शकील अख़्तर, इंदौर स्टूडियो। ‘सतीश शाह एक ज़िंदादिल, हँसमुख और एक बेहतरीन कलाकार थे। एक ऐसी शख़्सियत जो काम के प्रति हमेशा समर्पित रहे। उनके साथ मेरी भी कुछ यादें जुड़ी हुई हैं। वे हमेशा याद आयेंगे’। बॉलीवुड के फिल्म एडिटर, लेखक और प्रोड्यूसर सुनील सालगिया ने यह बात कही। सतीश शाह के निधन के बाद उनसे हुई चर्चा में वे सबके चहेते इस अभिनेता को याद कर रहे थे।
शालीन अभिनय से हास्य को नई ऊँचाई: सिनेमा और टीवी में अपने शालीन अभिनय से हास्य को एक अलग स्तर और ऊँचाई देने वाले सतीश शाह का 25 अक्टूबर 2025 को निधन हो गया। मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे। हाल ही में उनका किडनी ट्रांस प्लांट भी हुआ था। उन्हें बांद्रा स्थित घर पर बेहोशी की हालत में पाया गया था। हास्य अभिनेता असरानी के निधन के बाद सतीश शाह का जाना, फिल्म इंडस्ट्री के लिये दूसरा बड़ा झटका है। सतीश शाह के निधन पर पीएम मोदी सहित कई कलाकारों ने श्रद्धांजलि दी है।
मंजुल सिन्हा जी के दोस्त थे सतीश: सुनील सालगिया ने कहा- ‘सतीश शाह के साथ सीरियल ‘पी.ए. साब’ में काम करने का मौका मिला। उन्होंने मेरे साथ ही ‘देख भाई देख’ का एक एपिसोड भी किया। मेरे द्वारा निर्देशित एक विज्ञापन फिल्म में भी उन्होंने काम किया’। सतीश जी मंजुल सिन्हा जी के दोस्त थे। मंजुल जी ने ही ‘ये जो है जिंदगी’ सीरियल में सतीश जी को पहला काम दिया था। मैं मंजुल जी का सहायक था, इसलिए उनसे कई बार मंजुल जी के घर मुलाक़ात हो जाती थी। उम्र में वे हमसे बड़े थे लेकिन मंजुल जी के यहां सभी एक-दूसरे को नाम से संबोधित करते थे- हम भी उन्हें सतीश ही कह कर बुलाते थे’।
डीडी के सीरियल ‘पी.ए.साब’ की याद: श्री सालगिया को सतीश शाह के साथ गुज़रा एक किस्सा भी याद आया। उन्होंने बताया- ‘पी.ए.साब’ सीरियल दूरदर्शन पर बड़ा प्रसिद्ध हुआ था। इसमें मैं मुख्यमंत्री की भूमिका में था और सतीश मेरे पी.ए. थे। हम दोनों के बीच हर एपिसोड में दो या तीन सीन होते थे। मुझे शुद्ध हिंदी में धाराप्रवाह लंबे डायलॉग बोलने होते थे। रिहर्सल में किसी कठिन शब्द पर मैं अटक गया। टेक से पहले सतीश ने मज़ाक किया-‘ये अटकेगा’, डायलॉग बोलते वक्त जैसे ही उस शब्द के करीब पहुंचे सतीश ने कुछ मुंह बनाकर मुझे मानो इशारा दिया कि तू अटकेगा, हुआ वही, मैं उस शब्द पर तो नहीं अटका लेकिन अगले में अटक गया। सैट पर सभी की हंसी छूट गई। मैं जैसे ही अगला टेक देने लगा- सतीश ने फिर कोई हरकत की, मैं फिर अटका। हम दोनों की हंसी छूट गई। दो तीन टेक के बाद मंजुल का पारा गर्म हुआ, उन्होंने दोनों को हड़काया। फिर जाकर टेक हुआ। बाद में हम जब भी मिलते, इस किस्से को याद करते’।
विज्ञापन फिल्म के समोसे वाली याद: सुनील सालगिया ने कहा-‘मेरी एक विज्ञापन फिल्म में उन्हें समोसा खाना था, मैं निर्देशक था, मुझे शॉट ठीक नहीं लगा। दुबारा लिया, उन्हें फिर समोसा खाना पड़ा। टेक्निकल गड़बड़ी में जैसे ही तीसरे टेक के लिए मैंने कहा तो सतीश बोले, बेटा उस दिन का बदला ले रहा है तू। हम फिर हंसे। उनके साथ थोड़ा समय बिताया, मगर जो भी बिताया हमेशा हंसते रहे। उस विज्ञापन के वक्त की एक तस्वीर मुझे मिल गई है। इसमें मेरे साथ मेरे साथी मिस्टर पाठक भी हैं। सच में, सतीश जी ने हमेशा सबको हंसाया ही है। वो बहुत याद आयेंगे, एक बेहतरीन कलाकार और हंसमुख व्यक्तित्व’।
