Saturday, October 24, 2026
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बच्चों के बीच भगवान राम, ट्रैफ़िक पुलिस, पपेट आर्टिस्ट और चित्रकार

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इंदौर के सारदा रामकृष्ण विद्या मंदिर के ‘हल्ला-गुल्ला’ बाल नाट्य शिविर में बच्चों ने इस बार रंगमंच के साथ ही चित्रकला और कठपुतली कला के बारे में भी सीखा। बच्चों ने भगवान राम, गौतम बुद्ध और स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़े गुणों के बारे में जाना। उन्होंने यह भी सीखा कि वे अपने पापा-मम्मी को सेफ़ ड्राइविंग के बारे में कैसे बताएं? कैसे ट्रैफ़िक पुलिस की तरह अपने परिवार के लिये ‘सेफ्टी एम्बसडर’ बन जाएं!Fifty-one children are participating in the 'Halla-Gulla' Children's Theater Camp. A report by Shakeel Akhter. IndoreStudio.com इस ड्रामा शिविर का समापन 16 मई को शाम साढ़े चार से बजे होगा। इसमें शिविर के सभी इक्यावन बच्चे, पॉकेट थियेटर, नाटिकाएं, कविता और गीत-संगीत की प्रस्तुतियां देंगे। इस कार्यक्रम में अतिथि के रूप में प्रवराजिका अमित प्राणा, ‘सूत्रधार’ के श्री सत्यनारायण व्यास और जाने-माने लेखक, कवि और फिल्मकार संदीप श्रोत्रिय भी मौजूद रहेंगे। Tapan Mukherjee with children at the 'Halla-Gulla' Children's Theatre Workshop. Report by Shakeel Akhter. IndoreStudio.comइस शिविर में और कौन-कौन सी गतिविधियां हुईं, कौन से गुरू इस शिविर में बच्चों के बीच आये? इस स्टोरी के बारे में हमें पूरी जानकारी दे रहे हैं शकील अख़्तर। वे ‘हल्ला-गुल्ला’ आयोजन समिति के साथी भी हैं। उन्होंने बताया -‘ बच्चों की प्रतिभा निखारने का यह नाट्य शिविर दो मई को वरिष्ठ रंगकर्मी तपन मुखर्जी के नेतृत्व में शुरू हुआ था। इसका संयोजन स्कूल की उप-प्राचार्य सीमा व्यास ने किया। स्कूल में ही बच्चों के लिये हर तरह की सुविधाओं का प्रबंधन हुआ।Theatre Director Varun Joshi with children at the 'Halla-Gulla' Children's Theatre Camp. Report by Shakeel Akhter. IndoreStudio.com बच्चों को रंगकर्म के बुनियादी प्रशिक्षण का ज़िम्मा युवा रंगकर्मी वरूण जोशी के साथ ही श्वेता शर्मा और शिल्पा सिंघल ने संभाला। इसमें डॉ. परशुराम तिवारी प्रबंधन और प्रवीण जोशी का प्रसार-प्रचार में सहयोग रहा। शिविर का शुभारंभ संस्था ‘सानंद न्यास’ के अध्यक्ष जयंत भिसे और प्रवराजिका अमित प्राणा जी की मौजूदगी में हुआ। Puppet Show at the 'Halla-Gulla' Children's Theatre Camp. Report by Shakeel Akhter. IndoreStudio.com15 दिनों में बच्चों ने न सिर्फ रंगमंच का बुनियादी प्रशिक्षण लिया, बल्कि चित्रकला और कठपुतली कला के गुर भी सीखे। हर दिन सुबह आठ से बारह बजे तक यह शिविर चला। इसमें बच्चों ने बड़े ही उत्साह के साथ हिस्सा लिया। शिविर के दौरान बच्चों ने पर्यावरण पर केंद्रित नाटक ‘एक दिन एक वन’ की रिहर्सल की। राष्ट्रीय कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की प्रसिद्ध कविता ‘झांसी की रानी’ का पंडवानी शैली में मंचन सीखा। इसका संगीत तपन मुखर्जी ने तैयार किया है। इसके अलावा बच्चों ने गीत-संगीत के साथ पॉकेट थियेटर की कुछ प्रस्तुतियां भी तैयार की। शिविर के दौरान कई नामी विशेषज्ञों ने बच्चों के बीच आकर उनसे अपने विचार साझा किए। इनमें यातायात प्रबंधन विशेषज्ञ राजकुमार जैन, सुधीर पोद्दार, वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण जोशी और विवेक अस्थाना, वरिष्ठ रंगकर्मी श्रीराम जोग, कला शिक्षिका अनुपमा दुमाने, शुभा स्वामी और स्कूल की प्राचार्या प्रवराजिका मेधात्म प्राणा शामिल रहीं। आइए जानते हैं इन विशेषज्ञों ने बच्चों को क्या खास बातें सिखाईं: Rajkumar Jain provided information on traffic rules