयोग देने अथवा प्रोत्साहित करने में अपनी विशिष्ट भूमिका निभाई हो। हमारी चयन समिति ने जो प्रस्ताव दिये उसके अनुसार, इस वर्ष हमने हरियाणा से अभिषेक देशवाल, दिल्ली से दिनेश अहलावत, हिमाचल प्रदेश से केहर सिंह ठाकुर, जम्मू एंड कश्मीर से मुश्ताक काक, राजस्थान से देशराज मीणा, पंजाब से गोपाल शर्मा और उत्तराखंड से महेश नारायण को सम्मान के चुना है’। (हरियाणा इंस्टीट्यूट के नि:शुल्क मंच पर नाटक प्रस्तुति का एक दृश्य।)
हरियाणा इंस्टीट्यूट की कोशिशें भी जारी: एक और सवाल के जवाब में श्री त्रिखा ने कहा – ‘हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ परफॉरमिंग आर्ट्स भी अपने स्तर पर रंगकर्म को प्रोत्साहित करने का काम कर रहा है। उदाहरण के लिये, हम प्रत्येक रविवार को नाट्य दलों को उनके नाटक के मंचन के लिये नि:शुल्क हॉल उपलब्ध कराते हैं। उनके अतिथियों से जुड़ी सुविधाओं का खर्च भी वहन करते हैं। श्री त्रिखा ने कहा – ‘मैं समझता हूँ बिना आर्थिक सहायता या मदद के आज शौकिया रंगकर्म बहुत मुश्किल है। इसके लिये हमें प्रमोटर्स या रंगकर्म को अपने स्तर पर प्रोत्साहित करने वाले लोगों की बहुत ज़रूरत है। हम अपने स्तर पर ये काम तो कर ही रहे हैं। इस काम को आगे बढ़ाने वाले रंगकर्म या अन्य क्षेत्रों के साथियों को भी इस अवार्ड के माध्यम से चिन्हित कर रहे हैं। (‘अलवर रंगम्’ के कल्पनाकार डॉ.मीणा अलवर में ऑडिटोरियम के बाहर एक कलाकार दल के साथ।।)
अलवर रंगम् से रंगकर्म को बढ़ावा: आपको बता दें, सम्मानित की जा रहीं रंगकर्म की सभी हस्तियां अपने राज्यों में ही नहीं देश के कला जगत में पहचान रखती हैं। सभी कला क्षेत्र के विशिष्ट नाम हैं, जो नाटकों में अभिनय,निर्देशन,रंग समूहों व इससे जुड़े मंचों से जुड़े हैं। इनमें डॉ.देशराज मीणा तो रंगकर्मी की ऐसी शख़्सियत हैं जिन्होंने अलवर रंगम जैसे आयोजन से 75 दिनों के नाट्य उत्सव का एक नया रेकॉर्ड ही बना दिया है। इस आयोजन के ज़रिये वे अपने अथक प्रयासों से बनाये ऑडिटोरियम में बीते 75 दिनों से देश-विदेश के नाटकों का आयोजन करने में सफल रहे हैं। आगे पढ़िये –
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