प्यारे इंसान, प्यारे दोस्त और प्यारे सह-कलाकार: ‘ये जो है ज़िदंगी और पी.ए. साब’ जैसे धारावाहिकों में सुशील जौहरी को भी उनके साथ काम करने का मौका मिला। सुशील ने भी उन्हें याद करते हुए कहा – ‘सतीश जी बहुत प्यारे इंसान, प्यारे दोस्त और प्यारे सह-कलाकार थे। उनके साथ काम की बहुत सी बातें याद आती हैं’। उन्होंने बताया – ‘एक बार पी.ए. साब में जब शूट खतम हुआ, सतीश जी मुझसे कहने लगे- ‘यार सुशील तू बहुत बदमाश एक्टर है। रिहर्सल में कुछ और करता है और टेक में कुछ और मैं उसकी तैयारी करके बैठता हूँ और तू कुछ और कर डालता है’! मैंने उनसे कहा- ‘मैं ट्रेन्ड एक्टर नहीं हूँ। मैं उस समय जो जैसा महसूस होता है, वैसा कर देता हूँ। चूँकि डिज़ाइन्ड एक्टर नहीं हूं, इसलिये ये होता है। उन्होंने बडे प्रेम से जवाब दिया- ‘नहीं नहीं कोई बात नहीं, सुशील तू बड़ा ही प्यारा एक्टर है’।..इस तरह एक अच्छे कलाकार और अच्छे इंसान के रूप में उनका दोस्ताना साथ मुझे मिला।
भीषण गर्मी में कमीज़ें उतारकर रिहर्सल: एक और सीन याद आया…। सतीश जी मेरे साथ उस सीन में थे। मंजुल सिन्हा जी डायरेक्ट कर रहे थे। सीन लंबा था, गर्मी बहुत ज़्यादा थी, उसकी रिहर्सल हम लोग कर रहे थे। चूँकि लाइटें भी लगी रहती है, इसलिये गर्मी और भी महसूस हो रही थी। गर्मी से घबराकर हम लोगों ने अपनी कमीज़ें उतार दीं और रिर्हसल करने लगे। रिहर्सल अच्छी हुई। मंजुल जी ख़ुश हुए। कहने लगे-‘कम आन टेक इट’। इसके बाद हम सीधे सैट पर पहुँच गये, शॉट एक टेक में ही हो गया। अब मंजुल जी वही सीन मॉनिटर पर देखने लगे, वो मुझे और सतीश जी को देखकर एकदम से बोले- ‘अरे सुशील बनियान में क्यों दिख रहे हैं..यार सतीश ये क्या करते हो…’। तब मैंने मंजुल जी से कहा-‘ हम समझे आप रिहर्सल सैट पर देखना चाहते हैं, हमें नहीं पता था कि आप सीधे टेक ले लेंगे’। बाद में मैं और सतीश इस बात को लेकर चर्चा करते रहे। ऐसी बहुत सी यादें हैं, जो हमेशा याद आयेंगी। इस बेहद अच्छे इंसान और एक वर्सटाइल एक्टर को मेरी श्रद्धाजंलि।

250 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया: सतीश शाह ने 250 से अधिक फिल्मों और दर्जनों टीवी धारावाहिकों में काम किया। मैं हूं ना, ओम शांति ओम, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, ऑल द बेस्ट, श्रीमान श्रीमती जैसी फिल्मों में उनकी मौजूदगी दर्शकों को गुदगुदाती रही। ‘जाने भी दो यारो’ में उनका व्यंग्यपूर्ण अभिनय और ‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ में उनकी भूमिका ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। उनकी विशेषता थी साफ-सुथरा, बुद्धिमत्तापूर्ण हास्य, जो कभी अश्लीलता की सीमा नहीं लांघता था।
गुजरात में जन्म हुआ, मुंबई-पुणे में शिक्षा: सतीश शाह का जन्म मांडवी, गुजरात में 25 जून 1951 को हुआ था। उन्होंने जेवियर्स कॉलेज से स्नातक और पुणे के फिल्म संस्थान से अभिनय की शिक्षा ली थी। पत्नी मधु शाह से उनकी मुलाकात एक फिल्म समारोह में हुई थी। दोनों ने प्रेम-विवाह किया था। कुछ ख़बरों में पत्नी मधु शाह के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई गई है। उनकी कोई संतान नहीं है। आगे पढ़िये – चला गया अंग्रेज़ों के ज़माने का जेलर https://indorestudio.com/chala-gaya-angrezo-ke-zamane-ka-jailor/









