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सिने प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। ‘दुनिया एक रंगमंच है। हम अपने जीवन में कई तरह की भूमिकाएं निभाते हैं। अभिनय जीवन की भूमिकाओं और भावनाओं का मनोरंजन है’। यह बात ख्यात अभिनेता पकंज त्रिपाठी ने कही। पकंज त्रिपाठी 54 वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI 2023) में एक्टिंग की मास्टर क्लास को संबोधित कर रहे थे। (मास्टर क्लास में पकंज त्रिपाठी का सम्मान करते हुए एनएफडीसी के प्रबंधन निदेशक पृथुल कुमार।)
कैसे बने एक कुशल अभिनेता: पकंज त्रिपाठी ने कहा- ‘एक कुशल अभिनेता बनने के लिए इंसान को सहानुभूति रखने वाला होना चाहिए। उन्होंने कहा, जब आप खुद को किसी और की जगह पर रखकर देखते हैं। उसके विचारों, भावनाओं और नज़रिये को समझते हैं, तब आप बेहतर इंसान बनते हैं। असल में इस प्रक्रिया कि ज़रिये, आप दूसरों के जीवन के अच्छे और बुरे पहलुओं को समझते हैं। उस पर विचार करते हैं। इस तरह खुद को बेहतर बनाने के लिए सीखते हैं’।
शरीर और दिमाग़ का तालमेल ज़रूरी: सबके चहेते अभिनेता ने कहा, ‘स्वाभाविक अभिनय के लिए शरीर और दिमाग़ में तालमेल का होना बहुत ज़रूरी है। दोनों का लचीलापन और खुलापन भी महत्वपूर्ण है। स्क्रीन पर भावनाओं का मनोरंजन तभी हो सकता है जब आप किरदार की काल्पनिक स्थिति को दिमाग में बिठाएं। ऐसा करने के लिए खुद को तैयार करना पड़ता है’। एक स्टार और एक अभिनेता के बीच फर्क को समझाते हुए पकंज त्रिपाठी ने कहा -‘एक अभिनेता हमेशा अपनी भूमिका के साथ, प्रयोग करने के मौके खोजता है। स्टार ये नहीं करता। प्रयोग अभिनय को ज़िंदा रखता है’।
संघर्ष से लड़कर ही आगे बढ़ सका: पकंज ने इंडस्ट्री में अपने शुरूआती दिनों की भी बात की। उन्होंने कहा- ‘मैंने अपने संघर्षों को स्वीकार किया, उससे उबरने के लिये शिद्दत से संघर्ष करता रहा। जुनून और उम्मीद का साथ कभी नहीं छोड़ा। समय-समय पर आत्म मूल्यांकन भी करता रहा’। गोवा में फिल्म महोत्सव की इस मास्टर क्लास को कोलकाता के सत्यजीत रे फिल्म और टेलीविजन संस्थान के सहयोग आयोजित किया गया। मास्टर क्लास का संचालन फिल्म समीक्षक और पत्रकार मयंक शेखर ने किया।
अपनी जड़ों को भूलना नहीं चाहिये: मयंक शेखर ने पकंज त्रिपाठी की विनम्रता की प्रशंसा की। उन्होंने जब ये कहा कि इतनी प्रसिद्धि के बावजूद पकंज की विनयशीलता तारीफ़ के क़ाबिल बात है। इस पर लोकप्रिय अभिनेता ने जवाब दिया -‘अहंकार तभी आता है, जब कोई अपनी जड़ों को भूल जाता है’। पकंज ने कहा -‘पंद्रह साल पहले मुझे कोई नहीं जानता था और 15 साल बाद शायद मुझे कोई याद भी नहीं करेगा’। उन्होंने कहा, ‘जीवन तभी सार्थक होता है जब प्रसिद्धि और धन का सार्थक और अच्छे मकसद के लिए इस्तेमाल किया जाए’। स्त्रोत:पीआईबी। आगे पढ़िये –
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