कला प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। वरिष्ठ रंगकर्मी एवं नाटककार आलोक शुक्ला के चौथे नाट्य संग्रह ‘पतझड़ के फूल और देखोना’ का शनिवार, 19 सितंबर को नई दिल्ली स्थित श्री राम सेंटर के सामने ‘संजना बुक्स’ के स्टॉल पर लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर प्रताप सहगल, राजेश कुमार, सुमन कुमार और प्रकाशिका संजना तिवारी सहित कई साहित्य और रंगमंच की दिग्गज हस्तियां मौजूद रहीं।
कार्यक्रम में प्रताप सहगल ने गंभीर बीमारी के बावजूद आलोक शुक्ला के निरंतर सृजन की सराहना की। वहीं, रंग समीक्षक राजेश कुमार ने ‘पतझड़ के फूल’ की विशेषता बताते हुए कहा कि यह नाटक निर्देशकों को अपने अनुसार दो अलग-अलग अंत चुनने की अनूठी आज़ादी देता है। उन्होंने ‘देखोना’ को कोरोना काल के सामाजिक परिवेश का एक महत्वपूर्ण भविष्य का दस्तावेज़ भी करार दिया, जिसकी तुलना मोहन राकेश के नाटकों के महत्व से की गई।
संगीत नाटक अकादमी के उप सचिव सुमन कुमार ने नए नाटकों के अभाव की धारणा को खारिज करते हुए रंगकर्मियों से इन्हें मंच पर लाने का आह्वान किया। अंत में, आलोक शुक्ला ने सभी अतिथियों और रंगकर्मियों का आभार व्यक्त किया। आगे पढ़िये – ‘इप्टा’ के 53 वें ड्रामा मुकाबले में चमके युवा https://indorestudio.com/iptas-53rd-drama-competition/
कार्यक्रम में प्रताप सहगल ने गंभीर बीमारी के बावजूद आलोक शुक्ला के निरंतर सृजन की सराहना की। वहीं, रंग समीक्षक राजेश कुमार ने ‘पतझड़ के फूल’ की विशेषता बताते हुए कहा कि यह नाटक निर्देशकों को अपने अनुसार दो अलग-अलग अंत चुनने की अनूठी आज़ादी देता है। उन्होंने ‘देखोना’ को कोरोना काल के सामाजिक परिवेश का एक महत्वपूर्ण भविष्य का दस्तावेज़ भी करार दिया, जिसकी तुलना मोहन राकेश के नाटकों के महत्व से की गई।
संगीत नाटक अकादमी के उप सचिव सुमन कुमार ने नए नाटकों के अभाव की धारणा को खारिज करते हुए रंगकर्मियों से इन्हें मंच पर लाने का आह्वान किया। अंत में, आलोक शुक्ला ने सभी अतिथियों और रंगकर्मियों का आभार व्यक्त किया। आगे पढ़िये – ‘इप्टा’ के 53 वें ड्रामा मुकाबले में चमके युवा https://indorestudio.com/iptas-53rd-drama-competition/