at the 'Halla-Gulla' Children's Theater Camp. Report by Shakeel Akhter. IndoreStudio.comRajkumar Jain provided information on traffic rules at the 'Halla-Gulla' Children's Theater Camp. Report by Shakeel Akhter. IndoreStudio.comयातायात विशेषज्ञ राजकुमार जैन ने बच्चों को बेहद मज़ेदार और सरल तरीके से सड़क सुरक्षा के नियम समझाए। बातों-बातों में मासूम बच्चों ने बताया कि उनके माता-पिता भी कई बार हेलमेट या सीट बेल्ट नहीं लगाते और तेज़ गाड़ी चलाने पर उन्हें डर लगता है। इस पर श्री जैन ने बच्चों को प्रेरित किया कि वे अपने घरों में Safety Ambassadors बनें और नियम तोड़ने पर अपने पापा-मम्मी को प्यार से टोकें।At the 'Halla-Gulla' Children's Theatre Camp, Mr. Potdar taught the children the art of puppetry. A report by Shakeel Akhter. IndoreStudio.comशिविर में कठपुतली के जाने-माने कलाकार सुधीर पोतदार भी बच्चों के बीच पहुँचे। उन्होंने बच्चों को कठपुतली का रोमांचक खेल दिखाया। कठपुतली की कला को देखकर बच्चे खुशी से खिल उठे। श्री पोतदार ने कठपुतली के माध्यम से बच्चों को गणेश वंदना भी सिखाई। एक कहानी सुनाई। उन्होंने कुछ बच्चों को कठपुतलियों के हाथ से चलाने का तरीका भी सिखाया। बच्चों को कठपुतली नचाने में बड़ा मज़ा भी आया।At the 'Halla-Gulla' Children's Theatre Camp, Praveen Joshi explained the importance of newspapers to the children. A report by Shakeel Akhter. IndoreStudio.comवरिष्ठ पत्रकार प्रवीण जोशी ने बच्चों को अखबारों का इतिहास बताया। उन्होंने जानकारी दी कि दुनिया का पहला अखबार 1605 में जर्मनी में छपा था, जबकि भारत में 1780 में ‘बंगाल गजट’ से इसकी शुरुआत हुई थी। उन्होंने बच्चों को रोज़ अखबार पढ़ने की आदत डालने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि अख़बार के पढ़ने से नई-नई बातों की जानकारी मिलती रहती है, सामान्य ज्ञान बढ़ता है, भाषा अच्छी होती है, रोज़ नये-नये शब्द सीखने को मिलते हैं।Art teacher Anupama Dumane taught painting to children at the 'Halla-Gulla' Children's Theater Camp. Report by Shakeel Akhter. IndoreStudio.comArt teacher Anupama Dumane taught painting to children at the 'Halla-Gulla' Children's Theater Camp. Report by Shakeel Akhter. IndoreStudio.comकला शिक्षिका अनुपमा दुमाने ने बच्चों के सामने रंग और ब्रश के तालमेल से एक खूबसूरत पेंटिंग बनाकर दिखाई। उनकी ‘मदर्स डे’ पर मां और बच्चे वाली तस्वीर मे बच्चों को भावुक कर दिया। इस पेंटिंग गुरू ने बच्चों से कहा कि कला केवल चित्र बनाना या भावनाओं को व्यक्त करना भर नहीं है, बल्कि इससे हमारा क्रियेटिविटी बढ़ती है, ख़ुद पर विश्वास बढ़ता है। अनुपमा दिल्ली पब्लिक स्कूल की फैकल्टी हैं। इस युवा चित्रकार ने बच्चों को बहुत ख़ास रया भी दी। उन्होंने कहा- ‘जीवन को सुंदर और सार्थक बनाने का माध्यम कला है’। At the 'Halla-Gulla' Children's Theater Camp, journalist Vivek Asthana apprised the children of the sixteen virtues of Lord Rama. A report by Shakeel Akhter. IndoreStudio.comपत्रकार विवेक अष्ठाना ने बच्चों को भगवान श्रीराम के उन 16 विशेष गुणों के बारे में बताया, जिन्होंने उन्हें ‘राम’ से मर्यादा पुरषोत्तम ‘भगवान राम’ बना दिया। उन्होंने बताया कि श्रीराम हमेशा शांत रहते थे, वे विनम्र और आज्ञाकारी थे। उन्होंने छोटी-सी गिलहरी को भी अपना दोस्त बनाया। वे सबको लेकर चलते थे, एक अच्छे संगठन कर्ता थे। अन्याय के खिलाफ़ वे अंतिम समय तक संघर्ष करते थे। उनके चरित्र से जुड़े गुणों से हम एक आदर्श जीवन सीख सकते हैं।