Saturday, September 12, 2026
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पीयूष मिश्रा,मालिनी अवस्थी और कविता सेठ को मानद सम्मान

संतोष गुप्ता, इंदौर स्टूडियो। मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी ने अपने दीक्षांत समारोह में प्रख्यात अभिनेता पीयूष मिश्रा, पार्श्व गायिका कविता सेठ, लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी को डॉक्ट्रेट की  मानद उपाधि से सम्मानित किया है। भोपाल के कुशाभाऊ कन्वेंशन सेंटर में कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें बतौर मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल शामिल हुए। कार्यक्रम में मेडिकल अंकोलॉजिस्ट पद्मश्री डॉ. सुरेश एच अडवानी, जादूगर आनंद के नाम से मशहूर आनंद अवस्थी, जीवा आर्युवेद के डॉ.प्रताप चौहान, ड्रोन लैब टेक्नॉलॉजी के एमडी निखिल सेठिया और युवा कवि अक्षर को भी मानद उपाधि प्रदान की गई। माता-पिता का भी खयाल रखें: राज्यपाल मंगू भाई ने अपने सम्बोधन में शिक्षा और संस्कारों के महत्व की बात कही। उन्होंने कहा, ऐसी ख़बरों को पढ़ने से मन व्यथित हो जाता है, जिनमें बेटे या बेटियां अपने माता-पिता को घर से निकाल देते हैं या घर में ही बंधक बना लेते हैं। डिग्री लेते वक्त यह शपथ भी लेना चाहिये कि वृद्धावस्था में हम अपने माता-पिता की देख-रेख का दायित्व निभाएंगे। साथ ही में ऐसी शिक्षा दिये जाने की भी ज़रूरत है कि बच्चे परिवार से जुड़कर रहें।
मेरा सभी ने विरोध किया था: डॉक्टरेट इन फिलॉसफ़ी उपाधि से सम्मानित अभिनेता पीयूष मिश्रा ने कहा, मैंने जब एक्टर बनने के बारे में सोचा था, तब सभी ने इसका विरोध किया था। मेरे टीचर्स के साथ मेरे पैरेंट्स ने भी। यह 1975 की बात है। उस समय फिल्म ‘शोले’ रिलीज़ हुई थी। उन दिनों ग्वालियर के कॉन्वेंट स्कूल में मेरा नाटक हुआ था। बाद में मैंने प्रण किया कि मैं एनएसडी में एडमिशन लूँगा और ऐसा ही हुआ। वहीं मुझे प्रशिक्षण मिला, अभिनय की शुरूआत हुई। बता दें पीयूष मिश्रा न केवल एक उत्कृष्ट अभिनेता हैं बल्कि वे एक अच्छे लेखक,गायक और संगीतकार भी हैं।अपने जीवन का रास्ता ख़ुद चुने: लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने उपाधि दिये जाने पर कहा, डॉक्ट्रेट मिलने पर मैं सबसे पहले अपने गुरूजनों का धन्यवाद करती हूँ। उन्होंने कहा, मेरे पिता एक डॉक्टर थे और मैंने नहीं सोचा था कि मेरा जीवन संगीत कला से जुड़ जाएगा। मैं यहाँ मौजूद स्टुडेंट्स से यही कहूँगी कि आप अपने जीवन का रास्ता ख़ुद तय करें, आपको इसपर ख़ुद ही आगे चलना है।
दिल की आवाज़ को सुने: कविता सेठ ने इस नज़रिये से अपनी बात में कहा, हमें अपने अंदर की आवाज़ को सुनना है। आख़िर हमारा दिल क्या चाहता है। कई बार हम इस आवाज़ को खोज नहीं पाते हैं। उन्होंने कहा, अपने माता-पिता और गुरूजनों का हमेशा आदर करें और जिस रास्ते पर चले, उसकी मंज़िल तक पहुँचने के लिये पूरी लगन और मेहनत से काम करें।  आगे पढ़िये – 

हर परफॉरमेंस में साथ होती है मेरी गुरू माँ!

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