इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। ग्वालियर रंगमंच की पहचान बन चुके अनिल शर्मा की कोरोना की वजह से 14 अप्रैल की सुबह अकस्मात निधन हो गया। कोरोना की वजह से उनका करीब एक हफ्ते से इलाज चल रहा था। वे एक बेहतरीन अभिनेता होने के साथ ही एक अच्छे निर्देशक और प्रखर वक्ता भी थे। अनिल शर्मा एक हफ़्ते पहले तक दोस्तों को जन्म दिन की बधाई दे रहे थे। अचानक कोरोना की चपेट में आते ही वे काल के गाल में समा गये।
अनिल के रंगमंच का सफ़र नाटक ‘कालचक्र’ से शुरू हुआ था। उन्होंने छात्र जीवन में ही रंगमंच की राह पकड़ ली थी। एमएलबी कॉलेज में नाटक ‘कालचक्र’ का निर्देशन किया और अभिनय भी किया। इस नाटक में हमारे चक्रपाणि मिश्रा और कमल माखीजानी ने सूत्रधार/प्रहरी की भूमिका की थी। सूत्रधार बने चक्रपाणि के स्वर में एक संवाद था। ” सुनो कालचक्र..तुम चलाओ अपना कालचक्र.. तेज़..और तेज़..और इतना तेज़ कि कोई मानव बचने न पाये…! और कोरोना का कालचक्र अनिल शर्मा को ले गया। कॉलेज के बाद अनिल एमपीईबी में मुलाज़िम हो गए लेकिन रंगमंच उनका पहला प्रेम बना रहा। बाद में सरकारी नौकरी छोड़ दी और रंगमंच के लिये जीवन होम कर दिया। चार दशक से ज्यादा के रंगकर्म में एक से एक शानदार नाटकों का निर्देशन किया और अदभुत अभिनय भी। कोमल गांधार, कथा राम की, ओवरकोट ,प्रजा ही रहने दो,गारे की दीवार,फन्दी, नारायणपुर, बीमार, ताजमहल का टेंडर, एक और द्रोणाचार्य, रक्तबीज, जिन लाहौर नहीं वेख्या, एक था गधा उर्फ अलादाद खां , गुड बाय स्वामी,कथा कंस की जैसे विख्यात नाटक उनके निर्देशन की फेहरिस्त में शामिल हैं। अनिल ने न जाने कितने कलाकार अपने हाथों से गढ़े हैं। कला वीथिका,नाट्य मंदिर,गालव सभागार की दरो-दीवार गवाह हैं कि अनिल शर्मा सर्दी,गर्मी,आंधी पानी की परवाह किये बग़ैर नाटकों के अभ्यास के लिये दिन रात जुटे रहते थे। फरवरी-मार्च तक वे दो बड़ी वेबसीरीज में अपने हिस्से की शूटिंग में व्यस्त थे।’नाइट क्लास’ सीरीज़ में ग्वालियर की ही सुविख्यात अभिनेत्री वसुंधरा व्यास और गीतांजलि गिरवाल भी उनके साथ अभिनय कर रहीं थीं। मगर दुनिया के रंगमंच पर उनके अभिनय पर अब परदा गिर चुका है।