At the 'Halla-Gulla' Children's Theatre Camp, Pravrajika Medhatmaprana inspired the children to cultivate their talents. A report by Shakeel Akhter. IndoreStudio.comसारदा रामकृष्ण विद्या मंदिर की प्राचार्या प्रवराजिका मेधात्म प्राणा ने एक बीज का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह बीज को पेड़ बनने के लिए समय पर हवा, धूप और पानी की ज़रूरत होती है। उसी तरह हमारे बचपन का समय भी होता है। यह वह समय है जब हमें अपनी प्रतिभा के बीच की ताक़त को पहचानना ज़रूरी है। आलस्य को छोड़कर, पक्के इरादे के साथ अपनी प्रतिभा को निखारना है। At the 'Halla-Gulla' Children's Theatre Camp, Pravrajika Medhatmaprana inspired the children to cultivate their talents. A report by Shakeel Akhter. IndoreStudio.comउन्होंने स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुए कहा – ‘ आप जो भी काम करें, वह पूरे ध्यान और निष्ठा से करें। जीवन भर एक अच्छे विद्यार्थी की तरह सीखते रहें। नकल करने की जगह ख़ुद अपने हुनर की ख़ूबी को आगे बढ़ाने की कोशिश करें। आप सभी ज़रूर सफल होंगे।At the 'Halla-Gulla' Children's Theatre Camp, Shubha Swami imparted teachings related to the life of Gautam Buddha to the children. A report by Shakeel Akhter. IndoreStudio.com शिक्षिका शुभा स्वानी ने बच्चों को गौतम बुद्ध की कथाएं और प्रेरक प्रसंगों को लेकर शिक्षा दी। उन्होंने कहा- ‘अपना प्रकाश ख़ुद बनें, अहिंसा के मार्ग पर चलें और समाज में प्रेम और शांति फैलाएं’। उन्होंने बच्चों को इच्छाओं का दास न बनने और स्वयं पर नियंत्रण रखने की सीख दी। At the 'Halla-Gulla' Children's Theatre Camp, Shubha Swami imparted teachings related to the life of Gautam Buddha to the children. A report by Shakeel Akhtar. IndoreStudio.comउन्होंने गौतम बुद्ध के जीवन के बारे में जानकारी दी। शुभा जी ने बताया कि कैसे राजघराने में जन्मे राजकुमार सिद्धार्थ का मन बीमारी, बुढ़ापा और मृत्यु को देखकर दुखी हुआ। उन्होंने संन्यास ले लिया और बोधगया में एक पीपल के पेड़ के नीचे तपस्या कर परम ज्ञान की हासिल किया। इसके बाद दुनिया उन्हें ‘गौतम बुद्ध’ के नाम से जानने लगी। अपना बाकी जीवन उन्होंने मानवता को दु:ख से मुक्ति का मार्ग दिखाने, करुणा और मध्यम मार्ग का उपदेश देने में समर्पित कर दिया।At the 'Halla-Gulla' camp, veteran actor Shriram Jog shared the "Guru Mantra" of acting. Seen alongside him in the photograph is Tapan Mukherjee. A report by Shakeel Akhter. IndoreStudio.comथियेटर एक्टर श्रीराम जोग ने बच्चों को थियेटर अभिनय का मूल मंत्र दिया। उन्होंने बताया कि सच्चा कलाकार वही है जो अपने किरदार में पूरी तरह डूब जाए। एक बेहतरीन अभिनेता बनने के लिए सिर्फ अच्छे डायलॉग बोलना ही काफी नहीं है, बल्कि आंखों और शरीर के हाव-भाव भी बहुत जरूरी हैं। At the 'Halla-Gulla' camp, veteran actor Shriram Jog shared the "Guru Mantra" of acting. Seen alongside him in the photograph is Tapan Mukherjee. A report by Shakeel Akhter. IndoreStudio.comउन्होंने बच्चों को अपनी इंद्रियां खुली रखने, ध्यान से चीज़ों को देखने और मौन रहकर सीखने की कला विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने बताया, एक एक्टर की आवाज़ भी दमदार होना चाहिये, रियाज़ के साथ अपने किरदार के संवाद आपको बढ़िया तरीके से बोलते आना चाहिये। हल्ला-गुल्ला कार्यक्रम का निमंत्रण पत्र। आप को एक बार फिर ध्यान दिला दें, बच्चों के नाट्य शिविर समापन का यह कार्यक्रम आज इंदौर के सारदा रामकृष्ण विद्या मंदिर में शाम साढ़े चार बजे से होगा। यह स्कूल विजय नगर में होटल मैरियेट के पास है। इंदौर स्टूडियो के लिये शकील अख़्तर की रिपोर्ट। 

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