इंदौर में 15 दिवसीय बाल रंग शिविर ‘हल्ला-गुल्ला 2026’ का समापन हुआ। स्थानीय सारदा रामकृष्ण विद्या मंदिर में आयोजित इस कार्यक्रम में 51 स्कूली बच्चों ने हिस्सा लिया। उन्होंने अपनी रोचक प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया। बड़ी बात ये है शिविर के प्रतिभागी बच्चों ने मुश्किल से 10 दिनों में अपनी प्रस्तुतियां तैयार की। इनमें से कई बच्चे पहली बार मंच पर आए। पढ़िये इस कार्यक्रम की पूरी रिपोर्ट: इनपुट- प्रवीण जोशी और शिल्पा सिंघल। चित्र: नीलेश सिंह चौहान इंदौर।
बच्चों ने बड़े उत्साह से परफॉर्म किया:
कार्यक्रम में सर्वश्री सत्यनारायण व्यास, संदीप श्रोत्रिय और प्रवराजिका अमितप्राणा अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके समक्ष बच्चों ने बड़े उत्साह से परफॉर्म किया। कलाकारों में कई कम उम्र के बच्चे भी शामिल थे। कार्यक्रम समय पर शुरू हुआ। सादगी इसकी ख़ासियत रही। आपको बता दें कि श्री सत्यनारायण व्यास इंदौर की प्रसिद्ध संस्था ‘सूत्रधार’ के प्रमुख हैं। ‘सूत्रधार’ के माध्यम से वे शहर में लगातार साहित्य, सिनेमा और रंगमंच के कार्यक्रम आयोजित करते रहते हैं। संदीप श्रोत्रिय, ख्यात लेखक, कवि और फिल्म प्रोड्यूसर हैं। आप आकाशवाणी इंदौर के वरिष्ठ अधिकारी भी रहे। जबकि प्रवराजिका अमितप्राणा जी सारदा मठ, इंदौर की अध्यक्ष हैं। आप बड़ी माता जी के रूप में पहचानी जाती हैं।
नाटक में सभी कलाओं का संगम:
अपने सम्बोधन में संदीप श्रोत्रिय ने कहा -‘नाटक में सभी कलाओं का संगम है। कला हमें एक बेहतर इंसान तो बनाती ही है, जीवन में सफलता का आधार भी बनती है। ताज़ा मिसाल तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ (थलापति विजय) की है। उन्होंने एक बाल कलाकार के रूप में ही अपनी शुरुआत की थी’।
बनी रहे बच्चों के चेहरों पर ख़ुशी:
श्री श्रोत्रिय ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा, ‘बच्चों को आगे बढ़ने से न रोकें, उनके चेहरों पर खुशी बनी रहे, इसका हमेशा ख्याल रखें।’ श्री सत्यनारायण व्यास ने कहा, ‘बच्चों के लिए ‘हल्ला-गुल्ला’ जैसे रचनात्मक कार्यक्रमों की बड़ी जरूरत है। यह नाट्य शिविर साल में सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि हर महीने संचालित होना चाहिए’।
जारी रहे अभिव्यक्ति का सिलसिला:
कार्यक्रम में प्रवराजिका अमितप्राणा जी ने अपने आशीर्वचन में कहा, ‘आप बच्चों ने ‘हल्ला-गुल्ला’ के माध्यम से जो कुछ सीखा, वह घर जाकर खत्म नहीं होना चाहिए। ख़ुद को व्यक्त करने का सिलसिला बिना संकोच के चलते रहना चाहिए’।
1990 से रहा इस रंग शिविर से नाता:
अतिथियों का स्वागत शिविर के निदेशक तपन मुखर्जी, संयोजिका सीमा व्यास, प्रबंधक डॉ. परशुराम तिवारी और श्वेता सिंघल ने किया। श्री तपन मुखर्जी ने नाट्य शिविर के बारे में संक्षेप में अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि वे 1990 से ही इस नाट्य शिविर से जुड़े रहे हैं। उनके बच्चे भी इसका हिस्सा बने। आज वे इसकी संस्थापक स्व. आशा कोटिया की स्मृति में अपने साथियों के साथ इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं’। संयोग से कार्यक्रम में उनके बेटे तन्मय की भी मौजूदगी रही।
