Wednesday, April 15, 2026
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‘अगिन तिरिया’ की प्रयोगवादी प्रस्तुति में दिखा कितना दम ?

 सुभाष चंद्र अरोरा,इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। परिवर्तन समूह की ओर से ग्वालियर में नाटक ‘अगिन तिरिया’ का मंचन किया गया। नाटक के लेखक रविंद्र भारती हैं इसका निर्देशन अयाज खान ने किया। ग्वालियर सिटी सेंटर स्थित शिवाजी पार्क में खेले गया यह नाटक अपनी प्रस्तुति और प्रयोग की दृष्टि से सफल रहा। यहां यह बताना ज़रूरी है कि नाटक के निर्देशक अयाज़ खान श्रीराम सेंटर और एनएसडी रेपटरी से जुड़े रहे ऐसे वरिष्ठ अभिनेता हैं जिन्होंने रंगमंच के अपने लंबे अनुभव और प्रशिक्षण का लाभ शहर के कलाकारों को देने का संकल्प लिया है। यही वजह है कि वे 2007 से परिवर्तन समूह के माध्यम से नाट्य प्रयोग करते रहे हैं। शहर को नई रंग दिशा देने की कोशिशों में जुटे हैं।

अन्याय के विरूद्द प्रेम का रूप है प्रकृति: नाटक बताता है कि वनदेवी हमें प्रकृति प्रेम करना सिखाती है लेकिन जिनके पास शक्तियां हैं,वह उसपर अपना अधिकार जमाना चाहते हैं। जबकि कमज़ोर लोगों को दास की तरह समझा जाता है। ऐसे में संघर्ष स्वाभाविक है। नाटक में दिखाया गया कि संन्यासी,पुरोहित खुद को धर्म, ज्ञान और प्रकाश सत्ता के स्वामी समझते हैं। वनवासी, आदिवासी, जनजातियों को अपना दास मानते हैं। इसी वर्ग के लोग विद्रोह करके पवित्र अग्नि को पाना चाहते हैं।

कठिन नाटक को कलाकारों ने किया सार्थक : नाटक बहुत संस्कृतनिष्ठ था। इसलिये नाटक के संवाद दर्शकों को समझ में कम आ सके। नाटक के मंचन से पहले यदि इसकी विषय वस्तु पर थोड़ा सा प्रकाश डाला जाता तब शायद दर्शकों के लिए बेहतर होता। तब नाटक और भी ग्राह्य बनता। हालांकि नाटक प्रयोग की दृष्टि से एक अच्छा प्रयास था । कलाकारों के अभिनय में उनका परिश्रम झलका। ऐसे क्लिष्ट संवाद याद करना कलाकारों के लिये कठिन रहा होगा। कलाकारों के सशक्त अभिनय पक्ष के साथ ही सैट और प्रकाश व्यवस्था भी आर्कषक थी।

रंगमंच की नई हलचल,नई आशा : ग्वालियर में इस तरह के नये प्रयोग और पिछले कुछ समय से लगातार रंगमंच की हलचल ने एक नया माहौल बना दिया है। आशा की जाना चाहिए रंगमंच की संस्थाएं यहां पर ज्यादा प्रासंगिक और ऐसे नाटकों की ओर ध्यान भी केंद्रित करेंगी जो आज के दौर के लिए ज़रूरी हैं। ताकि नाटक की उपादेयता भी बनी रहे। वह केवल एक प्रयोग या मंचन बनकर ना रह जाये।

नाटक में मंच और मंच परे कलाकार : इस नाटक के निमार्ण और मंचन में ग्वालियर के करीब 30 कलाकारों ने अपने मिलजुकर अपनी कला का प्रदर्शन किया। सभी ने बड़ी मेहनत से इस नाटक को दर्शकों तक बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने में अपनी सराहनीय भूमिका अदा की। नाटक में अयाज़ खान के साथ ही अरूण काटे, अमनजीत,शिंवाशी नामदेव,अभिलाषा सिंह,गीताजंलि गिरीवाल,स्मिता सिंह, राघवेंद्र सिंह कौरव,जॉर्डन,शैलेंद्र,मुकुल श्रीवारतन,अभय पांडे,शुभम शुक्ला,लखन सोलंकी,जितांक गुर्जर, सनी गवरकर,अज़हर खान,आशीष मिश्रा,शिवा शर्मा ने अभिनय किया। बैक स्टेज पर सदाशिव प्रधान, रूपेष भीम्टा,सनी गवरकर,रूपेश बाली,अरूण काटे,अमनजीत,गीताजंलि,अफ़शा ख़ान, अभिलाषा,लखन सोलंकी,राघवेंद्र सिंह कौरव,मुकुल,अभय,आशीष,जॉर्डन,शुभम,मनीष कुमार,प्रतीक विचारे,मनु गुप्ता,उमेश कुशवाह,का न्ता,मनीष दुबे,रवि कैलाश, चंदू गर्ग,जितांक गुर्जर, अमनजीत और रवींद्र भारती जैसे कलाकार साथियों की अपने-अपने विभाग में विशिष्ट भूमिका रही।

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