शकील अख़्तर,इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। महाराष्ट्र में पांच दिवसीय उर्दू नाट्य उत्सव इस बार नागपुर में 25 से 30 सितंबर के बीच होगा। यह बात किरदार अकादमी, मुंबई के प्रमुख और उर्दू नाटकों के लेखक और निर्देशक इक़बाल नियाज़ी ने कही। उन्होंने बताया कि इस नाट्य उत्सव में पूरे महाराष्ट्र से एंट्रीज़ आती है। इस बार कोई 45 नाटकों के होने की संभावना है। ज़्यादातर नाटक एक अंकीय होते हैं। मगर आयोजन के दौरान कुछ फुल लेंथ नाटक और दूसरी कला गतिविधियों को भी शामिल किए जाने की कोशिश होगी।

नियाज़ी ने इंदौर स्टुडियो से चर्चा करते हुए बताया,यह देश का पहला ऐसा आयोजन है, जिसमें इतनी बड़ी संख्या में उर्दू नाटक खेले जाते हैं। इस आयोजन की यही शर्त भी है कि भले ही नाट्य समूह मराठी हों हिंदी या गुजराती हों लेकिन उनका मंचन उर्दू में होना चाहिये। अच्छी बात ये है कि ग़ैर उर्दू भाषी समूह भी इसमें सआदत हसन मंटो, इस्मत चुग़ताई, कृष्णचंद्र जैसे लेखकों की कहानियों पर नाटक पेश करते हैं। इस उत्सव का समन्वयन हमारा किरदार नाट्य अकादमी करता है। पांच दिन चलने वाले इस उत्सव में हर दिन 7-8 नाटकों के मंचन होते हैं।

करीब 38 साल से उर्दू नाटकों के लिये किरदार अकामदी के ज़रिये काम कर रहे नियाजी ने बताया, पहले इस आयोजन की ज़िम्मेदारी खुद किरदार अकादमी ही अपने बलबूते करता था। तब इसका स्वरूप राष्ट्रीय स्तर का था और हमारे आयोजन में भोपाल,लखनऊ,दिल्ली या महाराष्ट्र के नाटक भी शामिल होते थे। हम उनके रहने, भोजन और मंचन का पूरा प्रबंध करते थे। इसके लिये हम स्थानीय संस्थाओं, साहित्य अकामदी और उर्दू साहित्य के प्रति लगाव रखने वाले कुछ शख्सियतों से मदद लेते थे। चार साल हमने यह काम किया लेकिन पिछले पांच साल से यही काम हम अब उर्दू साहित्य अकामदी के साथ कर रहे हैं। इस भागीदारी का फर्क भी पड़ा है। पहले इस उत्सव में हम मुश्किल से 10-15 नाटकों का प्रबंध कर पाते थे लेकिन महाराष्ट्र उर्दू अकादमी की वजह से यह संख्या बढ़कर 45 नाटकों तक पहुंच गई है। एक सवाल के जवाब में उर्दू ड्रामा के इस दिग्गज ने एक अहम बात कही। उन्होंने बताया कि इस बार महाराष्ट्र उर्दू अकादमी ने यह तय किया है कि इस उत्सव में खेले गए बेहतरीन नाटकों का प्रकाशन उर्दू और हिंदी दोनों में किया जायेगा। हम कोशिश कर रहे हैं कि बीते 5 सालों में से श्रेष्ठ 100 नाटकों का चयन किया जाए और फिर उनका एक संकलन प्रकाशित हो। इसपर अभी काम चल रहा है। इसलिये हम हर नाटक की वीडियोग्राफी भी करते रहे हैं।

किरदार अकादमी के ज़रिये उर्दू अदब और ड्रामा के लिए ग़ालिब अवार्ड और दिल्ली साहित्य कला अकादमी समेत दर्जनों पुरस्कारों से नवाज़े गए नियाज़ी के मुताबिक, मुंबई में हमारी संस्था चार दशकों से लगातार मंच पर सक्रिय है। अकादमी के ड्रामा ग्रुप के ज़रिये हम छोटे बड़े नाटकों के करीब 200 प्रॉडक्शन्स कर चुके हैं। जबकि इन 200 प्रॉडक्शन्स के हम 6 हज़ार से ज़्यादा रिकॉर्ड शोज़ कर चुके हैं। इनमें उर्दू ही नहीं हमने हिंदी और मराठी नाटक भी किये हैं। हम अपने शोज़ दिल्ली,लखनऊ,हैदराबाद जैसे शहरों से लेकर सिंगापुर तक कर चुके हैं। ‘और कितने जालियांवाला बाग, ‘ये किसका लहू है, कौन मरा ?’ जैसे नाटकों के हमने बड़ी संख्या में शोज़ किए हैं। कोल्हू का बैल, गोदो के इंतज़ार में, तीन खामोश औरतें,शाह आलम कैम्प की रूहें जैसे कई संस्था के प्रमुख नाटक रहे हैं।
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