3 नाटिकाएं और पॉकेट थियेटर:
कार्यक्रम में बच्चों ने तीन नाटिकाओं क्रमशः ‘खूब लड़ी मर्दानी‘, ‘ओंकारेश्वर’ और ‘एक दिन एक वन में‘ का मंचन किया। इसके साथ ही, कम अवधि के बच्चों द्वारा खुद तैयार की गई पांच पॉकेट थियेटर वाली प्रस्तुतियां, गीत-संगीत और कविता के कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। ‘हल्ला-गुल्ला’ के निदेशक तपन मुखर्जी के नेतृत्व में इनका निर्देशन वरुण जोशी, रचिता जैन, श्वेता शर्मा और शिल्पा सिंघल ने किया।
बाल कलाकारों को प्रमाण-पत्र और नाटक भेंट:
कार्यक्रम में सभी बच्चों को अतिथियों द्वारा पंद्रह दिवसीय बाल नाट्य शिविर के सर्टिफिकेट प्रदान किए गए। साथ ही, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, दिल्ली में मंचित और शकील अख्तर लिखित बाल नाटक ‘मोनिया दि ग्रेट’ की प्रतियां भी सभी बच्चों को भेंट की गईं। यह नाटक महात्मा गांधी के बचपन पर आधारित है।
36 वर्षों में 600 बच्चों को रंगकर्म का प्रशिक्षण:
आरंभ में आयोजन समिति के प्रबंधक डॉ. परशुराम तिवारी ने ‘हल्ला-गुल्ला’ के आयोजन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया, ‘स्व. आशा कोटिया ने 1990 में जब बच्चों के इस काम की शुरुआत की, तब एक प्रगतिशील शिक्षिका के रूप में उनका मकसद बच्चों को रंगकर्म के साथ ही अन्य कला विधाओं से परिचित कराना था। बीते 36 सालों में इस शिविर से करीब 600 बच्चों ने रंगकर्म का प्रशिक्षण लिया है। शहर के कई प्रतिष्ठित कलाकार और व्यक्तित्वों का इस शिविर से नाता रहा है’।
संस्कृतिकर्मियों और कलाकारों का सहयोग:
कार्यक्रम के अंत में शिविर की संयोजिका और सारदा रामकृष्ण विद्या मंदिर की वाइस प्रिंसिपल श्रीमती सीमा व्यास ने अतिथियों, अभिभावकों और आयोजन के सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ नाट्यकर्मी अंजुश्री मुखर्जी, श्री सुशील गोयल, मीडिया कर्मी सर्वश्री प्रवीण जोशी और नीलेश सिंह चौहान आदि भी शामिल हुए।
तीन साल पहले हुई शिविर की पुर्नस्थापना:
बता दें कि यह नाट्य शिविर श्रीमती आशा कोटिया और सनत कुमार जी के निधन के बाद बंद हो गया था। वर्ष 2024 में वरिष्ठ रंगकर्मी, लेखक व निर्देशक श्री तपन मुखर्जी, सांस्कृतिक पत्रकार, नाट्य लेखक व कला समीक्षक श्री शकील अख्तर, लघु कथा एवं नाट्य लेखिका श्रीमती सीमा व्यास और सह-संस्थापक डॉ. परशुराम तिवारी ने इसकी फिर से शुरुआत की। इस नई शुरुआत को शहर के बहुत से कलाकारों और संस्कृतियों का उदार सहयोग मिलता रहा है। आगे पढ़िये – बच्चों के बीच भगवान राम, ट्रैफ़िक पुलिस और पपेट आर्टिस्ट https://indorestudio.com/halla-gulla-bal-natya-shivir-indore-closing/
बच्चों ने दिखाया अपनी कला का जादू, जीता दर्शकों का दिल!
RELATED ARTICLES

